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10 क्लास में पढ़ाई जाएगी इस लेडी सब इंस्पेक्टर की कहानी, 4 साल में 953 युवाओं को गलत रास्ते पर जाने से बचाया

रोज 15 घंटे काम में ही बीतते हैं; शादी के लिए 30 दिन की छुट्‌टी ली, एक हफ्ते पहले ही लौटी

Dainik Bhaskar

Jun 18, 2018, 10:26 AM IST
सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा

मुंबई. रेलवे सुरक्षा बल की सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा का काम मुंबई में मिसाल बन गया है। इस शहर की चकाचौंध से प्रभावित होकर कई बच्चे घर से भागकर यहां पहुंचते हैं। यहां आकर सबके सपने पूरे नहीं होते। कई गलत रास्तों पर चल देते हैं। रेखा ने ऐसे ही बच्चों को गलत राह से बचाने और उनके परिवार से मिलाने का काम किया। नौकरी को 4 साल हुए हैं और रेखा अब तक घर से भागकर यहां आए 953 युवाओं को गलत रास्ते पर जाने से बचा चुकी हैं। रेखा के इस काम को पहचान भी मिली है। उनकी बहादुरी और सूझ-बूझ के किस्से को अब मराठी के 10वीं क्लास के सिलेबस में पढ़ाया जाएगा। टीम में होते हैं 4-5 लोग...

- पुलिस विभाग ने रेखा को क्राउड कंट्रोल और महिला यात्रियों की सुरक्षा का भी प्रभार दे दिया है। उनकी टीम में एक एसआई सहित 4-5 लोग शामिल रहते हैं।

- महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक निर्मिती व अभ्यास क्रम संशोधन मंडल की सदस्य डाॅ. शारदा निवाते ने बताया- “हमने इस साल दसवीं के पाठ्यक्रम में एेसी महिला की कहानी शामिल करने का फैसला किया, जो अभी सक्रिय हो, तभी रेखा का ख्याल आया।

- रेखा बच्चों को पुलिस की तरह नहीं बल्कि टीचर की तरह समझाती हैं। यही बात स्कूल सिलेबस में बताई गई है कि उनमें पुलिस का डराने वाले चेहरा नहीं है। रेखा के अलावा लेफ्टिनेंट स्वाती म्हाडिक की कहानी को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

शादी के लिए 30 दिन की छुट्‌टी ली

- रेखा ने कहा कि 4 साल हो गए हैं, हर दिन 15 घंटे से ज्यादा काम और 5-6 घंटे ही आराम करती हूं। छुट्टियां भी इतनी ही ली हैं कि उंगलियों पर गिन सकती हूं। लोग मुझे वर्कहाॅलिक कहते हैं।

- जिम्मेदारी है, उसे निभाने में ही पूरा वक्त गुजार देती हूं। मुझे जो भी उपलब्धियां मिलीं, वो आसान नहीं रहीं। मेरे काम करने का तरीका अलग था। काम और जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए मैंने दूसरों से ज्यादा प्रतिबद्धता दिखाई।

- रोज सुबह मुलुंड रेलवे स्टेशन से सुबह 7:37 की लोकल पकड़कर सीएसटी जाती हूं। रात में भी कभी 8 बजे से पहले की लोकल नहीं पकड़ पाती। एक-दो कोशिश भी की कि जल्दी लोकल पकड़कर घर चली जाऊं। जब भी ऐसा किया, हर बार किसी न किसी वजह से आधे रास्ते से ही आॅफिस वापस आना पड़ा।

- इसी साल 12 मई को मेरी शादी हुई थी। शादी के लिए 30 दिन की छुट्‌टी स्वीकृत हुई थी, लेकिन मैं 23 दिन में ही काम पर वापस आ गई। मुंबई की चकाचौंध देखकर कई लड़के-लड़कियां घर से भागकर यहां आ जाते हैं। ऐसे बच्चों को गलत दिशा में जाने से रोकना, उन्हें उनके घर तक पहुंचाना मेरा जुनून बन गया है। जब भी हमें पता चलता है कि कोई लड़का-लड़की भागकर मुंबई आया है, तो हम उसपर पैनी नजर रखते हैं।

सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा स्टेज पर स्पीच देते हुए। सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा स्टेज पर स्पीच देते हुए।
सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा की फैमिली। सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा की फैमिली।
सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा राष्ट्रपति कोविंद से सम्मान प्राप्त करते हुए। सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा राष्ट्रपति कोविंद से सम्मान प्राप्त करते हुए।
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सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रासब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा
सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा स्टेज पर स्पीच देते हुए।सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा स्टेज पर स्पीच देते हुए।
सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा की फैमिली।सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा की फैमिली।
सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा राष्ट्रपति कोविंद से सम्मान प्राप्त करते हुए।सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा राष्ट्रपति कोविंद से सम्मान प्राप्त करते हुए।
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