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एक और बैंक घोटाला, हैदराबाद के पति-पत्नी ने आयकर विभाग से की 1400 करोड़ की धोखाधड़ी

भास्कर ने खंगाले सीबीआई के दस्तावेज; इनकम टैक्स की तरफ से 15 लाख का इनाम था इन पर।

अनूप कुमार मिश्र /उपमिता वाजपेयी | Last Modified - Apr 01, 2018, 09:19 AM IST

  • एक और बैंक घोटाला, हैदराबाद के पति-पत्नी ने आयकर विभाग से की 1400 करोड़ की धोखाधड़ी, national news in hindi, national news
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    कारोबारी सलालिथ और उनकी पत्नी कविता वर्ष 2008 में यंग एंड डायनमिक आंत्रप्रेन्योरशिप का अवॉर्ड भी मिला है।-फाइल
    • हैदराबाद के पति- पत्नी 6 साल तक बैंक और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट विभाग को धोखा देते रहे।
    • इनकम टैक्स विभाग ने इन्हें ढूंढकर लानेवाले को 15 लाख इनाम देने की घोषणा की थी।

    नई दिल्ली/हैदराबाद. पीएनबी फ्रॉड के बाद से कई बैंक घोटाले सामने आ रहे हैं। इसी बीच हैदराबाद से एक बेहद चौकाने वाला मामला सामने आया है। यह एक ऐेसे पति-पत्नी का मामला है, जिन्होंने करीब 1400 करोड़ रुपए का बैंक घोटाला किया और पिछले 6 साल से बैंक और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट विभाग को धोखा देते रहे। इस मामले में चौकाने वाली बात ये है कि ये घोटालेबाज न तो माल्या और नीरव मोदी की तरह रसूखदार हैं और न ही इन्होंने बैंकों में फंड इधर-उधर करते समय अपना नाम-पता बदला है। सीबीआई भी इनके घोटाले से चौंक गई है। इन्हें वर्ष 2008 में यंग एंड डायनमिक आंत्रप्रेन्योरशिप का अवॉर्ड भी मिला है।

    देश से भागने की फिराक में था तोतेमपोडी

    - दरअसल, नीरव मोदी का मामला सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सभी बैंकों से अपने नॉन परफॉर्मिंग असेट्स (एनपीए) बताने के लिए कहा। जिसके बाद ही यूनियन बैंक, हैदराबाद के मैनेजर शेख मोहम्मद अली ने बिजनेसमैन सलालिथ तोतेमपोडी द्वारा 1394 करोड़ कर्ज लेने और नहीं लौटाने की शिकायत सीबीआई से की।

    - सीबीआई ने जांच शुरू की तो अफसर भी चौक गए। पिछले हफ्ते 23 मार्च को सलालिथ तोतेमपोडी को तब गिरफ्तार किया गया जब वो देश से भागने की फिराक में था।
    - एक बड़ा सवाल यह अभी भी बना हुआ है कि सलालिथ और उसकी पत्नी कविता आखिर इतने सालों तक कैसे बचते रहे? ऐसे में भास्कर ने उन दस्तावेजों को खंगाला जिसके आधार पर अब सीबीआई ने जांच शुरू की है।

    ये है पूरा मामला

    - कारोबारी सलालिथ ने पत्नी कविता के साथ मिलकर 7 नवंबर 1997 को हैदराबाद के बंजाराहिल से तोतेम इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक कंपनी की शुरुआत की थी।

    - यूनियन बैंक ने सीबीआई को दी गई शिकायत मे बताया कि पहले उन्हें पता चला कि तोतेम ने एक्सिस बैंक में नया खाता खोला है। उन्होंने कंसोर्टियम बैंक को बताए बगैर अपने फंड काे दूसरे बैंक में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया है। बैंक की विजलेंस जांच में पता चला कि वेतन और स्टॉक के नाम पर फंड दूसरे बैंक में ट्रांसफर किया गया है।

    - जांच में यह भी पता चला कि कंपनी ने कंसोर्टियम बैंक के खातों से भारी तादाद में फंड को कर्नाटक बैंक और फिर कर्नाटक बैंक से अपने निजी खातों में ट्रांसफर किया है। कंपनी ने 31 मार्च 2012 को कंपनी का स्टॉक 380.94 करोड़ रु. दिखाया था।

    - वहीं, 31 अगस्त 2012 में इस स्टॉक को घटा कर 96 करोड़ कर दिया गया। यानी स्टाॅक की जानकारी भी गलत दी। इसके अलावा, पता चला कि बिक्री की गई राशि को लोन अकांउट में ट्रांसफर करने की बजाय दूसरे-दूसरे खातों में जमा किया है।

    - जांच में यह भी पता चला कि कंपनी को जनवरी 2012 से अगस्त 2012 के बीच करीब 145.76 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई थी। जिसमें से सिर्फ 16.51 करोड़ रुपए कंसोर्टियम बैंक के खातों में जमा किए गए, जबकि 121.25 करोड़ रुपए गलत तरीके से दूसरे खातों में डाइवर्ट कर दिया गया। शिकायत में कहा गया है कि कंपनी ने अपने खर्चों को अधिक दिखाने के लिए लेबर चार्ज को बढ़ा कर दिखाया, जबकि दूसरी लागतों में किसी तरह की वृद्धि नहीं हुई। यह काम फंड को गलत तरीके से दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया गया था।

    15 लाख के इनाम की घोषणा

    - सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, तोतेम इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की गड़बड़ियों का पता चलने के बाद बैंक ने कंपनी के खातों का फाॅरेंसिक ऑडिट कराना चाहा था।

    - लेकिन कंपनी के डायरेक्टर्स ने उनका सहयोग नहीं किया। ये लंबे समय से इनकम टैक्स भी जमा नहीं कर रहे थे। जो जमा होते होते 400 करोड़ हो चुका था। हालात ये हुए कि 2015 में इनकम टैक्स विभाग ने इन्हें ढूंढकर लानेवाले को 15 लाख इनाम देने की घोषणा की थी।

    - खुफिया विभाग की नजर इन पर थी। उन्हीं की जानकारी के बदौलत सीबीआई ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया। 21 मार्च को बैंक मैनेजर ने इस मामले की शिकायत दर्ज करवाई है। एफआईआर में अज्ञात पब्लिक सर्वेंट यानी सरकारी कर्मचारी और अन्य अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है।

    सिविल वर्क से जुड़ी है कंपनी

    - सलालिथ की कंपनी रोड प्रोजेक्ट, वॉटर वर्क्स, बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के सिविल वर्क से जुड़ी थी। दंपती ने बेहद कम समय में सफलता हासिल कर ली थी। कंपनी ने बड़ी कंपनियों के सब-काॅन्ट्रैक्ट लेना भी शुरू कर दिया था।

    - इन सब-काॅन्ट्रैक्ट को पूरा करने के लिए तोतेम इंफ्रास्ट्रचर ने एक के बाद एक करीब आठ बैकों से लेटर आॅफ क्रेडिट और क्रेडिट फैसिलिटी के जरिए करोड़ों का कर्ज ले लिया। क्षमता से अधिक कार्य का विस्तार होने के चलते तोतेम इंफ्रास्ट्रक्चर अपने ज्यादातर सब-कांट्रैक्ट समय पर पूरा नहीं कर सकी।

    - जिससे प्रमुख कंपनियों ने तोतेम इंफ्रास्ट्रक्टर द्वारा उपलब्ध कराई गई बैंक गारंटी ले ली। जिससे तोतेम इंफ्रास्ट्रक्चर के सिर पर अचानक सभी बैंकों का भारी कर्ज आ गया। वह लगातार किस्त और ब्याज के भुगतान में विफल होने लगी।

    - तब इस दंपती ने अपने कंसोर्टियम बैंक के साथ धोखाधड़ी शुरू कर दी। जब दंपति द्वारा की जा रही धोखाधड़ी का पता चला तो कंसोर्टियम की अगुवाई कर रहे यूनियन बैंक ने सीबीआई से शिकायत की।

    - सलालिथ टोटेमपोडी ने हैदराबाद की ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली है।

    बचने के लिए बदली आॅडिट कंपनी

    - जांच में पता चला कि कंपनी ने 2010-11 में हैदराबाद की अक्षम एसोशिएट चाटर्ड एकाउंटेंट से आॅडिट कराया था। वहीं 2011-12 के आॅडिट के लिए कंपनी ने अचानक आॅडिटर बदल दिया। इस वित्तीय वर्ष का आॅडिट लखनऊ की कंपनी को सौंपा गया। रिपोर्ट में फर्म ने लेबर चार्ज के तौर पर भुगतान किए गए 208.23 करोड़ रु. पर कोई कमेंट नहीं दिया। रेवेन्यू को 840.08 करोड रु.से घटा कर 805.80 करोड़ दिखाया गया। स्टॉक की बढ़ोतरी पर भी कोई कमेंट नहीं दिया गया था।

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    पहचान बदले बगैर, बिना डर, वेतन और स्टॉक के नाम पर फंड एक से दूसरे बैंक में भेजते रहे। (फाइल)
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