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कभी बेडरूम तो कभी कचरे के ढेर में दबी मिली जर्नलिस्टों की बॉडी, 5 केस

2 मई को आ सकता है जर्नलिस्ट ज्योतिर्मोयी केस में फैसला।

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 12:15 PM IST
Journalists who were killed for speaking truth

मुंबई. 2 मई को मुंबई के जर्नलिस्ट ज्योतिर्मोयी डे मर्डर केस पर फैसला आ सकता है। 11 जून 2011 को ज्योतिर्मोयी का घर लौटते वक्त मर्डर हुआ था। इस केस में छोटा राजन भी 12 आरोपियों में शामिल है। सीबीआई के मुताबिक गैंगस्टर ज्योतिर्मोयी द्वारा लिखे जाने वाले आर्टिकल्स से खुश नहीं थे, इसी वजह से उनकी हत्या कर दी गई।

ज्योतिर्मोयी डे देश के बेस्ट इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स में शुमार थे। इस केस में एक अन्य जर्नलिस्ट जिग्ना वोरा को भी आरोपी बनाया गया था। जिग्ना उन्हें हर बार कहती थी कि वो गैंगस्टर पर आर्टिकल्स लिखकर गलती कर रहे हैं।

DainikBhaskar.com अपने रीडर्स को कुछ ऐसे ही दिल दहलाने वाले जर्नलिस्ट्स के मर्डर केस बता रहा है।

पुलिस ने घर पर डाली रेड, फिर पेट्रोल से जलाकर दी मौत...

Journalists who were killed for speaking truth

केस - जगेंद्र सिंह (1 जून 2015)

 

 

राजधानी लखनऊ से 180 किमी दूर बसे शाहजहांपुर में जगेंद्र सिंह फ्रीलांस जर्नलिस्ट थे। 1 जून 2015 को 2 पुलिसवाले और 4 अन्य लोग उसके घर में घुसे। उन लोगों ने आते ही जगेंद्र से बहसबाजी शुरू कर दी। एक ने कहा- तू मंत्रीजी के खिलाफ लिखना नहीं छोड़ेगा ना? हर रोज खनन पर फेसबुक पोस्ट डालता है। इतना कहने के बाद गहमागहमी के बीच उन लोगों में से एक ने जगेंद्र के ऊपर पेट्रोल डाल दिया, फिर दूसरे ने आग लगा दी। यह सबकुछ जगेंद्र के बेटे राघवेंद्र सिंह की आंखों के सामने हुआ। वो रोकता उससे पहले ही वो 6 लोग फरार हो गए।

 

मरने से पहले वीडियो में कहीं ये बातें

 

- घरवालों ने जैसे-तैसे आग बुझाकर जगेंद्र को लोकल हॉस्पिटल पहुंचाया। उसकी 60 परसेंट बॉडी जल चुकी थी। डॉक्टरों ने तुरंत उसे लखनऊ के KGMU हॉस्पिटल रेफर कर दिया।
- स्ट्रेचर पर लेटे हुए जगेंद्र ने एक टीवी जर्नलिस्ट को अपना आखिरी बयान दिया था। उसने कहा था- "इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश राय अपने 5 साथियों के साथ मेरे घर में घुसा और मेरे साथ मारपीट की। अगर मंत्री और उसके गुंडों को मुझसे परेशानी थी तो वो मुझे पिटवा सकते थे या गिरफ्तार करवा सकते थे। उन्होंने मुझे पेट्रोल डालकर जलाया क्यों?"

 

कौन था जगेंद्र?

 

- जगेंद्र शाहजहांपुर का रहनेवाला एक फ्रीलांस जर्नलिस्ट था। वो अक्सर अवैध खनन को लेकर सरकार पर निशाना साधता था।
- मौत से पहले उसने तत्कालीन मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने साथियों के साथ एक आंगनवाड़ी कार्यकत्री के साथ गैंगरेप किया। यही नहीं, अवैध खनन पर एक इंवेस्टिगेटिव रिपोर्ट जगेंद्र ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट की थी।
- रेप के आरोप लगाने के कुछ दिन बाद ही उस पर जानलेवा हमला हुआ।
- 7 दिन मौत से लड़ने के बाद 8 जून 2015 को जगेंद्र ने हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली।

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केस - शिवानी भटनागर (23 जनवरी 1999)

 

- इंडियन एक्सप्रेस की जर्नलिस्ट शिवानी भटनागर की उसी के घर पर निर्मम हत्या कर दी गई थी। 31 साल की शिवानी अपने पति राकेश भटनागर और 2 महीने के बेटे के साथ दिल्ली के पतपड़गंज में रहती थी।
- 23 जनवरी 1999 को दो लोग उसके घर में यह बोलकर घुसे कि वे राकेश के फैमिली फ्रेंड हैं। थोड़ी बातचीत के बाद ही दोनों ने शिवानी पर अटैक कर दिया।
- शिवानी ने उन हमलावरों से बचने की बहुत कोशिश की। उसने किचन में रखे फ्राइपैन से भी अपना बचाव किया, लेकिन वो दोनों उस पर हावी हो गए। 
- शिवानी की खून में लथपथ लाश उसके बैडरूम में मिली थी। उसकी बॉडी पर गला घोंटने और चाकू से वार के कई निशान थे। 
- शाम 5 बजे के करीब जब शिवानी का देवर दरवाजा तोड़कर घर में घुसा तो उसे फर्श पर भाभी की बॉडी और बेड पर दो महीने का भतीजा रोता हुआ मिला।

 

IPS के खिलाफ दर्ज हुआ था मर्डर केस

 

- शिवानी मर्डर केस में हरियाणा कैडर के IPS रविकांत शर्मा और 3 अन्य के खिलाफ FIR हुई थी।
- 12 साल की कानूनी लड़ाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने आईपीएस और दो अन्य को बरी किया और एक आरोपी प्रदीप शर्मा को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

 

क्या था मर्डर का मोटिव

 

- इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शिवानी और आईपीएस रविकांत के बीच इंटीमेट रिलेशन्स थे, जिसकी डीटेल्स पब्लिक करने की वो लगातार धमकी दे रही थी।

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केस - संदीप कोठारी (19 जून, 2015)

 

संदीप कोठारी मध्य प्रदेश के कटांगी में इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट था, जिसकी रेत के अवैध खनन में लिप्त तीन लोगों ने जला कर हत्या कर दी थी। 
कोठारी ने तीन लोगों के खिलाफ अवैध रेत खनन का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करवाया था। उसके बाद से उसे लगातार मौत की धमकियां मिल रही थीं।
19 जून को संदीप अपने एक दोस्त के साथ बाइक से जा रहा था। तभी रास्ते में कुछ लोगों ने उनकी बाइक में कार से टक्कर मार दी। 
कार सवारों ने संदीप को पीटा और फिर किडनैप कर साथ ले गए। उन आदमियों ने पहले उसका गला घोंटा, जिससे वो बेहोश हो गया। उसी हालत में उसे रेलवे ट्रैक पर फेंककर आग लगा दी गई।
संदीप की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक उसे जिंदा जलाया गया।

 

क्या है स्टेटस

 

- केस के दो साल बाद तक कोई गिरफ्तारी या केस दर्ज नहीं किया गया।  

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केस - करुण मिश्रा (13 फरवरी 2016)

 

यूपी के सुल्तानपुर में जन संदेश टाइम्स अखबार के ब्यूरो चीफ करुण मिश्रा (32) अपनी बेबाकी के लिए मशहूर थे। 13 फरवरी की शाम करुण अपने घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में कुछ बाइकसवारों ने उन्हें घेरकर मौत के घाट उतार दिया। करुण को क्लोज रेंज से गोली मारी गई थी। 

 

15 दिन पहले ही बना था पिता

 

- 32 साल के करुण मौत से 15 दिन पहले ही दूसरी बार पिता बने थे। उनकी पत्नी पायल ने 29 जनवरी 2016 को उनके दूसरे बच्चे को जन्म दिया था। 

 

क्यों हुआ अटैक

 

- करुण अक्सर अवैध खनन पर रिपोर्टिंग करते थे। वे माफिया की हिटलिस्ट पर थे। कई बार माफिया ने उन्हें घूस देने की कोशिश की, लेकिन वे कभी झांसे में नहीं आए।
- उनके दोस्त मनीष तिवारी ने पुलिस को बताया था कि 5 फरवरी 2016 को ही करुण को खबर मिली थी कि उसकी जान खतरे में है और 11 या 12 फरवरी को उस पर अटैक हो सकता है।

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केस - इरफान हुसैन (13 मार्च 1999)

 

- यूपी के साहिबाबाद निवासी इरफान हुसैन आउटलुक मैगजीन में सीनियर कार्टूनिस्ट थे। 8 मार्च 1999 की शाम वे दिल्ली प्रेस क्लब से घर जाने के लिए निकले थे। निकलने से पहले उन्होंने अपनी पत्नी मुनीरा को फोन कर के कहा- मैं 15 मिनट में घर पहुंच जाऊंगा। 
- जब देर रात तक इरफान घर नहीं पहुंचे तो उनकी पत्नी ने लोकल पुलिस स्टेशन में मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करवाई।
- इरफान के गुमशुदा होने के दो दिन बाद एक अन्य कार्टूनिस्ट ने दावा किया कि उसे एक राजनीतिक पार्टी से धमकी भरा फोन आया, जिसमें कहा गया- हुसैन का मर्डर हो चुका है, अब अगला नंबर तुम्हारा ही है।

 

जूतों से हुई थी डेडबॉडी की पहचान

 

- 13 मार्च 1999 को गाजीपुर के पास इरफान की सड़ चुकी डेडबॉडी मिली। पुलिस ने शिनाख्त के लिए उसके एक दोस्त को मॉर्चुरी बुलवाया।
- बॉडी की हालत इतनी खराब थी कि दोस्त ने सिर्फ जूते पहचानकर बॉडी की शिनाख्त की। 
- इरफान के गले को घोंटा गया था और फिर रेता गया था। उसकी बॉडी पर 28 जगह चाकू घोंपने के निशान थे और हाथ-पैर बंधे हुए थे।

 

क्या लिया पुलिस ने एक्शन

 

- मौत के एक महीने बाद मार्च में पुलिस ने हुसैन का बैग पानीपत हरियाणा में मिलने का दावा किया। उसी साल दिसंबर में कार का स्टीरियो एक डीलर के पास और सफेद कलर की मारुति अनंतनाग से बरामद की गई।
- पुलिस ने पांच आरोपियों को भी गिरफ्तार किया। 7 साल तक कोर्ट केस चला, लेकिन फरवरी 2006 में कोर्ट ने सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया।

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