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फिटनेस प्रमाणपत्र में लापरवाही, कोर्ट ने कहा- आईएएस अधिकारी को सौंपें जांच

खंडपीठ ने कहा-जो काम सरकारी अधिकारियों को करना चाहिए वह याचिकाकर्ता ने किया है।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 18, 2017, 06:51 AM IST

फिटनेस प्रमाणपत्र में लापरवाही, कोर्ट ने कहा- आईएएस अधिकारी को सौंपें जांच

मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि, राज्य के परिवहन कार्यालयों में वाहनों के फिटनेस टेस्ट सर्टीफिकेट जारी करने में बरती जा रही लापरवाही व नियमों के उल्लंघन की जांच के लिए आईएएस अधिकारी की नियुक्ति करें।


साथ ही इस लापरवाही को उजागर करनेवाले सामाजिक कार्यकर्ता व याचिकाकर्ता श्रीकांत कर्वे को खर्च के रुप में एक लाख रुपए दें। न्यायमूर्ति अभय ओक व न्यायमूर्ति एके मेनन की खंडपीठ ने कहा-आईएएस अधिकारी को जांच में सहयोग के लिए परिवहन विभाग के संयुक्त आयुक्त को तैनात करें।

याचिकाकर्ता को देंं एक लाख रुपए
खंडपीठ ने कहा-जो काम सरकारी अधिकारियों को करना चाहिए वह याचिकाकर्ता ने किया है। उसने लोगों की सुरक्षा के मुद्दे को उठाया है। इसमें उसका कोई निजी हित नहीं है। बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में याचिकाकर्ता ने प्रकरण को लेकर सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी जुटाई है। इसके लिए उसे भाग-दौड़ करनी पड़ी है। इसलिए सरकार याचिकाकर्ता को एक लाख रुपए प्रदान करे।

भंडारा-चंद्रपुर में टेस्ट ट्रैक का काम 15 तक पूरा करें
खंडपीठ ने कहा-अहमदनगर, जलगांव, भंडारा व चंद्रपुर में ब्रेक टेस्ट ट्रैक का निर्माण कार्य 15 दिसंबर 2017 तक पूरा किया जाए। जबकि बीड़, गड़चिरोली व परभणी में टेस्ट ट्रैक बनाने का काम 31 मार्च 2018 तक पूरा किया जाए। खंडपीठ ने फिलहाल मामले की सुनवाई 19 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी है।

जांच में मांगी यह जानकारी
- खंडपीठ ने साफ किया कि, आईएएस अधिकारी सिर्फ सोलापुर में रहकर पुणे से वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करनेवाले अधिकारी की ही जांच न करे।
- वे सभी पहलुओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में अदालत में पेश करे।
- पता लगाएं कि, आरटीओ में पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं या नहीं।
- टेस्ट के दौरान नियमों का पालन किया जाता है अथवा नहीं।
- नियमित अंतराल पर औचक निरीक्षण करें।
- पूरे प्रकरण की जानकारी संबंधित विभाग के मंत्री को भी दी जाए।

कब्रस्तान के लिए जमीन देगी सरकार, हाईकोर्ट की दी गई जानकारी
राज्य सरकार ईसाई समुदाय को कब्रस्तान (सीमेट्री) के लिए आरे कालोनी में पांच हजार वर्ग मीटर जमीन देगी। शुक्रवार को सरकारी वकील गीता शास्त्री ने बॉम्बे हाईकोर्ट को यह जानकारी दी। मुख्य न्यायाधीश मंजूला चिल्लूर व न्यायमूर्ति एमएस सोनक की खंडपीठ ने बताया-जो जमीन कब्रस्तान के लिए दी जानी है वह डेयरी डेवलपमेंट विभाग के अंतर्गत आती है। इसलिए पहले डेयरी डेवलपमेंट विभाग यह जमीन मुंबई महानगरपालिका को देगा। इसके बाद यह जमीन ईसाई समुदाय को सौंप दी जाएगी। खंडपीठ ने कहा कि, सरकार ईसाई समुदाय को जमीन सौंपने के लिए राजी है। दो हफ्ते के भीतर लिखित रूप में दे।

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