महाराष्ट्र / नागरिकता कानून पर मनसे ने बदला रुख, 9 फरवरी को अब घुसपैठियों को बाहर करने के लिए होगा आंदोलन

राज ठाकरे ने महाधिवेशन में इस कानून का समर्थन किया था। राज ठाकरे ने महाधिवेशन में इस कानून का समर्थन किया था।
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राज ठाकरे ने महाधिवेशन में इस कानून का समर्थन किया था।राज ठाकरे ने महाधिवेशन में इस कानून का समर्थन किया था।

  • नांदगांवकर ने कहा कि राज ठाकरे के बयान को मीडिया ने ठीक से नहीं समझा
  • अदनान सामी को पद्म पुरस्कार दिए जाने का विरोध भी कर चुकी है मनसे

दैनिक भास्कर

Jan 29, 2020, 01:00 PM IST

मुंबई. महाधिवेशन में नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने वाले राज ठाकरे की पार्टी अब इसपर अपना रुख बदलते हुई नजर आ रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता बाला नांदगांवकर ने कहा कि 9 फरवरी को होने वाला प्रदर्शन अब सीएए को लेकर नहीं बल्कि पाकिस्तानी और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ उन्हें देश से बाहर खदेड़ने की मांग के लिए निकाला जाएगा। इससे पहले 23 जनवरी को मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपने भाषण में इस कानून का समर्थन करने की बात कही थी। 

मीडिया ने गलत ढंग से पेश किया उनका भाषण
मंगलवार को पार्टी नेताओं के साथ अपने घर पर बैठक के बाद राज ठाकरे ने अपनी भूमिका में यह बदलाव किया है। बैठक के बाद , एमएनएस नेता बाला नांदगांवकर ने बताया कि राज ठाकरे ने मीटिंग में नेताओं से कहा है कि 23 जनवरी को उनकी बात को मीडिया ने सही ढंग से नहीं समझा। उन्होंने घुसपैठियों को देश से बाहर करने की बात कही थी, न कि सीएए के समर्थन की।'

एमएनस नेता ने आगे कहा कि राज ठाकरे और एमएनएस शुरू से ही पाकिस्तानी और बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से भगाने का समर्थन करती आई है। उन्‍होंने कहा कि राज ठाकरे का कहना है कि देश की जनसंख्या पहले ही 135 करोड़ है, अब और कितने लोगों को नागरिकता देंगे?

सीएए पर भूमिका बदलकर बढ़ाया सस्‍पेंस
राज ठाकरे द्वारा सीएए के समर्थन से ऐसा लगा था कि लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ प्रचार करने वाले राज ठाकरे बीजेपी से जुड़कर शिवसेना की जगह लेना चाहते हैं। लेकिन हाल ही में मोदी सरकार द्वारा अदनान सामी को पद्म पुरस्कार दिए जाने का विरोध कर और अब सीएए के समर्थन पर अपनी भूमिका बदलकर राज ठाकरे ने इस सस्पेंस को और बढ़ा दिया है।

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