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कब्रिस्तान के लिए जगह देने का मामला, धर्मनिरपेक्षता पर रहें कायम : हाईकोर्ट

Bhaskar News | Last Modified - Nov 14, 2017, 05:02 AM IST

सरकार समुदाय की जरुरत को समझे और ईसाई समुदाय को पर्याप्त जमीन आवंटित करे।
कब्रिस्तान के लिए जगह देने का मामला, धर्मनिरपेक्षता पर रहें कायम : हाईकोर्ट
मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा- यदि हम धर्म निरपेक्ष राज्य होने का दावा करते हैं, तो हमें उस पर कायम रहना चाहिए। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने ईसाई समुदाय के लोगों को कब्रस्तान के लिए पर्याप्त जगह न देने को लेकर यूनाइटेड क्रिस्चियन कम्युनिटी सेंटर की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह तल्ख टिप्पणी की।
मुख्य न्यायाधीश मंजुला चिल्लूर व न्यायमूर्ति एम एस सोनक की खंडपीठ ने राज्य सरकार के नगर विकास विभाग को शुक्रवार तक इस मामले का हल निकालने के लिए कहा है। खंडपीठ ने कहा- क्या कोई लोगों को मरने से रोक सकता हैं। सरकार सिर्फ औपचारिकता के लिए कब्रस्तान के लिए जमीन नहीं दे रही हैं। सरकार समुदाय की जरुरत को समझे और ईसाई समुदाय को पर्याप्त जमीन आवंटित करे।

याचिका में यह कहा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील यशवंत शिनॉय ने कहा- खार से दहिसर के बीच ईसाई समुदाय के कब्रस्तान के लिए कोई जगह नहीं दी गई हैं। गोरेगांव में साढ़े सात हजार वर्ग मीटर जगह दी जानी थी। कुछ समय बाद जमीन का क्षेत्रफल घटाकर ढाई हजार वर्ग मीटर कर दिया गया। यह जमीन भी नहीं दी गई।
सार्वजनिक पार्क का निजी इस्तेमाल किया है तो मनपा वसूले रकम
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिल्डर द्वारा सार्वजनिक पार्क का निजी इस्तेमाल किए जानेपर नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने कहा- यदि बिल्डर ने सार्वजनिक पार्क का निजी इस्तेमाल किया है तो उससे इसकी राशि वसूली जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने यह बात एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। सुनवाई के दौरान मनपा की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मिलिंद साठे ने कहा- एक करार के तहत मनपा ने बिल्डर को पार्क सौंपा है। ऐसा प्रतीत होता है कि करार की शर्तों को तोड़ा गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि दक्षिण मुंबई इलाके में डीएसके डेवलपर ने सार्वजनिक पार्क का निजी इस्तेमाल किया है। वहां पर फिटनेस सेंटर तैयार किया है। इस पर खंडपीठ ने कहा- पता लगाया जाना चाहिए कि, कब से पार्क का निजी इस्तेमाल किया रहा है।
पाइप लाइन के किनारे बने झोपड़ों का मामला पहुंचा अदालत
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट में पाइपलाइन के किनारे बने झोपड़ों के खिलाफ मुंबई महानगरपालिका की ओर से की जा रही कार्रवाई को अवैध बताते हुए विधायक मोहम्मद आरिफ नसीम खान व दो स्थानीय सोसाइटियों ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि, महानगरपालिका नियमों के विपरीत जाकर झोपड़ों को गिरा रही है। मनपा की कथित अवैध कार्रवाई के चलते 200 परिवार प्रभावित हो चुके हैं। यदि यह कार्रवार्ई जारी रही तो इससे 26 सौ परिवार प्रभावित होंगे।
इसका असर आठ हजार पांच सौ छात्रों के भविष्य पर भी पड़ेगा। याचिका में पवई व साकीनाका के अलावा विभिन्न इलाके में आनेवाले झोपड़ों के मुद्दे को उठाया गया है। याचिका के अनुसार जिन झोपड़ों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है वे राज्य सरकार व मनपा की नीति के तहत संरक्षित है। फिर भी मनपा जरुरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना झोपड़े गिरा रही है।
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Web Title: kbristaan ke liye jgah dene ka maamlaa, dhrmnirpekstaa par rahen kaym : highkort
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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