महाराष्ट्र / फणनवीस सरकार ने पेश किया 19,784 करोड़ रुपये घाटे का अंतरिम बजट, इस साल कुल 99 हजार करोड़ खर्च का प्रावधान



गृहराज्य मंत्री दीपक केसकर (बाएं) ने विधानपरिषद और वित्त मंत्री सुधीर मुंगटीवार ने विधानसभा पटल पर बजट पेश किया। गृहराज्य मंत्री दीपक केसकर (बाएं) ने विधानपरिषद और वित्त मंत्री सुधीर मुंगटीवार ने विधानसभा पटल पर बजट पेश किया।
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गृहराज्य मंत्री दीपक केसकर (बाएं) ने विधानपरिषद और वित्त मंत्री सुधीर मुंगटीवार ने विधानसभा पटल पर बजट पेश किया।गृहराज्य मंत्री दीपक केसकर (बाएं) ने विधानपरिषद और वित्त मंत्री सुधीर मुंगटीवार ने विधानसभा पटल पर बजट पेश किया।

Dainik Bhaskar

Feb 27, 2019, 05:11 PM IST

मुंबई. महाराष्ट्र की देवेंद्र फणनवीस सरकार की ओर से शुक्रवार को अंतरिम बजट पेश किया गया। राज्य के वित्त मंत्री सुधीर मुंगटीवार ने विधानसभा पटल पर आगामी चार महीनों(अप्रैल से जुलाई) के लिए बजट पेश किया है। इस बार सरकार ने 19,784.39 करोड़ रुपये के राजस्व और 60,234.52 करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का अंतरिम बजट पेश किया है।  राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों की योजनाओं पर कुल 99 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान वार्षिक योजना में किया है। 

 

सरकार इस वर्ष आर्थिक घाटा नियंत्रित करने में रही सफल
मुनगंटिवार ने कहा कि वर्ष 2019-20 में 3,14,489.00 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त होने और 3,34,273.39 करोड़ राजस्व खर्च होने का अनुमान है। जिसकी वजह से कुल 19,784.38 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा होने का अंदाज है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2018-19 में कुल 3,01,342.86 करोड़ राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद जताई थी। जिसमें से यह वित्तीय वर्ष 2018-19 खत्म होने में एक महीना बाकी होने के बावजूद कुल 3,01,459.74 करोड़ राजस्व प्राप्त हो चुका है। इसी वजह से चालू आर्थिक वर्ष में 15,374.90 करोड़ रुपये का राजस्व घाटे का अनुमान नियंत्रित होकर 14,960.04 करोड़ रुपये हो गया है।


राज्य सरकार पर कुल कर्ज 4,71,642 करोड़ रुपये का कर्ज 
महाराष्ट्र पर इस वर्ष 4,14,411 करोड़ रुपये का कर्ज होने का अनुमान था। राज्य सरकार का कर्ज का यह बोझ वर्ष 2019-20 में 4,71,642 करोड़ रुपये होने का अंदाज है। वित्त मंत्री मुनगंटिवार ने इस पर सदन में सफाई देते हुए कहा :- राज्य सरकार अपने कुल उत्पन्न की तुलना में 25% तक कर्ज ले सकती है। जिसे राज्य की आर्थिक सेहत नियंत्रण में माना जाता है। इस वर्ष 7वां वेतन आयोग देने के बावजूद राज्य पर कर्ज का बोझ सिर्फ 14.82% ही है।

 

 

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