स्मृति / अखबार के दफ्तर में भिजवा दिया था बाल ठाकरे ने अपना चांदी का सिंहासन; उस पर खबर छापी थी

बाला साहब का यह चांदी का सिंहासन आज भी मातोश्री में रखा हुआ है। बाला साहब का यह चांदी का सिंहासन आज भी मातोश्री में रखा हुआ है।
बाला साहब को सिगार पीने का शौक था। बाला साहब को सिगार पीने का शौक था।
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बाला साहब का यह चांदी का सिंहासन आज भी मातोश्री में रखा हुआ है।बाला साहब का यह चांदी का सिंहासन आज भी मातोश्री में रखा हुआ है।
बाला साहब को सिगार पीने का शौक था।बाला साहब को सिगार पीने का शौक था।

  • बाल ठाकरे ने साईं बाबा के सोने के सिंहासन पर सवाल उठाया था, अखबार ने लिखा था चांदी का सिंहासन रखने वाले विरोध कैसे कर सकते हैं
  • मुंबई में जैन धर्म के एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद मटन के शौकीन बाला साहेब ने छोड़ दिया था नॉनवेज, अंतिम समय तक शाकाहारी रहे

दैनिक भास्कर

Jan 22, 2020, 05:19 PM IST

मंबई. महाराष्ट्र की राजनीति में अलग दबदबा रखने वाले शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की आज जयंती है। उनसे जुड़ा एक किस्सा बहुत मशहूर हुआ था। दरअसल, 2006 बाल ठाकरे ने शिर्डी स्थित साईं बाबा मंदिर में बाबा के लिए चांदी के स्थान पर सोने का सिंहासन रखने के ट्रस्ट के प्रस्ताव पर विरोध जताया था। अखबार ने विरोध पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा था कि खुद चांदी का सिंहासन रखने वाले शिवसेना अध्यक्ष ट्रस्ट के इस प्रस्ताव का विरोध कैसे कर सकते हैं।

यह खबर पढ़ते ही बाला साहेब ने अपना चांदी का सिंहासन अखबार के संपादक के कार्यालय में भिजवा दिया था। बाद में अखबार ने बाल ठाकरे को उनका सिंहासन सम्मान वापस किया था। ठाकरे ने स्पष्ट किया था कि शिवसेना की मजदूर इकाई भारतीय कामगार सेना ने यह सिंहासन उन्हें उपहार में दिया है। सिंहासन लकड़ी का है और इस पर चांदी की सिर्फ परत चढ़ी है। आज बाल ठाकरे की जयंती पर हम उनसे जुड़े मशहूर और रोचक किस्से बता रहे हैं:

अचानक छोड़ दिया था नॉनवेज
बाल ठाकरे को नॉनवेज बहुत पसंद था। मटन उनका फेवरेट था। बाला साहेब के निधन के बाद उनके फैमिली फ्रेंड अगस्ती कानितकर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि राजनीति में सक्रिय होने से पहले बाला साहेब जब भी पुणे आते, तो अपनी पत्नी के साथ उनके फ्लैट में रहते थे। उन्हें नॉनवेज बहुत पसंद था, लेकिन मुंबई में आयोजित जैन धर्म एक एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अचानक उन्होंने पूरी तरह से शाकाहारी बनने का निर्णय लिया और अंतिम समय तक इसे निभाया भी। अपने नॉनवेज छोड़ने की बात खुद बाल ठाकरे ने एक इंटरव्यू में भी कही थी।

वोट डालने पर भी प्रतिबंध लगा था
'नफरत और डर' की राजनीति करने के आरोप के चलते चुनाव आयोग ने बाल ठाकरे के वोट डालने और चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था। चुनाव आयोग ने 28 जुलाई 1999 को बाल ठाकरे पर 6 साल के लिए वोट डालने और चुनाव लड़ने पर बैन लगा दिया गया था। हालांकि, 2005 में उन पर से 6 साल तक लगे बैन को हटा लिया गया और उन्‍होंने इसके बाद पहली बार 2006 में बीएमसी चुनाव के लिए वोट डाला।

सचिन को दी थी चेतावनी
नवंबर 2009 क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को बाल ठाकरे के गुस्सा का शिकार बनना पड़ा था। दरअसल, सचिन ने कह दिया था कि मुंबई पर सभी भारतवासियों का बराबर हक है। बाल ठाकरे इस पर भड़क गए और सचिन पर निशाना साधते हुए कहा, 'हमें क्रिकेट के मैदान में आपके छक्‍के-चौके पसंद हैं, लेकिन आप अपनी जुबान का इस्‍तेमाल न करें। हम इसे बर्दाश्‍त नहीं करेंगे।'

शरद पवार अक्सर जाते थे घर
एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी थे। रैलियों में जिस तरह की भाषा वह शरद पवार के लिए इस्तेमाल करते थे उसकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता। वहीं, शरद पवार उनके अच्छे मित्र भी थे। अक्सर शरद पवार उनके घर लंच पर जाते थे।

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