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241 साल पहले राजपरिवार में हुआ था घमासान, भाई ने भाई का बहाया था खून

6 वर्ष पहले
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नागपुर (महाराष्ट्र)। मराठा साम्राज्य के शासनकाल में नागपुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नागपुर के राजपाट को लेकर कई युद्ध हुए, जिसमें पाचगांव का विशेष महत्व है। यह युद्ध भोंसले राजपरिवार के आपसी युद्ध की दास्तां है। जो 26 जनवरी 1774 को पाचगांव के मैदान में हुआ था।
हजारों की संख्या में थी सेना...
- पांचगांव के मैदान में भोसले राजपरिवार के संस्थापक रघुजी भोंसले के बेटों की सेनाएं आपस में भीड़ी।
- जैसा कि हर युद्ध का अंजाम होता है, इस युद्ध में एक भाई मारा गया और एक के हाथ में राजगद्दी आई।
- 241 साल पहले इस युद्ध में दोनों पक्षों से हजारों की संख्या में सैनिकों के बीच जंग हुई।
- तोप, बंदूक, तलवार, तीर, भाले, हाथी, घोड़ों से लैस सेनाएं इस दौरान एक दूसरे के खून के प्यासे रहे।
मुधोजी विजयी हुए
नागपुर के इतिहासकार व मॉरिस कॉलेज के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अंधारे ने अपनी पुस्तक में पाचगांव युद्ध का विस्तृत रूप से उल्लेख किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि पाचगांव युद्ध एक ही पिता अर्थात रघुजी प्रथम के दो पुत्रों की राजगद्दी के लिए किया गया युद्ध था। युद्ध में नागपुर के शासक जानोजी की हत्या उनके उत्तराधिकारी रघुजी द्वितीय के पिता मुधोजी ने बंदूक से गोली मारकर की थी। इस युद्ध में मुधोजी विजयी हुए।
राजपरिवार के भीतर आपसी रंजिश का युद्ध
शासन की बागडोर मुधोजी के हाथ में आ गई। भले ही राजगद्दी पर मुधोजी के बेटे रघुजी द्वितीय विराजते रहे हों, लेकिन कम उम्र होने के कारण राजगद्दी और शासन पर नियंत्रण मुधोजी का ही रहा। बताया जाता है कि यह भोसले राजपरिवार के भीतर आपसी रंजिश का युद्ध था। बाद में मुधोजी ने जानोजी के साथियों को अपने साथ मिला लिया था, जिससे आगे विद्रोह आदि नहीं हो पाया। मुधोजी ने अंग्रेजों के साथ हाथ मिलाया, जो रघुजी द्वितीय के कालखंड तक जारी रहा। 1816 तक रघुजी द्वितीय का राज रहा।
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