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ये हैं देश के ऐसे एकमात्र डॉक्टर, जिन्होंने 500 मरे हुए जानवरों को रखा है जिंदा!

संजय गांधी नेशनल पार्क में देश का इकलौता टेक्सीडर्मी सेंटर है।

Danik Bhaskar | Jun 24, 2018, 07:07 PM IST
प्रैक्टिसिंग वाइल्ड लाइफ टेक प्रैक्टिसिंग वाइल्ड लाइफ टेक

मुंबई. संजय गांधी नेशनल पार्क, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के पश्चिमी छोर पर है। इस पार्क के भीतर लगभग 2000 वर्ग फीट क्षेत्र में देश का इकलौता टेक्सीडर्मी सेंटर है। यहां वर्तमान में देश के एक मात्र वाइल्ड लाइफ टेक्सीडर्मिस्ट डाॅ. संतोष गायकवाड़ काम करते हैं। डॉ. गायकवाड़ ने अब तक 500 से अधिक जानवरों व पक्षियों की टेक्सीडर्मी की है। यहां जंगली जानवरों और पक्षियों को देखकर एकाएक कोई भी इंसान धोखा खा जाएगा कि ये जानवर जीवित नहीं हैं। टाइगर जैसे जानवर की टेक्सीडर्मी करने में करीब एक माह का समय लगता है। तोता, मुर्गी, मोर या अन्य पक्षी की टेक्सीडर्मी करने में करीब 3 दिन लग जाते हैं। डाॅ. गायकवाड़ का कहना है कि एक टाइगर की लाइफ औसतन 18 से 20 वर्ष रहती है। परंतु हिम टाइगर जैसे विलुप्त होने वाले जानवरों की टेक्सीडर्मी करके उन्हें 100 साल तक सजीव जैसा रखा जा सकता है।

टेक्सीडर्मी को पांच कलाओं का संगम मानते हैं डाॅ. गायकवाड़

डॉ. गायकवाड़ कहते हैं कि यह काम सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि विशेष कला है। हम जंगली जानवरों की डेड बाॅडी पर काम करते हैं। असल में जंगली जानवरों की शारीरिक संरचना और उनकी खाल निकालने का ज्ञान ज्यादा लोगों के पास नहीं है। वे कहते हैं कि टेक्सीडर्मी में एक खास माध्यम से छेद कर स्कीन को अलग किया जाता है। ऐसे में तब हम खून और मांस के संपर्क में आते हैं। यही वजह है कि मैं टेक्सीडर्मी को पांच कलाओं का संगम कहता हूं।

क्योंकि इसमें शरीर रचना शास्त्र, मूर्तिकला, पेंटिंग, बढ़ईगिरी और चर्मकला में निपुण होना जरूरी है। समय-समय पर अलग-अलग राज्यों के वन विभाग के प्रधान मुख्य सचिवों ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर विलुप्त होने की कगार पर खड़े कई जंगली जानवरों की टेक्सीडर्मी डाॅ. गायकवाड़ से कराई है।

साइबेरियन टाइगर और हिम तेंदुए की टेक्सीडर्मी करा चुके हैं

उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में हीरा नामक टाइगर की मौत हो गई, तो तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक पीवी गंगोपाध्याय ने डाॅ. गायकवाड को बुलाया और उनके नाम से टेक्सीडर्मी का लाइसेंस जारी कर हीरा टाइगर की टेक्सीडर्मी कराई। इसी तरह उत्तराखंड सरकार ने नैनीताल में मृत पाए जाने वाले साइबेरियन टाइगर और हिम तेंदुए की टेक्सीडर्मी उनसे कराई। महाराष्ट्र सरकार ने राॅयल बंगाल टाइगर की टेक्सीडर्मी डाॅ. गायकवाड़ से कराई है।