बर्थ डे / मीटिंग में अधिकारियों को चुटकुले सुनाते थे पूर्व सीएम बालासाहब भोसले, सिर्फ 377 दिनों तक संभाली महाराष्ट्र की कमान

पूर्व सीएम बालासाहब भोसले-फाइल फोटो पूर्व सीएम बालासाहब भोसले-फाइल फोटो
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पूर्व सीएम बालासाहब भोसले-फाइल फोटोपूर्व सीएम बालासाहब भोसले-फाइल फोटो

  • उन्हें अंग्रेजी सरकार ने 1941-42 के बीच तकरीबन डेढ़ साल तक सलाखों के पीछे रखा
  • साल 1978 में वे मुंबई की नेहरु नगर विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए
  • इंदिरा गांधी ने मुख्यमंत्री बनाया था, उनका सीएम बनना किसी सरप्राइज से कम नहीं था

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2020, 06:23 PM IST

मुंबई. आज महाराष्ट्र के 8वें मुख्यमंत्री बाबासाहब भोसले का जन्मदिन है। मुख्यमंत्री पद की छोटी अवधि में उन्होंने विभिन्न सुधारों को लागू किया, जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की पेंशन और मैट्रिक तक छात्राओं की मुफ्त शिक्षा। 6 अक्टूबर, 2007 को 86 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। वकील के तौर पर करियर शुरू करने वाले बालासाहब ने शाहजी लॉ कॉलेज से वकालत की पढ़ाई की। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए लंदन के लिंकन इन कॉलेज चले गए। वहां से लौटने के बाद वे सातारा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में वकालत करने लगे। 

राज्य के सबसे खुशमिजाज सीएम कहे जाते थे बालासाहब
महाराष्ट्र के सातारा जिले के पाटन तहसील के कालेधोन गांव में 1921 में पैदा हुआ हुए बाला साहब भोसले महाराष्ट्र के सबसे खुशमिजाज मुख्यमंत्री कहे जाते हैं। उनके लिए कहा जाता है कि वे अकसर अपनी मीटिंग में अधिकारियों और नेताओं को जोक्स सुनाते और उनके जोक्से पर जमकर ठहाके लगाते थे। उनका मानना था कि अगर माहौल खुशगवार रहेगा तो कर्मचारी दोगुने जोश से कामकाज कर सकेंगे। यही कारण है कि वे आम लोगों में बहुत पॉपुलर थे।

बालासाहब रहे 377 दिन के मुख्यमंत्री 

बालासाहब, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सातारा में हुए प्रदर्शन का हिस्सा रहे। उन्हें अंग्रेजी सरकार ने 1941-42 के बीच तकरीबन डेढ़ साल तक सलाखों के पीछे रखा। वे कुछ महीनों तक अज्ञातवास में भी भी रहे। अपने पांच बच्चों के साथ मुंबई शिफ्ट होने पर बालासाहब हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। देश आजाद होने से पहले से वे कांग्रेस संग जुड़े रहे हैं और 1978 में वे मुंबई की नेहरु नगर विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद वे फिर एक बार यही से 1980 में विधानसभा पहुंचे और पहले राज्य के कानून मंत्री और फिर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देशों पर साल 1982 में 377 दिन के मुख्यमंत्री बने। भोसले का सीएम बनना उस दौर में लोगों के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं था।

एक साल के कार्यकाल में किए कई महत्वपूर्ण कार्य
सिर्फ एक साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रदेश में स्वतंत्रा सेनानी पेंशन और सरकारी स्कूल में 10वीं कक्षा तक बालिकाओं की मुफ्त शिक्षा के नियम को लागू कराया, जो आज भी जारी है। उनके प्रयास से ही बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच का गठन हुआ और गढ़चिरौली को अलग से जिला घोषित किया गया। राज्य में बन रही पुलिसवालों की यूनियन को खत्म करने का काम भी बालासाहब ने किया। 

कई आरोप भी लगे
भोसले के कार्यकाल के दौरान उनकी सरकार पर पैसे लेकर शराब ठेके के लाइसेंस और अवैध फ्लैट बांटने के आरोप भी लगे। बालासाहब 1 फरवरी 1983 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। भोसले की कैबिनेट से निकल कर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रतिभा पाटिल, देश की राष्ट्रपति और विलासराव देशमुख प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उनके भाई शिवाजीराव भोसले बाबासाहब अम्बेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी के कुलपति भी रहे। उनके बेटे दिलीप भोसले आज लोकपाल के सदस्य हैं। भोसले के निधन के 12 साल बाद उनकी पत्नी कलावती भोसले का भी निधन मुंबई में हुआ।

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