बुलढाणा लोकसभा सीट / दो दशक से इस सीट पर शिवसेना का कब्जा, लोनार झील की वजह से शहर की पहचान



यह झील उल्कापिंड की टक्कर से बनी है।(फाइल) यह झील उल्कापिंड की टक्कर से बनी है।(फाइल)
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यह झील उल्कापिंड की टक्कर से बनी है।(फाइल)यह झील उल्कापिंड की टक्कर से बनी है।(फाइल)

  • इस सीट से 12 उम्मीदवार चुनाव मैदान में, इसमें 6 निर्दलीय 

  •  शिवसेना ने पिछली दो बार से सांसद प्रतापराव जाधव को मैदान में उतारा

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 04:29 PM IST

बुलढाणा. महाराष्ट्र के विदर्भ की बुलढाणा लोकसभा सीट पिछले दो दशकों से शिवसेना का गढ़ रही है। इस पर दूसरे चरण में मतदान होना है। यहां 18 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। इस बार यहां से 12 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इसमें मुख्य लड़ाई शिवसेना और कांग्रेस के बीच है। इसके अलावा मायावती की बसपा भी यहां से ताल ठोक रही है। जबकि, यहां से 6 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं।

 

शिवसेना ने फिर एक बार लगातार दो बार से सांसद प्रतापराव जाधव को मैदान में उतारा है। उनकी लड़ाई कांग्रेस के डॉ. राजेंद्र भास्करवर शिंगणे से है। इस शहर का जिक्र महाभारत में भी मिलता है। बुलढाणा की पहचान उल्का पिंड की टक्कर से बनी रहस्यमयी लोनार झील की वजह से भी है।

 

2014 का चुनावी गणित

2014 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना की टिकट पर प्रताप राव जाधव चुनाव जीते थे। उन्होंने यहां एनसीपी प्रत्याशी कृष्ण राव इंगले को करीब 1.5 लाख वोट से चुनाव हराया था। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के अब्दुल अफीज 3,37,83 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे।

 

बुलढाणा सीट का इतिहास

1951 में हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट से दो सांसद गोपालराव बाजीराव खेडकर और लक्ष्मण भातकर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। गोपालराव बाजीराव खेडकर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के पहले अध्यक्ष भी थे। 1957 के लोकसभा चुनाव में शिवराम रांगो राणे चुनाव जीते और 1962, 1967 में भी वो चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे।  इसके बाद 1977 के लोकसभा चुनाव में रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया ने कांग्रेस को हराया और पहली बार दौलत गुंजाजी गवई चुनाव जीते।

 

पहले यहां होते थे दो सांसद

बुलढाणा से पहले आम चुनाव में दो सांसद निर्वाचित हुए। 1952 में आरक्षित वर्ग से लक्ष्मण भातकर और खुले प्रवर्ग से कांग्रेस के गोपालराव खेड़कर चुनाव जीते थे। 1957 में हुए दूसरे आम चुनाव में बुलढाणा से आरक्षित सीट खत्म कर दी गई। देश में तीसरी बार आम चुनाव 1962 में हुआ। 1962 से एक जगह से दो सांसद निर्वाचित होने की परंपरा खत्म कर दी गई। एक निर्वाचन क्षेत्र एक सांसद प्रणाली लागू हुई।

 

शिवसेना ने जमाया अपना कब्जा

1996 में शिवसेना के आनंदराव विठोबा अडसुल बुलढाणा सीट पर पहली बार जीतकर आए। शिवसेना ने इस सीट पर आनंदराव विठोबा अडसुल को दोबारा उतारकर दांव खेला। उन्होंने 1999, 2004 में जीत दर्ज की। इसके बाद 2009 में यहां से प्रताप राव जाधव खड़े हुए। उन्होंने 2009 और 2014 में लगातार इस सीट से जीत हासिल की। 1989 में यह सीट पहली बार बीजेपी के खाते में आई। सुखदेव नानाजी काले यहां से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे।

 

6 विधानसभाएं

बुलढाणा, चिखली, सिंधखेड राजा, मेहकर, खामगांव और जलगांव विधानसभा सीट हैं। इसमें दो-दो सीट पर कांग्रेस, भाजपा और शिवसेना का कब्जा है।

 

वर्तमान सांसद का रिपोर्ट कार्ड

साल 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना के सांसद प्रतापराव गणपतराव जाधव की पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उपस्थिति 72 प्रतिशत रही। इस दौरान उन्होंने 51 डिबेट में हिस्सा लिया और उन्होंने 471 प्रश्न पूछे हैं।

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