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मुकेश अंबानी-प्रेमजी जैसे कारोबारियों को चेयरमैन-एमडी में से एक पद छोड़ना पड़ेगा: सेबी का फैसला

फॉर्चून पत्रिका के मुताबिक इन 500 कंपनियों का कुल टर्नओवर भारत की जीडीपी के 60% से ज्यादा है।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 29, 2018, 10:46 AM IST

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    मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन भी हैं और मैनेजिंग डायरेक्टर भी। -फाइल

    मुंबई.चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) पद पर तैनात देश के बड़े उद्योगपतियों को इनमें से एक पद छोड़ना होगा। ऐसे उद्योगपतियों में रिलायंस के मुकेश अंबानी और विप्रो के अजीम प्रेमजी भी हैं। पूंजी बाजार रेगुलेटर सेबी ने कॉरपोरेट गवर्नेंस पर उदय कोटक समिति की कुछ सिफारिशें मंजूर की हैं। इनमें से एक में मार्केट कैप के लिहाज से 500 बड़ी कंपनियों को 1 अप्रैल 2020 तक चेयरमैन और एमडी/सीईओ का पद अलग करने को कहा गया है। फॉर्चून पत्रिका के मुताबिक, इन 500 कंपनियों का कुल टर्नओवर भारत की जीडीपी के 60% से ज्यादा है।

    मामले पर क्या तर्क है कमेटी का?

    कोटक समिति का कहना है कि चेयरमैन और एमडी का पद एक शख्स के पास होने से मैनेजमेंट की स्वतंत्रता कम होती है। दोनों पद अलग-अलग शख्स को देने से गवर्नेंस का ढांचा संतुलित होगा।

    इन उघाेगपतियों के पास है चेयरमैन और एमडी/सीईओ का पद

    मुकेश अंबानीरिलायंस इंडस्ट्रीज
    अजीम प्रेमजीविप्रो लिमिटेड
    वेणु श्रीनिवासनटीवीएस मोटर्स
    सज्जन जिंदलजेएसडब्लू
    वेणुगोपाल धूतवीडियोकॉन
    किशोर बियानीफ्यूचर रिटेल
    गौतम अदाणीअदाणी पोर्ट्स

    कंपनी में चेयरमैन, एमडी का क्या रोल होता है

    चेयरमैन: बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का प्रमुख होता है। इसका फोकस विजन और लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर होता है।
    एमडी/सीईओ:कंपनी के रोज के कामकाज की जिम्मेदारी होती है। इसलिए पद चेयरमैन से ज्यादा अहम होता है।

    कोई कमजोर शख्स अब बन सकता है चेयरमैन

    जो प्रमोटर कंपनी पर अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाहते, वे एमडी या सीईओ का पद अपने पास रख किसी कमजोर शख्स को चेयरमैन बना सकते हैं। इस तरह दोनों पदों का कंट्रोल उन्हीं के पास रहेगा।

    91% कंपनियों में प्रमोटर के पास बहुमत शेयरहोल्डिंग

    - यह फैसला कंपनी में ज्यादा शेयरहोल्डिंग वाले प्रमोटरों के लिए परशानी वाला हो सकता है। देश की 91% कंपनियों में प्रमोटर या उनके परिजनों के पास बहुमत शेयरहोल्डिंग है।

    - सेबी ने बोर्ड मीटिंग में म्यूचुअल फंड स्कीमों में अतिरिक्त खर्च की सीमा 0.15% घटाने का भी फैसला किया है।

    - अभी तक म्यूचुअल फंड कंपनियों (एएमसी) को कस्टमर से स्कीम के एनएवी के 0.20% तक अतिरिक्त खर्च लेने की इजाजत थी। इसे अब 0.05% कर दिया गया है।

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    अजीम प्रेमजी विप्रो लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। -फाइल
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