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किसानों की मौत पर आक्रोश, लेकिन सब्जियों-फलांे की जांच में नहीं मिले कीटनाशक

bhaskar news | Last Modified - Dec 03, 2017, 06:02 AM IST

जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया, जहां सभी नमूने सही निकले।
  • किसानों की मौत पर आक्रोश, लेकिन सब्जियों-फलांे की जांच में नहीं मिले कीटनाशक

    नागपुर.कीटनाशकों के छिड़काव से किसानों की हो रही मौत के मामले थम नहीं रहे। इसकी चपेट में आकर रोज कहीं न कहीं किसान जान गंवा रहे हैं, लेकिन उनकी खेतों से निकलकर बाजारों में पहुंचनेवाली शाक-सब्जियां और फलों में कीटनाशकों का कोई अंश नहीं मिलना, लोगों को हैरान कर रहा है। सब्जियों और हरी सब्जियों में कीटनाशकों के अंश का पता लगाने के लिए बीते 7 माह के दौरान नमूने जुटाए गए थे। उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया, जहां सभी नमूने सही निकले।

    िकसानों को पूरी जानकारी नहीं
    फसलों को विभिन्न बीमारियों और कीटों से बचाने के लिए किसान बिना जरूरी सुरक्षा उपाय किए खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं और इसकी चपेट में आने से मरते हैं। किसानों को कीटनाशकों को छिड़काव करते समय जो सुरक्षा उपाय और किट्स चाहिए होती है, उसके बारे में अधिकतर किसानों को जानकारी ही नहीं होती है।

    वर्ष 2017 में जुटाए गए 249 नमूनों में से एक भी फेल नहीं
    प्रयोगशाला से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2017 तक प्रयोगशाला द्वारा जुटाए गए कुल 249 नमूनों में से एक भी नमूना फेल नहीं पाया गया। अर्थात किसी भी नमूनों में कीटनाशक के अंश नहीं पाए गए हैं। ध्यान रहे इसी कालखंड में सबसे अधिक कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है। इन सात माह के दौरान चालू माह में लाए गए 66 नमूनों में से 57 नमूने बाजार से सर्विस सैंपल 3 व विभाग से अन्यत्र प्राप्त 6 नमूनों का समावेश रहा। इनमें से किसी भी नमूने में कीटनाशक नहीं पाए गए हैं। वहीं सातों माह में जुटाए गए 249 नमूनों में से 154 बाजारों से, 51 सर्विस नमूने, 44 विभाग से लिए गए थे और ये सभी नमूने सुरक्षित पाए गए हैं।

    वर्ष 2012 से 2016 के नमूनों में से कुछ न कुछ हुए थे फेल
    पूर्व के रिकॉर्डों को देखें तो अप्रैल 2012- मार्च 2013 के दौरान 9 प्रकार की शाक सब्जियों में ये कीटनाशक पाए गए थे, अप्रैल 2013 से फरवरी 2014 तक चार नमूने फेल पाए गए। अप्रैल 2014 से मार्च 2015 तक 3 नमूने फेल हुए व वर्ष 2016 में 4 नमूनों में कीटनाशकों के अंश पाए गए थे।

    खाद्य पदार्थ मिलावट प्रतिबंध अधिनियम के तहत शाक-सब्जियों में कीटनाशकों के अंश हैं या नहीं, इसकी जांच की जाती है। कीटनाशकों के प्रमाण की स्वीकृत सीमा के बाहर अगर किसी नमूने में कीटनाशक पाए जाते हैं तो वह नमूना फेल होता है। लेकिन इस दौरान कोई नमूना फेल नहीं पाया गया। इसलिए कहा जा सकता है कि बाजार में मिलनेवाली सब्जियां खाने के िलए सुरक्षित हैं।
    - एम.वी. मोरेकर, विश्लेषक रसायनशास्त्रज्ञ, कीटनाशक उर्वरित अंश जांच प्रयोगशाला, नागपुर

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Web Title: Resentment At The Death Of Farmers
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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