महाराष्ट्र / शिवसेना ने मोहम्मद गौरी से की भाजपा की तुलना; कहा- पृथ्वीराज की हत्या कर दी, जिसने कई बार जीवनदान दिया



शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे
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शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरेशिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे

  • मुखपत्र सामना में लिखे संपादकीय में भाजपा को बताया विश्वासघाती, वे कृतघ्न प्रवृत्ति के, पीठ पर किया वार
  • मोहम्मद गौरी ने 17 बार हमला किया और हर बार हारने के बाद पृथ्वीराज चौहान ने छोड़ दिया, यही गलती भारी पड़ी

Dainik Bhaskar

Nov 19, 2019, 04:12 PM IST

मुंबई. महाराष्ट्र में सरकार बनाने के संकट से जूझ रही शिवसेना ने एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधा है। इस बार उन्होंने भाजपा की तुलना 13वीं शताब्दी के आक्रमणकारी मोहम्मद गौरी से की है। पार्टी के मुखपत्र सामना में मंगलवार को संपादकीय में लिखा है कि उसने ही पृथ्वीराज चौहान की हत्या कर दी, जिसने उसे जीवनदान दिया। आक्रमणकारी गौरी ने 17 बार हमला किया और हर बार हारने के बाद पृथ्वीराज चौहान ने छोड़ दिया, यही गलती उन पर भारी पड़ी। सामना में शिवसेना ने भाजपा को विश्वासघाती बताने के साथ ही कृतघ्न प्रवृत्ति और पीठ पर वार करने वाला बताया है। 

महाराष्ट्र की पीठ में खंजर घोपने वालों को आसानी से छोड़ा नहीं जाएगा

  1. दरअसल, एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने की तमाम कोशिशों में शिवसेना जुटी हुई है। ऐसे में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से हटाए जाने पर उसने जमकर भड़ास निकाली। संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि के दिन शिवसेना को एनडीए से बाहर किए जाने पर उसने भाजपा पर निशाना साधा है। लेख में पार्टी की ओर से कहा गया, मोहम्मद गोरी और उस समय के पराक्रमी हिंदू राजा पृथ्वीराज चौहान के बीच 18 छोटे-बड़े युद्ध हुए थे। 17 युद्धों में गौरी हार गया था। हर बार पृथ्वीराज चौहान ने उसको छोड़ दिया था। भविष्य में यही गलती उन्हें भारी पड़ी। 

  2. आखिरी लड़ाई में बड़ी तैयारी करके आए मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया। बार-बार जीवनदान देने की बात को भूलकर गौरी ने कृतघ्नता की। पृथ्वीराज चौहान को गिरफ्तार कर उन्हें प्रताड़नाएं दीं। गौरी ने ही इस्लामिक शासन की नींव रखी। भाजपा का नाम लिए बिना लिखा कि महाराष्ट्र में भी ऐसे विश्वासघाती और कृतघ्न प्रवृत्ति के लोगों को हमने कई बार जीवनदान दिया है। आज यही प्रवृत्ति हमें रोकने और शिवसेना की पीठ पर वार करने का प्रयास कर रही है। हालांकि शिवराय के महाराष्ट्र की पीठ में खंजर घोंपनेवालों को आसानी से छोड़ा नहीं जाएगा।

  3. एनडीए के जन्म और प्रसव पीड़ा को शिवसेना ने अनुभव किया है

    शिवसेना ने एनडीए से निकाले जाने को लेकर भी सामना में केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया। लिखा कि यात्रा में जल्दबाजी दुर्घटना को निमंत्रण देती है। शिवसेना को दोनों सदनों में विपक्ष में बिठाए जाने को लेकर कहा कि केंद्रीय संसदीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने इसको लेकर घोषणा कर दी थी। जोशी ने कहा था कि कांग्रेस और राकांपा से शिवसेना के संबंध जुड़ने के कारण उन्हें एनडीए से बाहर निकाल दिया गया है। लिखा कि एनडीए के जन्म और प्रसव पीड़ा को शिवसेना ने अनुभव किया है। भाजपा के बगल में भी कोई खड़ा नहीं होना चाहता था। 

  4. सामना में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर भी हमला बोला गया है। मुखपत्र में लिखा कि एनडीए से शिवसेना को बाहर निकालने की बात करनेवालों को एक बार इतिहास समझ लेना चाहिए। बालासाहेब ठाकरे, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडिस और पंजाब के बादल जैसे दिग्गजों ने जब एनडीए की नींव रखी उस समय आज के दिल्लीश्वर गुदड़ी में भी नहीं रहे होंगे। कइयों का तो जन्म भी नहीं हुआ होगा। जॉर्ज फर्नांडिस एनडीए के निमंत्रक थे और आडवाणी प्रमुख थे। आज एनडीए का प्रमुख या निमंत्रक कौन है इसका उत्तर मिलेगा क्या?' 

  5. अहंकारी-मनमानी राजनीति के अंत की शुरुआत, हम आपको एक दिन उखाड़ फेकेंगे

    भाजपा शोर मचा रही है कि शिवसेना ने कांग्रेस से हाथ मिलाया है। हम पूछते हैं कि अगर ऐसा होता दिख रहा है तो एनडीए की बैठक बुलाकर शिवसेना पर आरोप पत्र क्यों नहीं दिया। पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ सत्ता के लिए निकाह करने वाली भाजपा ने एनडीए की अनुमति ली थी क्या? नीतीश कुमार की कमर पर फिर से एनडीए की लंगोट पहनाते समय तुमने हमसे अनुमति ली थी क्या?' सारा देश जब बालासाहेब को उनकी पुण्यतिथि के दिन श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा था उसी समय जिसने एनडीए की स्थापना की, उसे ही बाहर निकालने की नीच घोषणा इन लोगों ने की।

  6. ये अहंकारी और मनमानी राजनीति के अंत की शुरुआत है। इस शब्द का प्रयोग आज हम जान-बूझकर कर रहे हैं। छत्रपति शिवराय के महाराष्ट्र से लिया गया पंगा तुम्हारा तंबू उखाड़े बिना नहीं रहेगा। हम ये वचन दे रहे हैं। महाराष्ट्र उठता नहीं और उठ गया तो चुप नहीं बैठता। पैसे और सत्ता का दर्प शिवराय की माटी में नहीं चलता इसका अनुभव विधानसभा चुनाव में मिल ही गया है। संपादकीय में आगे लिखा है, महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी राजा का है। महाराष्ट्र के कोने-कोने में सिर्फ एक ही गर्जना होगी, शिवसेना जिंदाबाद! हिम्मत है तो आओ सामने। हम तैयार हैं।

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