Hindi News »Maharashtra »Mumbai» Uterus Transplantation To Baby Birth First Time In India

देश में पहली बार: मां की जिस कोख से बेटियों ने जन्म लिया, उसी से अब अपने बच्चे को जन्म देंगी

देश में पहली बार गर्भाशय ट्रांसप्लांट से दो महिलाएं देंगी संतान को जन्म

Bhaskar News | Last Modified - Dec 31, 2017, 06:48 AM IST

  • देश में पहली बार: मां की जिस कोख से बेटियों ने जन्म लिया, उसी से अब अपने बच्चे को जन्म देंगी
    +1और स्लाइड देखें
    किसान परिवार में जन्मी सुनंदा के शरीर में यूटरस ही नहीं था। -सिम्बॉलिक इमेज।

    अहमदाबाद/नागपुर.17 मई 2017 को देश की पहली यूटरस ट्रांसप्लांट सर्जरी शोलापुर की सुनंदा की हुई। दो दिन बाद गुजरात के वड़ोदरा की सोनल की भी यही सर्जरी हुई। आने वाला साल इन दोनों महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे बड़ा सुख यानी मातृत्व का सुख ला रहा है। इसे नए साल की एक बड़ी खुशी और एचीवमेंट के ताैर पर देखा जा रहा है। पढ़िए ऐसी ही दो सच्ची कहानियां।

    30 लाख था खर्च, 16 डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन, किसी ने पैसे नहीं लिए

    महाराष्ट्र के अक्कलकोट की सुनंदा। 17 मई 2017 को देश में पहली यूटरस ट्रांसप्लांट सर्जरी इन्हीं की हुई थी। आज वो खुश भी हैं और दूसरी तरफ अपने आंसू रोक पाना भी उनके लिए मुश्किल हो रहा है।

    सुनंदा के मुताबिक, "मां की जिस कोख से मैंने जन्म लिया। उसी से अब मेरी संतान जन्म लेगी। यह अद्भुत और अानंददायी है। मां ने मेरे लिए जो किया वो बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं'।"

    किसान परिवार में जन्मी सुनंदा बताती हैं- "जन्म से शरीर में यूटरस नहीं था। लेकिन यह बात समझ आई शादी के बाद। पीरियड्स नहीं आते थे, इसलिए पति राम मुझे अस्पताल लेकर गए। पुणे के डॉ. पुणतांबेकर के यहां। उन्होंने दो विकल्प सामने रखे। एक- बच्चा गोद लेने का, दूसरा- सरोगेसी। मुझे दोनों विकल्प नहीं चाहिए थे। फिर उन्होंने तीसरा विकल्प भी बताया- अगर तुम्हारी मां अपना यूटरस दे तो समस्या का हल निकल जाएगा। तुम मां बन सकोगी। मां और मेरी पूरी मेडिकल जांच हुई। अनेक टेस्ट हुए। हम एक बार भी नहीं घबराए।

    जब वो मां बनेगी तो वह पल मेरे लिए भी फिर मां बनने जैसा होगा

    मां तो कहती थीं- मेरी वजह से मेरी बेटी को मातृत्व मिल सकता है, इससे बड़ी खुशी की बात हो ही नहीं सकती। इसके लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूं।
    आखिरकार सर्जरी कर मां के यूटरस को मेरे शरीर में प्रत्यारोपित किया गया। 22 साल की उम्र में मेरे शरीर में जो अच्छे बदलाव हुए, इससे मैं अब मां बन सकती हूं। सुनंदा की मां धानम्मा कहती हैं, मैंने उसे अपनी कोख दी है। इस पर उसका हक था। अब जब वो मां बनेगी तो वह पल मेरे लिए भी फिर मां बनने जैसा होगा।

    16 डॉक्टर की टीम में से एक भी डॉक्टर ने पैसे नहीं लिए

    सर्जरी से पहले डॉक्टर्स ने सुनंदा और धनम्मा को बताया था कि कोई खतरा नहीं है, लेकिन यह भी कहा था कि कुछ भी हो सकता है। लेकिन मां-बेटी इससे जरा भी घबराए नहीं। पिता ने भी दोनों की हिम्मत बढ़ाई। 45 दिन तक दोनों की काउंसलिंग हुई। यूटरस ट्रांसप्लांटेशन की इस सर्जरी के लिए 30 लाख रुपए खर्च आया, लेकिन 16 डॉक्टर की टीम में से एक भी डॉक्टर ने पैसे नहीं लिए। इतिहास रचा जा रहा था और समाज के प्रति कुछ करने की भावना थी।

    सर्जरी के दौरान सुनंदा के लिए अलग आईसीयू बनाया था
    सुनंदा की सर्जरी टीम के मैंबर्स और गायनोक्लाेजिस्ट डॉ. मनोज मंचेवार कहते हैं, हमने देखभाल घर की सदस्य की तरह की। नतीजे अब दिखने लगे हैं। उसे पीरियड्स शुरू हो चुका है। सर्जरी की कामयाबी का यह पहला अच्छा संकेत है। इसका आनंद अलग ही है।

    सर्जरी के दौरान सुनंदा की देखभाल करने वाली नर्स वृषाली टेंभूर्णे कहती हैं, सुनंदा 15 दिन अस्पताल में थीं। सर्जरी के बाद मैं 15 दिन तक आईसीयू में ही रही। मैं वहां से बाहर नहीं निकली। उनके लिए अलग आईसीयू बनाया था, वहीं पर खाना पकाते थे, वहीं खाते थे।
    (सुनंदा और धानम्मा के नाम बदले हुए हैं।)

    (रिपोर्ट - महाराष्ट्र के सोलापुर से अश्विनी तडवलकर और गुजरात के अहमदाबाद से सिद्धि व्यास।)

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, इंफेक्शन का इतना खतरा था कि पति तक को मिलने की इजाजत नहीं दी...

  • देश में पहली बार: मां की जिस कोख से बेटियों ने जन्म लिया, उसी से अब अपने बच्चे को जन्म देंगी
    +1और स्लाइड देखें
    वड़ोदरा की सोनल के केस में यूटरस ट्रांसप्लांट की कामयाब सर्जरी के बाद अब डॉक्टर भ्रूण प्रत्यारोपण की तैयारी कर रहे हैं। -सिम्बॉलिक इमेज।

    सोनल की संतान प्रत्यारोपित गर्भ से जन्म लेने वाला देश का पहला बच्चा होगा

    ये वड़ोदरा की सोनल की कहानी है। यूटरस ट्रांसप्लांट की कामयाब सर्जरी के बाद अब डॉक्टर जनवरी-2018 में यूटरस में भ्रूण प्रत्यारोपण की तैयारी कर रहे हैं। डॉक्टरों को पूरी उम्मीद है कि ये सफल रहेगा। सब ठीक रहा तो सोनल की संतान प्रत्यारोपित गर्भ से जन्म लेने वाला देश का पहला बच्चा होगा।

    पहले मां का यूटरस निकाला गया

    आंखों में चमक के साथ सोनल ने बात शुरू की। "मैं मां बन पाऊं, इसका यूटरस ट्रांसप्लांट सर्जरी ही एक रास्ता था। इसमें जोखिम भी था, लेकिन मैं तैयार थी। हमने पूरी तैयारी कर ली। मायके-ससुराल पक्ष से रजामंदी-इजाजत के साथ। डॉक्टर्स ने सर्जरी की जटिलता और इसके सभी संभावित परिणामों के बारे में बताया था। 10 घंटे ऑपरेशन चला। पहले मां का यूटरस निकाला गया। तब मां ने डॉक्टर से पूछा कि अब मेरी सोनल मां तो बन सकेगी ना?

    इंफेक्शन का इतना खतरा था कि पति तक को मिलने की इजाजत नहीं दी

    सोनल के मुताबिक, "मां का यूटरस मेरे शरीर में प्रत्यारोपित किया गया। मैं 20 दिन आईसीयू में रही। जहां एक डॉक्टर-नर्स के अलावा तीसरे की एंट्री नहीं थी। पति को भी इजाजत नहीं थी। मैं उनसे वीडियो कॉल पर बात करती थी। अस्पताल से छुट्टी मिली। घर पहुंची, लेकिन स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता था। रोज कोई न कोई मुश्किल-पेचीदगी आती थी। मेरे लिए अलग घर लिया गया-जहां प्रीतेश के अलावा कोई नहीं आता था। दो महीने तक मैं अपनी मां तक से नहीं मिल सकी। अब भी घर से बाहर नहीं निकलती। खुद ही अपना खाना पकाती हूं, लेकिन अब पहले जैसी कोई दिक्कत नहीं है। अब तो मैं केवल नए साल 2018 की राह देख रही हूं।"

    सोनल की मां को कानूनन उसकी मदर साबित करना पड़ा
    सोनल के पति प्रीतेश बताते हैं "सोनल की मां को कानूनन उसकी मदर साबित करने में एक महीना लग गया। इतना पेपर वर्क हुआ। पटवारी-तहसीलदार, वकील-पुलिस से वेरिफिकेशन करवाया। तमाम एफिडेफिट बनवाए। इसके बाद हर महीने पुणे जाना होता था। अस्पताल में 20-20 दिन ठहरना पड़ता था। कई बार मन में आता कि ऐसा कैसे चलेगा? लेकिन मेरी नजर 2018 में आने वाली खुशखबरी की ओर थी। हम सब नए साल की राह देख रहे हैं। यह सब गोपनीय रखना बहुत चुनौतीपूर्ण है।"

    यूटरस में छेद होने से सब बेकार हो गया था
    सोनल-प्रीतेश की शादी नौ साल पहले हुई थी। संतान सुख नहीं मिला। संतान के लिए पांच सर्जरी करवाईं। एक सर्जरी में यूटरस में छेद होने से सब बेकार हो गया। पुणे के डॉ. शैलेष पुणतांबेकर ने यूटरस प्रत्यारोपण ऑपरेशन करने का सुझाव दिया। सोनल के शरीर में प्रत्यारोपण 19 मई 2017 को हुई। डाॅ. पुणतांबेकर कहते हैं, मैं इंतजार कर रहा हूं कि जनवरी में भ्रूण इम्पांट हो और नौ महीने में बच्चे का जन्म हो। मैं दोनों (सुनंदा और सोनल) की हिम्मत का कायल हूं।
    (सोनल और प्रीतेश के नाम असल नाम छुपाए गए हैं।)

आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
India Result 2018: Check BSEB 10th Result, BSEB 12th Result, RBSE 10th Result, RBSE 12th Result, UK Board 10th Result, UK Board 12th Result, JAC 10th Result, JAC 12th Result, CBSE 10th Result, CBSE 12th Result, Maharashtra Board SSC Result and Maharashtra Board HSC Result Online

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Mumbai News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Uterus Transplantation To Baby Birth First Time In India
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Mumbai

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×