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मी टू कैंपेन / राधे मां बोली-जब महिलाओं के साथ अत्याचार हो उसी वक्त आवाज उठाएं



राधे मां(फाइल फोटो) राधे मां(फाइल फोटो)
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राधे मां(फाइल फोटो)राधे मां(फाइल फोटो)

  • मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहीं थीं, मी टू कैंपेन पूरे विश्व में चर्चा का विषय बना है

Dainik Bhaskar

Oct 11, 2018, 03:56 PM IST

मुंबई. #Metoo अभियान का असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है। महिला अपने खिलाफ हुए अत्याचारों को लेकर खुल कर बोल रही हैं। अभिनेता नाना पाटेकर, आलोक नाथ, एम जे अकबर सब इसकी चपेट में आ चुके हैं। इन सबके बीच खुद विवादों में रही राधे मां ने ने कहा है "मह‍िलाओं को मेरी यही सलाह है कि आप जब घटना हो उसी वक्त अपनी आवाज उठाएं।" उन्होंने आगे कहा, "मह‍िलाओं अपनी आवाज उठानी चाह‍िए. जो गलत है उसके ख‍िलाफ बोलना चाह‍िए।

 

क्या है मी टू कैंपेन?

  1. यह एक ऐसा कैंपेन है, जिसके जरिए महिलाएं वर्कप्लेस पर अपने साथ हुए यौन शोषण का खुलासा का रही हैं। इसमें ऐसी बातों को भी बताया जा रहा है, जिसके चलते किसी महिला को असुरक्षा महसूस हुई, उसे अपमानित महसूस हुआ और उसे शारीरिक या मानसिक तौर पर प्रताड़ित होना पड़ा।

  2. पहली बार कब शुरू हुआ?

    दरअसल मी टू कैंपने की शुरुआत हॉलीवुड से हुई है। 2006 में अमेरिकी सिविल राइट्स एक्टिविस्ट तराना बर्क ने पहली बार इसकी शुरुआत की। उनके खुलासे के 11 साल बाद 2017 में यह सोशल मीडिया में वायरल हुआ। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड के दिग्गज प्रोड्यूसर हार्वी वाइंस्टीन को लेकर खुलासे किए थे। इसके बाद उन्हें कंपनी छोड़ना पड़ा। उनका करियर ही बर्बाद हो गया। इसके बाद से ही यह सिलसिला शुरू हो गया था।

  3. अब तक इन पर लगे हैं आरोप

    भारत में इसकी शुरुआत तनुश्री दत्ता ने की। उन्होंने 40 साल से एक्टिंग कर रहे और पद्मश्री पा चुके नाना पाटेकर पर 25 अक्टूबर को आरोप लगाए। इसके बाद विकास बहल, चेतन भगत, रजत कपूर, कैलाश खैर, जुल्फी सुईद, आलोक नाथ, सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य, तमिल राइटर वैरामुथु और मोदी सरकार में मंत्री एमजे अकबर पर भी आरोप लगाए गए हैं। इस कैंपेन के तहत खुलासे लगातार जारी हैं।

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