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हाईकोर्ट ने कहा- बालिग अविवाहित लड़की पिता से मांग सकती है गुजारा भत्ता

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को पलटा

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2018, 04:58 AM IST
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैमिली कोर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैमिली कोर

मुंबई. माता-पिता अगर अलग हो चुके हों तो उनकी अविवाहित बेटी 18 साल की आयु के बाद भी पिता से गुजारा भत्ता मांग सकती है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर यह फैसला दिया।


- जस्टिस भारती डेंगरे की बेंच ने कहा कि गुजारा भत्ते के लिए मां अपनी बालिग बेटी की तरफ से आवेदन भी कर सकती है। मुंबई के एक दंपती की शादी 1988 में हुई थी। 1997 में दोनों अलग हो गए थे। दो बेटे आैर एक बेटी मां के साथ ही रहे। बच्चों के बालिग होने तक पिता हर महीने उनके लिए गुजारा भत्ता देता रहा। हालांकि, बेटी के 18 साल की होने के बाद पिता ने गुजारा भत्ता देना बंद कर दिया।

- महिला की दलील है कि उसकी बेटी अभी पढ़ रही है और आर्थिक तौर पर उसी पर निर्भर है। दोनों बेटे अभी मदद करने की हैसियत में नहीं हैं। महिला को हर महीने 25 हजार रु. गुजारा भत्ता मिल रहा है। वह बेटी के लिए 15 हजार रुपए और मांग रही थी। फैमिली कोर्ट ने उसकी मांग खारिज करते हुए कहा था कि गुजारा भत्ता सिर्फ नाबालिगों को ही दिया जाता है।

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