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शिवसेना का सामना के जरिए कांग्रेस पर निशाना; लिखा- युवा नेताओं के प्रति अहंकार बना सिंधिया का पार्टी छोड़ने का कारण

एक वर्ष पहले
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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। - फाइल - Dainik Bhaskar
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। - फाइल
  • सिंधिया के भाजपा का दामन थामने पर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा संपादकीय
  • ज्योतिरादित्य सिंधिया की तारीफ करते हुए सामना ने कमलनाथ को बताया इसका जिम्मेदार
  • सामना के मुताबिक, मध्य प्रदेश के बाद अब राजस्थान में भी हो सकते हैं इस तरह के हालात

मुंबई. मध्य प्रदेश में सियासी ड्रामे पर शिवसेना ने मुखपत्र सामना के जरिए कांग्रेस पर निशाना साधा है।सामना में 'मध्य प्रदेश की उल्टी बारात' शीर्षक से संपादकीय लिखा गया है। इसमें कांग्रेस पर तंज कसते हुए लिखा गया है- भगवान देता है और कर्म नाश कर देता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया का भाजपा में जाना कांग्रेस की युवा नेता के प्रति अहंकार, लापरवाही और नई पीढ़ी को कम आंकने के कारण हुआ है।


सामना ने अपने इस संपादकीय में कई बातों का जिक्र किया है। कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा गया है, मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार अगर गिरती है तो इसका श्रेय भाजपा का चाणक्य मंडल न ले। कमलनाथ सरकार के गिरने की वजह है उनकी लापरवाही, अहंकार और नई पीढ़ी को कम आंकने की प्रवृत्ति। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पुराने नेता है।

'सिंधिया को नजरअंदाज करना गलता रह गया।

'सिंधिया की मांग बड़ी नहीं थी'
सामना में लिखा गया है, 'ज्योतिरादित्य सिंधिया की मांग कोई बड़ी नहीं थी। पहले उन्होंने मध्य प्रदेश के अध्यक्ष का पद मांगा, बाद में राज्यसभा के लिए टिकट मांगा। अगर इन दोनों में से एक भी बात मान ली गई होती तो सिंधिया जैसा नेता पार्टी छोड़कर भाजपा में नहीं गए होते। मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में भाजपा को हराना आसान नहीं था क्योंकि उस समय दोनों ही प्रदेशों में भाजपा के दिग्गज उन प्रदेशों का नेतृत्व कर रहे थे। ऐसे में राज्य के युवा, किसान और मेहनतकश लोगों ने कांग्रेस को वोट दिया। फिर भी दोनों ही राज्यों में सरकार पुराने लोगों के हाथों में मुख्यमंत्री का पद लग गया।

'राजस्थान में भी मध्यप्रदेश जैसे हाल'
सामना में लिखा है- जब पुराने लोग असफल होते हैं तो नए लोगों को मौका देकर उनके नेतृत्व पर भरोसा करना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसीलिए राजस्थान में भी युवा और जुझारू सचिन पायलट और सीएम गहलोत में संघर्ष जारी है। ऐसे में अगर दोनों की बीच का संघर्ष नहीं मिटा तो राजस्थान भी मध्य प्रदेश की राह पर चल पड़ेगा।

'महाराष्ट्र में अभेद्य सरकार'  
सामना में महाराष्ट्र की सियासत पर भी जिक्र है। लिखा गया है- मध्यप्रदेश में आगे क्या होगा? यह कुछ दिन में साफ हो जाएगा। लेकिन इसे देखकर महाराष्ट्र के भाजपा वाले ज्यादा न कूदें। मध्य प्रदेश की राजनीति अपनी जगह है। इसीलिए महाराष्ट्र के कमल पंथी दिन में सपने न देखें। राज्य में महाआघाड़ी की सरकार माउद्धव ठाकरे के नेतृत्व में चल रही है जो अभेद्य है, यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता है।

'जिसे हराया, उसका गाजे-बाजे से स्वागत किया' 
ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में प्रवेश के विषय को लेकर कहा गया है कि जिस सिंधिया को भाजपा ने पिछले साल लोकसभा चुनाव में हराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। उन्हीं का इस साल भाजपा ने पूरे गाजे-बाजे के साथ पार्टी में स्वागत किया, उनकी तारीफ की। 

'कमलनाथ मंझे हुए खिलाड़ी' 
कमलनाथ को लेकर सामना में कहा गया है कि कमलनाथ भी कोई नये खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ हैं, करामाती हैं, जुगाड़ु हैं। ऐसे में पिछले कुछ महीनों में जैसी राजनीति महाराष्ट्र में हुई है, कहीं वैसा ही प्रयोग मध्यप्रदेश में भी न हो इस बात का भाजपा ख्याल रखे।