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मुंबई ब्लास्ट के 25 साल: अंडरवर्ल्ड और माफियाराज का अंत, मुंबईकर के आगे हार गया आतंक

हमले के 48 घंटे के भीतर साजिश करने वालों की पहचान कर ली गई थी...

Bhaskar News | Last Modified - Mar 12, 2018, 08:55 AM IST

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    12 मार्च 1993 को 12 विस्फोटों में 253 लोगों की जान गई थीं। - फाइल

    मुंबई. आज 12 मार्च है। ठीक 25 साल पहले मुंबई सीरियल ब्लास्ट से दहल उठी थी। 2 घंटे 10 मिनट के भीतर एक के बाद एक 12 धमाके हुए। 257 लोग मारे गए। 1300 से ज्यादा लोग जख्मी हुए। यह उस वक्त दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला था। देश में पहली बार विस्फोटकों में आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था। यह हमला अंडरवर्ल्ड ने कराया था। अभी भी धमाकों से जुड़े लोगों के खिलाफ धरपकड़ जारी है। चार दिन पहले ही इस केस में आरोपी फारुख टकला को दुबई से मुंबई लाया गया है। टकला अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का गुर्गा है। हालांकि इस हमले ने हमें कुछ सबक भी सिखाए। इसके बाद हमारे देश में गैंगस्टर, स्मगलर के खिलाफ अभियान तेज हुआ। देश की इंटलीजेंस एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ा। खुफिया नेटवर्क पूरी तरह बदल गया। सरहदी इलाकों पर निगरानी तेज हुई। इस तरह से कई बदलाव आए।

    #पांच सबसे बड़े बदलाव

    अंडरवर्ल्ड का खात्मा: मुंबई हमले में अंडरवर्ल्ड का हाथ था। अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग बॉलीवुड, बिल्डरों से वसूली करते थे। खात्मे के लिए मकोका कानून बना। एनकाउंटर शुरू हुए। इस दौरान एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक, विजय सालस्कर, प्रदीप शर्मा और सचिन वाजे जैसे अफसर उभरे। पुलिस के प्रति लोगों में विश्वास बढ़ा।

    पुलिसिया खुफिया तंत्र मजबूत हुआ: पुलिस ने खुफिया सिस्टम में बदलाव करते हुए कम्यूनिकेशन सिस्टम को मजबूत किया। कुछ ही पल में विदेश में बैठे माफियाओं की योजना का पता चलने लगा। अंडरवर्ल्ड को मदद करने वाले लोग नजर में आने लगे। उगाही पर रोक लगी।

    मुंबई स्पिरिट दिखी : मुंबई ब्लास्ट विवादित बाबरी ढांचे विध्वंस का बदला लेने के लिए किए गए थे। पर इस हमले ने लोगों में एकता की भावना दी। हमले के तुरंत बाद लोग घायलों की मदद में आए। अगले दिन बिना किसी निर्देश के जर्जर बिल्डिंगों में काम पर लौटे। तब से सांप्रदायिक हिंसा में भी कमी आई। इसे मुंबई स्पिरिट कहा जाता है।

    जांच एजेंसियों में तालमेल बेहतर हुआ, संगठित अपराध कम हुए
    मुंबई हमले से पहले जांच एजेंसियों में कोई तालमेल नहीं था। लेकिन हमले के बाद महाराष्ट्र पुलिस, मुंबई पुलिस ने अंडरवर्ल्ड की पूरी कमर तोड़ दी है। इसी तरह केंद्रीय जांच एजेंसियों आईबी, रॉ, सीबीआई का लोकल पुलिस के साथ तालमेल बढ़ा। यही वजह है िक 1993 के बाद अंडरवर्ल्ड कोई बड़े हमले को अंजाम नहीं दे सका।

    सरहदी इलाकों में सुरक्षा बढ़ी, जाली पासपोर्ट पर सख्ती
    मुंबई हमले के बाद आरोपी जाली पासपोर्ट और गैरकानूनी तरीके से नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान की सीमा से भाग निकले थे। लिहाजा सीमाई इलाकों पर चौकसी बढ़ाई गई। पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया कठिन की गई। जाली पासपोर्ट पर सख्ती की गई।

    दो घंटे 10 मिनट के अंदर 12 जगहों पर हुए थे सीरियल ब्लास्ट

    यहां हुए थे धमाके
    (1) मुंबई स्टॉक एक्सचेंज
    (2) नरसी नाथ स्ट्रीट
    (3) शिव सेना भवन
    (4) एयर इंडिया बिल्डिंग
    (5) सेंचुरी बाजार
    (6) माहिम
    (7) झवेरी बाजार
    (8) सी रॉक होटल
    (9) प्लाजा सिनेमा
    (10) जुहू सेंटूर होटल
    (11) सहार हवाई अड्डा
    (12) एयरपोर्ट सेंटूर होटल

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    पुलिस ने 48 घंटे में सुलझाया था केस, स्कूटर बना था अहम सुराग

    पुलिस ने 48 घंटे में केस सुलझा दिया था। डीसीपी राकेश मारिया के नेतृत्व में 150 लोगों की टीम बनी थी। अहम सुराग बना था माहिम में खड़ा एक स्कूटर, जिसमें बम तो था पर विस्फोट नहीं हुआ।

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    25 साल बाद भी आरोपी पकड़े जा रहे, मुख्य आरोपी अब भी फरार

    1 अप्रेल 1994 टाडा कोर्ट में सुनवाई शुरू। 12 साल 12 दोषियों को फांसी, 20 को आजीवन कारावास। चार दिन पहले भी एक आरोपी फारुख टकला पकड़ा गया। दाऊद अब भी फरार है।

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    ब्लैक फ्राइडे: मुंबई हमले पर बनी फिल्म और लिखी किताब हिट रही

    - मुंबई हमले पर 2004 में फिल्म ब्लैक फ्राइडे बनी। फिल्म बनने के 2 साल बाद रिलीज हुई थी।

    - ये फिल्म हुसैन जैदी की 2002 में धमाकों पर ही लिखी किताब ‘ब्लैक फ्राइडे’ पर आधारित थी।

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Web Title: Underworld End From Mumbai After 25 Years Of Serial Blast
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