बाॅम्बे हाई कोर्ट / मुंबई में सड़कों की हालत ऐसी नहीं कि 80 किमी से अधिक की रफ्तार से गाड़ी चला सकें



Hearing on speed governor rules in Bombay High Court
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Hearing on speed governor rules in Bombay High Court

  • स्पीड गवर्नर नियमाें पर सख्ती से अमल की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दाैरान काेर्ट की टिप्पणी
  • काेर्ट ने कहा- यमुना एक्सप्रेस-वे बनने पर कहा गया कि दिल्ली से आगरा दो घंटे में पहुंच जाएंगे, स्पीड लिमिट 62 है

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 03:25 AM IST

मुंबई. “मुंबई में सड़कों की हालत ऐसी नहीं है कि कोई भी शख्स यहां 80 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार से गाड़ी चला सके।’ स्पीड गवर्नर नियमाें पर सख्ती से अमल की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दाैरान बाॅम्बे हाई काेर्ट ने यह टिप्पणी की।

 

याचिकाकर्ता एनजीओ ने कहा था कि वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के प्रावधानाें पर सख्ती से अमल नहीं हो रहा है। याचिका में कहा गया है कि स्कूली बसों सहित कई वाहन शहर में तय गति सीमा का उल्लंघन करते हैं। हालांकि, बेंच ने कहा कि गति सीमा निष्प्रभावी है। चीफ जस्टिस प्रदीप नंदराजोग ने कहा कि मुंबई जैसे शहर में कौन सी सड़क है, जहां काेई वाहन 80 किमी की गति पार कर सकता है?

 

याचिका में उठाए गए मुद्दों और समस्याओं का शहर ने खुद समाधान कर लिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर काे हाेगी। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र सरकार ने मई 2017 में काली और पीली टैक्सी, एप बेस्ड कैब और टूरिस्ट टैक्सी, छोटे टैंपो और 3500 किलोग्राम से कम वजन की पिकअप वैन में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की तय सीमा के साथ स्पीड गवर्नर लगाने का निर्देश दिया था।

 

हाई काेर्ट ने गति सीमा लागू करने का जिक्र करते हुए यमुना एक्सप्रेस-वे का हवाला दिया। काेर्ट ने कहस, ‘अथाॅरिटीज विभिन्न तरह के मार्ग और राजमार्ग बनाते हैं। शुरू में कहा जाता है कि कुछ मिनटों में एक से दूसरे शहर तक पहुंचा जा सकता है। फिर उसी सड़क पर गति सीमा लागू करते हैं।’ चीफ जस्टिस ने कहा, ‘जब यमुना एक्सप्रेस-वे बना था ताे कहा गया कि लोग दिल्ली से आगरा दो घंटे से भी कम समय में जा सकते हैं। लेकिन, वहां राजमार्ग पर 62 किलोमीटर की गति सीमा है।’

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