महाराष्ट्र / कौमार्य परिक्षण का विरोध करने पर ठाणे के एक परिवार को झेलना पड़ा सामाजिक बहिष्कार, चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज



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  • महाराष्ट्र के कंजरभाट समुदाय में शादी से पहले दुल्हन के कौमार्य परिक्षण की कुप्रथा है
  • पुणे में भी एक परिवार को इसी तरह के बहिष्कार का सामना करना पड़ा था

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 01:22 PM IST

मुंबई. महाराष्ट्र के ठाणे जिले में कंजरभट समुदाय से जुड़े एक परिवार ने शादी से पहले युवतियों के कौमार्य परीक्षण (वर्जिनिटी टेस्ट) का विरोध किया था। इसके बाद समुदाय से उन्हें सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा। अब इस परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

 

शिकायतकर्ता, विवेक तमाइचिकर ने पुलिस को बताया कि उनका परिवार पिछले एक साल से जाति पंचायत द्वारा सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहा था। पंचायत के फरमान के बाद समुदाय के लोग सोमवार को उनकी दादी की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। विवेक ने आरोप लगाया कि जबकि समाज के लोग उसी दिन एक शादी में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इस तरह का बहिष्कार पूरी तरह से अनुचित है।

 

कौमार्य परीक्षण दंडनीय अपराध 

मामले की जांच कर रहे अंबरनाथ पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि इसी साल फरवरी में महाराष्ट्र सरकार ने शादी से पहले कौमार्य परीक्षण को दंडनीय अपराध घोषित किया। फिलहाल, मामले की जांच की जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं गया है।

 

मामले में प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री रणजीत पाटिल ने कहा कि कौमार्य परीक्षण को यौन उत्पीड़न का एक रूप माना जाएगा। कानून और न्यायपालिका विभाग के साथ विचार-विमर्श के बाद इस संबंध में एक परिपत्र जारी किया जाएगा। इसमें बहिष्कार करने की स्थिति में भी स्पष्ट प्रावधान किया जाएगा। 

 

पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले 

कथित तौर पर महाराष्ट्र के कंजरभाट समुदाय में शादी से पहले दुल्हन के कौमार्य परिक्षण की कुप्रथा है। कई सामाजिक संगठन इस कुप्रथा को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। पुणे में इसी तरह का एक मामला सामने आया था। यहां एक लड़की ने कौमार्या परीक्षण करवाने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद परिवार को बहिष्कार का सामना करना पड़ा था।

 

शादी के बाद ‘कौमार्य’ की ली जाती है परीक्षा

कथित तौर पर कंजरभाट समुदाय में शादी के दूसरे दिन लड़की के ‘चरित्र’ शुद्धि के नाम पर ‘कौमार्य’ की परीक्षा ली जाती है। सुहागरात की रात वर को एक सफेद चादर दी जाती है। अगले दिन समुदाय की महिलाओं द्वारा इस चादर की जांच की जाती है। अगर चादर में खून के निशान नहीं मिले तो लड़की को जात पंचायत को सौंपा जाता है। पंचायत उस लड़की को दंड देती है और उसे मायके भेज दिया जाता है।

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