वर्धा विश्वविद्यालय / पीएम मोदी को कश्मीर समेत कई मुद्दों पर पत्र लिखने वाले 6 शोध छात्र निष्कासित



विश्वविद्यालय के फैसले के खिलाफ छात्रों का एक वर्ग धरने पर बैठ गया है। विश्वविद्यालय के फैसले के खिलाफ छात्रों का एक वर्ग धरने पर बैठ गया है।
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विश्वविद्यालय के फैसले के खिलाफ छात्रों का एक वर्ग धरने पर बैठ गया है।विश्वविद्यालय के फैसले के खिलाफ छात्रों का एक वर्ग धरने पर बैठ गया है।

  • बुधवार को लिखे पत्र में छात्रों ने मॉबलिंचिंग, बलात्कार के आरोपी नेताओं को बचाने और लोकतंत्र की हत्या पर सवाल किया था
  • विश्वविद्यालय ने कहा- आचार संहिता के दौरान छात्रों ने किया था कैंपस में प्रदर्शन, इसलिए किया निष्कासन

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2019, 01:57 PM IST

वर्धा. वर्धा विश्वविद्यालय ने अपने 6 शोध छात्रों को निष्कासित कर दिया है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन से कश्मीर मसले पर उनकी चुप्पी, देश में हो रही मॉबलिंचिंग और बलात्कार के आरोपी नेताओं को बचाने व लोकतंत्र की हत्या पर सवाल किया था। वहीं, विश्वविद्यालय का कहना है कि निष्कासित किए गए छात्रों ने आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए बसपा के संस्थापक कांशीराम का परिनिर्वाण दिवस बिना इजाजत मनाया था और धरना दिया था।

 

विश्वविद्यालय ने शोध छात्र चंदन सरोज (एम फिल, सोशल वर्क), नीरज कुमार (पीएचडी, गांधी और शांति अध्ययन), राजेश सारथी, रजनीश अंबेडकर (महिला अध्ययन विभाग), पंकज वेला (एम फिल, गांधी और शांति अध्ययन) और वैभव पिंपलकर (डिप्लोमा, महिला अध्ययन विभाग) को निष्कासित किया है। विश्वविद्यालय के इस फैसले का विभिन्न छात्र संगठन और कुछ टीचर विरोध कर रहे हैं। छात्रों का एक वर्ग इसके विरोध में धरने पर बैठ गया है। देश के कई कॉलेज और विश्वविद्यालय में भी इसका विरोध हो रहा है।

 

छात्रों ने कहा- ओबीसी और एससीएसटी को निशाना बनाया जा रहा
छात्रों का आरोप है कि एससीएसटी और ओबीसी के छात्रों को यहां जानबूझ कर निशाना बनाया जा रहा है। उनको पढ़ने नहीं दिया जा रहा है। कैंपस के अंदर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को हर तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जाती है, लेकिन बहुजन छात्रों को कोई भी कार्यक्रम करने की विश्वविद्यालय प्रशासन अनुमति नहीं देता। इसके बाद अगर हम आवाज उठाते हैं तो हमारे साथ ऐसा जुल्म किया जाता है। छात्र मॉब लिंचिंग और रेप के आरोपी नेताओं को बचाने के खिलाफ धरना दे रहे थे। छह छात्रों में से एक चंदन सरोज मुताबिक, 9 अक्टूबर को हुए धरने में करीब 100 छात्र शामिल थे लेकिन खासतौर पर तीन दलित और तीन ओबीसी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

 

विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कहा

  • महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हैं, जिसको लेकर आचार संहिता लागू है। ऐसे में इन छात्रों ने आचार संहिता का उल्लंघन किया और कैंपस के अंदर राजनीतिक धरना दिया।
  • साथ ही न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया, जिस कारण विश्वविद्यालय से उन्हें निष्कासित किया जाता है।

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