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RSS की कार्यकारिणी सूची अब तक तैयार नहीं, देर रात तक चर्चाओं का दौर चलता रहा

प्रमुख पदाधिकारियों के बीच देर रात तक चर्चाओं का दौर चलता रहा, कुछ नामों को लेकर सहमति नहीं बन पाई

Bhaskar News | Last Modified - Mar 13, 2018, 06:41 AM IST

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    नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यकारिणी तैयार करने को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सोमवार को संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के समापन के बाद भी कार्यकारिणी सूची तय नहीं हो पाई। प्रमुख पदाधिकारियों के बीच देर रात तक चर्चाओं का दौर चलता रहा। नामों को लेकर उत्सुकता बनी रही।

    - संघ मामलों के जानकारों की मानें, तो कार्यकारिणी में कुछ नामों को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। संघ का एक वर्ग कुछ पदाधिकारियों का संघ में महत्व बढ़ाना चाहते थे।

    - भाजपा व संघ के बीच राजनीतिक मामलों में संवाद की कड़ी माने जाने वाले सहसरकार्यवाह सुरेश सोनी जैसे पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारी दिए जाने के निवेदन पर विचार ही नहीं किया गया। ऐसे ही कुछ मामले में साफ सहमति नहीं बन पाई। जल्द ही भाजपा में भी संगठनात्मक फेरबदल होने वाला है।

    संघ व भाजपा के बीच समन्वय के लिए िवशेष कार्ययोजना पर विचार किया जा रहा है। कहा गया है कि संघ व भाजपा के कार्य में बढ़त हुई है। दोनों का समाज के बीच प्रभाव बढ़ा है। लिहाज संघ की ओर से भाजपा में ऐसे पदाधिकारी नियुक्त करने की पेशकश की गई है जो संघ पृष्ठभूमि के हो।

    उधर भाजपा का नेतृत्व कर रहे प्रमुख नेताओं की भी अपनी कुछ शर्ते हैं। समाज व सत्ता के लिए किए जाने वाले कार्यों की शैली व प्रणाली को लेकर मतभेद हैं। विविध स्थितियों को देखते हुए संघ की पूरी कार्यकारिणी घोषित नहीं की जा सकी है।

    गौरतलब है कि संघ में सरकार्यवाह के सहयोग के लिए सहसरकार्यवाहों की संख्या 4 से 6 कर दी गई है। लेकिन अन्य प्रमुख विभागों के लिए पदाधिकारियों के नाम घोषित नहीं किए गए हैं। बौद्धिक विभाग, शारीरिक विभाग, संपर्क विभाग, सेवा विभाग व व्यवस्था विभाग का संघ के संगठनात्मक मामले में काफी महत्व है। इन िवभागों के प्रमुखों के नाम सामने नहीं आ पाए हैं।

    आरएसएस नाम का उपयोग रोकने से हाईकोर्ट का इनकार

    - बॉम्बे हाइकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने आरएसएस नाम के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है। जनार्दन मून ने अपनी संस्थान को आरएसएस नाम से पंजीकृत कराने के लिए हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी। यह याचिका फिलहाल विचाराधीन है। मून ने इसके साथ एक अर्जी जोड़ कर आरएसएस नाम का उपयोग रुकवाने की प्रार्थना हाइकोर्ट से की थी, जिससे कोर्ट ने इनकार कर दिया।

    - मून ने आरएसएस के नाम पर अपनी संस्था के पंजीयन के लिए धर्मादाय आयुक्त कार्यालय की शरण ली थी। वहां से उनकी अर्जी खारिज हो गई, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में सह-धर्मादाय आयुक्त के फैसले को चुनौति दी गई है।

    - दलील है कि आयुक्त के फैसले में सोसायटी रजिस्ट्रेशन के कुछ नियमों के साथ ही "राष्ट्रीय' शब्द के उपयोग पर प्रतिबंध की बात से वे सहमत नहीं है।

    - उनके अनुसार प्रदेश सरकार ने अपने सर्कुलर में "भारतीय' शब्द के प्रयोग पर रोक लगाई है, ना की "राष्ट्रीय' शब्द पर। उन्होंने अपनी संस्था का नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रूप में पंजीकृत कराने के लिए मून ने बीते 26 जुलाई को धर्मादाय आयुक्त कार्यालय में आवेदन किया था।

    - मामले में अधिवक्ता राजेंद्र गुंडलवार व एम.अभ्यंकर ने विरोध कर दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम पर चंद्रपुर में संस्था पहले से ही पंजीकृत है। अन्य दो नागरिकों की अापत्ति के साथ अधिवक्ता अभ्यंकर ने मून के आवेदन का विरोध किया।

    - अभ्यंकर ने कहा कि राष्ट्रीय नाम से धर्मादाय आयुक्तालय किसी संस्था को पंजीयन नहीं देता है। संस्था को भारत सरकार ने मंजूरी दी है। इस मामले में धर्मादाय आयुक्त कार्यालय सभी पक्ष को सुनकर जनार्दन मून की अर्जी को ठुकरा दिया था।जिसके बाद अब मामला हाइकोर्ट में है।

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