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वाईएसआर कांग्रेस ने एनडीए में शामिल होने के दिए संकेत

आठवले बोले जगनमोहन से एनडीए के साथ आने के मुद्दे पर करूंगा बात

Danik Bhaskar

Mar 20, 2018, 05:20 AM IST
वाईएसआर कांग्रेस ने एनडीए में शामिल होने के दिए संकेत। - फाइल वाईएसआर कांग्रेस ने एनडीए में शामिल होने के दिए संकेत। - फाइल

नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने से नाराज चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के एनडीए गठबंधन से अलग होते ही वाईएसआर कांग्रेस के एनडीए के करीब जाने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने भी कहा कि वे वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्‌डी से जल्द मुलाकात कर उनके एनडीए के साथ आने के मुद्दे पर चर्चा करेंगे।

अठावले से मिली थीं एनटी रामाराव की पत्नी

- दरअसल सोमवार को वाईएसआर कांग्रेस की महासचिव और आंध्र के पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव की पत्नी लक्ष्मी पार्वती ने अठावले से मुलाकात की। उनसे अनुरोध किया कि वह 2019 के चुनाव के पहले आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की पार्टी की मांग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाएं। अठावले ने कहा कि वे इस बात को प्रधानमंत्री तक जरूर पहुंचाएंगे।

- अठावले ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगनमोहन उनके अच्छे मित्र हैं और वे उनसे जल्द ही एनडीए के साथ आने के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। वैसे ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि जगनमोहन की पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव भाजपा के साथ मिलकर लड़ सकती है।


टीडीपी का एनडीए से अलग होना ड्रामेबाजी: लक्ष्मी पार्वती
- लक्ष्मी पार्वती ने टीडीपी के एनडीए से अलग होने को ड्रामेबाजी करार दिया। कहा कि चंद्रबाबू नायडू हमारी पार्टी द्वारा उठाई जा रही आंध्र को विशेष दर्जा देने की मांग को ही दोहरा रहे हैं।

- उन्होंने कहा कि 2016 में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने जब आंध्र को विशेष पैकेज देने की घोषणा की तो चंद्रबाबू ने उनका स्वागत किया था। आज वाईएसआर कांग्रेस को इस मुद्दे का फायदा मिलता देख वे खुद यह मुद्दा उठा रहे हैं। 2019 के चुनाव के पहले एनडीए से अलग होने की उनकी यह राजनीतिक चाल है।

मोदी के खिलाफ सिर्फ एक मोर्चा चाहते हैं पवार

- मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी गोलबंदी को धार देने की कोशिशें तेज हो गई हैं। कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी की डिनर डिप्लोमेसी के बाद विपक्ष के चुनिंदा नेता अब राकांपा सुप्रीमो शरद पवार के घर जुटने वाले हैं।

- जानकारी के मुताबिक पवार 27 मार्च को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मंत्रणा करने वाले हैं। लेकिन पवार की कोशिश मौजूदा स्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ देश में सिर्फ एक मजबूत मोर्चा बनाने की है। वे नहीं चाहते कि देश में कोई तीसरा या चौथा मोर्चा बने, क्योंकि ऐसे किसी मोर्चे से भाजपा को ही फायदा मिलेगा। लिहाजा शरद पवार के निशाने पर वैसे दल हैं जो इस वक्त कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी गोलबंदी बनाने से ज्यादा रुचि तीसरा मोर्चा बनाने में दिखा रहे हैं।

- सूत्रों के मुताबिक, राकांपा सुप्रीमो ने तृणमूल कांग्रेस, सपा, तेलुगुदेशम, टीआरएस और बीजद जैसे दलों को प्रमुखता से न्योता भेजा है। हालांकि राकांपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पवार के घर जुटने के लिए 27 मार्च की तिथि संभावित है। दूसरे दलों के नेताओं की सुविधा के मुताबिक इस तिथि में बदलाव भी संभव है।
- बता दें कि पिछले दिनों सोनिया गांधी के बुलावे पर डिनर में 20 दलों के नेता शामिल हुए थे।

- इसी प्रकार यूपीए का साथ छोड़ने के बावजूद तेलुगुदेशम सोनिया गांधी के डिनर से दूर रही तो बीजद अध्यक्ष और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी कांग्रेस की अगुआई वाले मंच से परहेज करते रहे हैं। चूंकि इन सभी दलों के प्रमुखों से शरद पवार के अच्छे रिश्ते हैं। लिहाजा राकांपा सुप्रीमो ने अपनी मुहिम तेज कर दी है।

विपक्षी मोर्चे में नहीं होगी मनसे
- महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे भले ही मोदीमुक्त भारत की बात जोरशोर से उठा रहे हैं, लेकिन मोदी के खिलाफ बनने वाले विपक्षी मोर्चे में उनकी जगह नहीं होगी।

- राकांपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि शरद पवार और राज ठाकरे के बीच बातचीत होने के बावजूद मनसे को प्रत्यक्ष रूप से साथ नहीं ले सकते। पार्टी का मानना है कि मनसे के आने से संभावित मोर्चे की धर्मनिरपेक्ष छवि पर आंच आएगी, क्योंकि राज ठाकरे की उत्तर भारतीयों के साथ मुस्लिमों में भी अच्छी छवि नहीं है।

प. बंगाल की सीएम ममता से मिले केसीआर बोले- यह फेडरल फ्रंट की शुरुआत

- तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव सोमवार को पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मिले। दोनों ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस से अलग तीसरा मोर्चा गठित करने की संभावनाओं पर बात की।

- बैठक के बाद राव ने कहा, "यह फेडरल फ्रंट की शुरुआत है। यह कुछ राजनीतिक दलों का नहीं, बल्कि जनता का मोर्चा होगा।' उन्होंने कहा कि देश को वैकल्पिक एजेंडे और राजनीतिक दल की जरूरत है।
इससे पहले आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने भी ममता से फोन पर बात की थी। मोदी सरकार की शुरू से धुर विरोधी रही ममता ने कहा, "अगर विपक्ष एकजुट नहीं होता है तो 2019 के आम चुनाव में भाजपा को हराना मुश्किल होगा।'

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: एनडीए से अलग हुआ शेतकरी संगठन यूपीए में शामिल होगा...

राहुल गांधी से मिले स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्‌टी जल्द यूपीए में होंगे शामिल। - फाइल राहुल गांधी से मिले स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्‌टी जल्द यूपीए में होंगे शामिल। - फाइल

राहुल गांधी से मिले राजू शेट्‌टी जल्द यूपीए में होंगे शामिल

 

- एनडीए से अलग हुए स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष एवं सांसद राजू शेट्‌टी फिर से यूपीए का दामन थामने वाले हैं।

- सोमवार को राजू शेट्‌टी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर इसके संकेत दे दिए हैं। हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन शेट्‌टी ने कहा कि किसानों के हितों के मुद्दों पर संघर्ष करने की कांग्रेस की सकारात्मक भूमिका को देखते हुए उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में पाला बदलने का फैसला किया है। 
- शेट्‌टी ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चव्हाण, कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी मोहन प्रकाश, कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक की मौजूदगी में राहुल गांधी के आवास पर उनसे मुलाकात की। करीब 15-20 मिनट हुई मुलाकात के बाद शेट्‌टी ने कहा कि उनकी राहुल के साथ किसानों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। एक सवाल के जवाब में शेट्‌टी ने कहा कि वे किसानों के मुद्दों पर एनडीए में जरूर शामिल हुए थे पर चार साल बीत गए, पीएम मोदी ने किसानों से जो वादे किए थे, उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ। इन वर्षों में किसानों की माली हालत और बद से बदतर हो गई है।

 

कांग्रेस अध्यक्ष को सम्मेलन में शामिल होने का दिया न्यौता

- शेट्‌टी ने कहा कि 29 मार्च को दिल्ली में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति का सम्मेलन होने जा रहा है। जिसमें राहुल गांधी को शामिल होने का निमंत्रण दिया है। जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।

- गौरतलब है कि रविवार को समाप्त हुए कांग्रेस के अधिवेशन में कृषि मसले पर एक प्रस्ताव पारित किया गया है। अशोक चव्हाण ने दावा किया कि कांग्रेस द्वारा किसानों के मुद्दों को तरजीह देने की बात ध्यान में आने के बाद ही शेट्‌टी ने कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने का फैसला लिया है।

मोदी के खिलाफ सिर्फ एक मोर्चा चाहते हैं पवार। - फाइल मोदी के खिलाफ सिर्फ एक मोर्चा चाहते हैं पवार। - फाइल
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