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सिंगल स्टोन से बनी वर्ल्ड की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति ,30 किमी दूरी से दिख जाती है

1037 साल के बाहुबली के 86वां आयोजन में 20 दिन होने वाले उत्सव के दौरान 500 करोड़ रु. खर्च होंगे।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 15, 2018, 10:11 AM IST

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    यह फोटो सबसे पहले भास्कर में कर्नाटक के हासन जिले में श्रवणबेलगोला की विंध्यगिरि पहाड़ी पर स्थित भगवान बाहुबली की प्रतिमा की यह फोटो ड्रोन की मदद से ली गई है।

    बेंगलुरू. 981 ईसवी में गंग साम्राज्य के राजा राजमल के सेनापति चामुंडराय ने मां की इच्छा पर श्रवणबेलगोला में बाहुबली की प्रतिमा बनवाई थी। यह एक ही पत्थर से बनी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति है। 58.8 फीट ऊंची है। 30 किमी दूरी से दिख जाती है। चीन में लेशेन में बुद्ध की 233 फीट ऊंची प्रतिमा है। निर्माण 8वीं सदी में हुआ था। मिस्र के 2000 साल पुराने पिरामिड 65 फीट तक ऊंचे हैं।

    प्लेटफॉर्म बनाने के लिए जर्मनी से मंगाया 450 टन सामान
    - प्रतिमा के पास प्लेटफॉर्म बनाने के लिए पहली बार जर्मन टेक्नोलॉजी और सामान मंगाए गए हैं। स्टेज पर एक बार में 6 हजार लोग पूजा में हिस्सा ले सकेंगे।
    - प्लेटफॉर्म बनाने के लिए करीब 450 टन सामान जर्मनी से गुजरात पोर्ट पर मंगाया गया। वहां से श्रवणबेलगोला लाया गया। इस पर 12 करोड़ रु. का खर्च आया।
    - प्लेटफॉर्म पर पहुंचने के लिए 3 एलिवेटर्स बने हैं। दो श्रद्धालुओं के लिए है। एक महाभिषेक सामग्री पहुंचाने के लिए होगा।
    - प्लेटफॉर्म बीम में नट-बोल्ट जोड़ने के लिए ‘रिंग एंड लॉक’ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया। नट-बोल्ट का नहीं लगे हैं। यह सबसे सुरक्षित माना जाता है।

    1037 साल के बाहुबली का 86वां आयोजन

    कर्नाटक का श्रवणबेलगोला में स्थित विंध्यगिरि पहाड़ी पर भगवान बाहुबली के 86वें महामस्तकाभिषेक की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यह आयोजन हर 12 साल पर होता है। इस बार 7 से 26 फरवरी तक महोत्सव चलेगा। इस मौके पर 1037 साल पुरानी इस मूर्ति का दूध, दही, घी, केसर, सोने के सिक्के समेत कई पवित्र वस्तुओं से अभिषेक किया जाता है। पिछला अभिषेक 2006 में हुआ था।

    दुनियाभर से 30 लाख लोग आएंगे, इनके लिए 12 उपनगर बसाए गए

    - 2006 के आयोजन पर 120 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। इसबार चार गुना अधिक करीब 500 करोड़ रु. खर्च होने की उम्मीद है। इसमें राज्य सरकार ने अब तक 175 करोड़ रुपए दिए हैं।
    - ठहरने के लिए 12 उपनगर बसाए गए हैं। इस पर 75 करोड़ रु. खर्च आया है। संतों के लिए त्यागी नगर बनाया गया है। इसके अलावा आसपास के सारे होटल-रिसॉर्ट बुक हो चुके हैं।
    - पूरा आयोजन कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकिर्ती भट्‌टारक स्वामी जी करा रहे हैं। ये उनके नेतृत्व में लगातार चौथा महामस्तकाभिषेक है।
    - दूध, दही, केसर व अन्य सामग्री से अभिषेक होता है। इससे प्रतिमा को नुकसान न हो इसलिए पुरातत्व विभाग ने विशेष रसायन की परत चढ़ाई है।
    - मंदिर जाने के लिए 618 सीढ़ियों की चढ़ाई है। जो नहीं चढ़ सकते उनके लिए पालकियां होंगी।
    - महोत्सव में 17 तरह की भोजनशाला भी बनाई जा रही है। इसमें हर राज्य का भोजन मिलेगा। रोज करीब एक लाख लोगों का भोजन बनेगा।
    - पहली बार खाद्य सामग्री राजस्थान समेत उत्तर भारत से आएगी। अब तक दक्षिण से आती रही है। सुपर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल खोला गया है।
    - कार्यक्रम भव्य बनाने के लिए देशभर में 40 कमेटियां बनी हैं। 5 हजार जवान तैनात रहेंगे।

    फोटो: ताराचंद गवारिया।

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    यह एक ही पत्थर से बनी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति है।
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    981 ईसवी में गंग साम्राज्य के राजा राजमल के सेनापति चामुंडराय ने मां की इच्छा पर श्रवणबेलगोला में बाहुबली की प्रतिमा बनवाई थी।
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    ड्रोन से ली गई तस्वीर।
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    ऊपर से ऐसी दिखती है प्रतिमा।
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    मंदिर में पूजा के लिए बनाया गया प्लैटफार्म।
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    दूर से ऐसी दिखती है प्रतिमा।
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    मंदिर जाने के लिए 618 सीढ़ियों की चढ़ाई है। जो नहीं चढ़ सकते उनके लिए पालकियां।
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    चरणों की पूजा करते लोग।
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Web Title: Third Biggest Statue Shravanabelagola Festival
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