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आरएसएस / सह सरकार्यवाह डॉ वैद्य बोले-पश्चिम अवधारणा से बना है 'राष्ट्रवादी' शब्द, हिन्दू कभी कट्टर नहीं हो सकता है

डॉ मनमोहन वैद्य नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। -फाइल डॉ मनमोहन वैद्य नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। -फाइल
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डॉ मनमोहन वैद्य नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। -फाइलडॉ मनमोहन वैद्य नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। -फाइल

  • डॉ वैद्य नागपुर के सोहम कॉम्प्लेक्स में झील फाउंडेशन और वेस्टर्न कोल फील्ड की साझेदारी में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे
  • वैद्य ने कहा कि हिंदू असर्टिव हो सकता है, एग्रेसिव हो सकता है, एक्टिव या एंग्री हो सकता है लेकिन कट्टर नहीं हो सकता

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2020, 06:20 PM IST

नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ मनमोहन वैद्य ने शनिवार को कहा कि 'राष्ट्रीय' और 'राष्ट्रवादी' दोनों शब्दों में अंतर है। 'राष्ट्रवादी' शब्द पश्चिमी अवधारणा से बना है। उन्होंने कहा कि संघ राष्ट्रीय है इसे राष्ट्रवादी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक को राष्ट्रवादी कहते हैं। हम भी खुद को राष्ट्रवादी कहते हैं, वहीं हमारे कुछ लोग हिन्दू राष्ट्रवाद शब्द का प्रयोग जोर-शोर से करते हैं। डॉ वैद्य नागपुर के सोहम कॉम्प्लेक्स में झील फाउंडेशन और वेस्टर्न कोल फील्ड की साझेदारी में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। 

'हमारे यहां पहले भी राष्ट्रवाद नहीं था और अभी भी नहीं है'
डॉ वैद्य ने कहा,'यह हमारा शब्द है ही नहीं, हमारे यहां राष्ट्रवाद पहले भी नहीं था और वर्तमान में भी नहीं है। यह शब्द पश्चिम से आया है। पश्चिमी जगत में स्टेट नेशन की संकल्पना रही है, वहां के नेशनलिज्म ने लोगों पर अत्याचार किए। सत्ता विस्तार के लिए युद्ध किए। भारत की राष्ट्र को लेकर अवधारणा सांस्कृतिक है। ये जीवन दृष्टि पर आधारित है। यह राज्य पर कभी भी आधारित नहीं थी। हम राष्ट्र, राष्ट्रीय, राष्ट्रीयता, राष्ट्रत्व इन शब्दों से अपनी बात कह सकते है, फिर हम पश्चिमी देशों द्वारा थोपा गया राष्ट्रवादी शब्द क्यों इस्तेमाल करते हैं।'

'हिन्दू कभी कट्टर नहीं हो सकता'
डॉ वैद्य ने आगे कहा कि हम राष्ट्रीय हैं, इतना ही पर्याप्त है, हमको राष्ट्रवादी बनने की जरूरत नहीं है। कट्टर शब्द को लेकर डॉ मनमोहन वैद्य ने कहा- 'कट्टर' शब्द अंग्रेजी भाषा के फंडामेंटलिज्म शब्द से आया है। हमारे यहां कई लोग कहते हैं कि वह कट्टर हिंदू हैं। वैद्य ने कहा कि हिंदू असर्टिव हो सकता है, एग्रेसिव हो सकता है, एक्टिव या एंग्री हो सकता है लेकिन कट्टर नहीं हो सकता। कई स्वयंसेवक भी खुद को कट्टर कहते हैं लेकिन यह गलत है। स्वयंसेवक निष्ठावान, समर्पित या सक्रिय हो सकता है, लेकिन वह कट्टर नहीं हो सकते। वैद्य ने बताया कि पश्चिमी जगत से आए शब्दों की अवधारणाएं अलग होती हैं, इसलिए हमें पश्चिम द्वारा थोपे गए शब्दों के इस्तेमाल से बचना चाहिए।

'शब्दों के इस्तेमाल से पहले उसकी अवधारणाओं को समझना जरूरी'
विचारधारा शब्द की जानकारी साझा करते हुए वैद्य ने बताया कि आइडिओलॉजी शब्द से हिन्दी भाषा में विचारधारा शब्द बना है। यह शब्द कम्युनिज्म से आया है। आइडिओलॉजी में दूसरों को अलग रखने का विचार अंतर्निहीत है। वैद्य ने कहा कि कम्युनिस्ट खुद को लेफ्ट मानते हुए जो उनकी तरह सोच नहीं रखता उसे राइटिस्ट कहते हैं। वैद्य ने आह्वान किया कि शब्दों का प्रयोग करने से पहले उनके पीछे की अवधारणाओं को समझना जरूरी है।

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