चुनाव / कणकवली में भाजपा-शिवसेना आमने-सामने, राणे परिवार से अदावत ने आसपास की सीटों पर भी बढ़ाया विवाद



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  • विधानसभा चुनाव के बीच शिवसेना कई मुद्दों को लेकर भाजपा पर हमलावर
  • शिवसेना ने भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा कर विवाद को और बढ़ा दिया

Dainik Bhaskar

Oct 08, 2019, 01:57 PM IST

मुंबई. विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सभी राजनैतिक दलों ने जोर लगा दिया है। लेकिन, प्रदेश में भाजपा-शिवसेना के बीच दिनोंदिन तल्ख होते रिश्ते पार्टी नेताओं और प्रत्याशियों में बैचेनी बढ़ा रहे हैं। अब नया मोड़ सिंधुदुर्ग की कणकवली सीट पर प्रत्याशी खड़ा करने को लेकर है। गठबंधन में यह सीट भाजपा के खाते में है। यहां भाजपा प्रत्याशी के सामने शिवसेना ने भी उम्मीदवार उतारकर विवाद को और बढ़ा दिया है। फिलहाल, दोनों पार्टियों के प्रत्याशी चुनाव प्रचार-प्रसार में जुटे हैं।

 

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बीच एनडीए में शामिल शिवसेना कई मुद्दों को लेकर भाजपा पर हमलावर है। इसमें सबसे प्रमुख आरे का जंगल काटे जाना और राकांपा प्रमुख शरद पर ईडी की कार्रवाई है। इस बीच शिवसेना ने भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के बेटे नितेश राणे के खिलाफ सतीश सावंत को उम्मीदवार के रूप में उतारकर मुश्किलें बढ़ा दीं। सोमवार को नामांकन वापसी का आखिरी दिन था लेकिन शिवसेना के उम्मीदवार ने पर्चा वापस नहीं लिया। यह सीट राणे परिवार का गढ़ मानी जाती है लेकिन शिवसेना के उम्मीदवार के आ जाने से दोनों पार्टियों को दिक्कत होना तय है।

 

इसलिए विरोध कर रही है शिवसेना

शिवसेना का कणकवली सीट से भाजपा प्रत्याशी नितेश राणे का विरोध करने के पीछे एक पुराना इतिहास भी है। दरअसल, नितेश के पिता नारायण राणे पहले शिवसेना में थे, लेकिन 2005 में उन्होंने शिवसेना को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। उन्होंने 2017 में कांग्रेस को छोड़ने के बाद स्वाभिमान पक्ष के नाम से अपनी पार्टी बनाई और फिर भाजपा में विलय कर दिया। भाजपा ने नारायण राणे को राज्यसभा भेजा।

 

भाजपा ने कई बार किया विवाद को टालने का प्रयास

माना जा रहा है कि इसी पुरानी राजनैतिक अदावत की वजह से भाजपा ने पहली दो सूची में नितेश को प्रत्याशी घोषित नहीं किया। वहीं, नितेश के खिलाफ मैदान में उतरे सतीश सावंत पहले नारायण राणे की स्वाभिमान पार्टी के कार्यकर्ता थे। वह चुनाव से ठीक पहले शिवसेना में शामिल हुए हैं। शिवसेना का प्रत्याशी उतरने से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने पड़ोस की दो सीटों पर शिवसेना के प्रत्याशियों का विरोध शुरू कर दिया है।

 

आरे के बहाने भाजपा के खिलाफ लगातार हमलावर
एनजीटी और मुंबई हाईकोर्ट के फैसले के बाद मेट्रो की सेवा शुरू करने को लेकर 2647 पेड़ों की कटाई का काम शुरू होने और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद शिवसेना ने कोर्ट समेत प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर सीधा हमला किया। सामना में लिखे लेख में कहा गया है कि आरे में रातोंरात पेड़ काटे गए लेकिन इस पर न तो पीएम को रोना आया और न ही मुख्यमंत्री परेशान हुए। यह भी आरोप लगाया कि पेड़ को वोट देने का अधिकार नहीं है तो क्या उनकी हत्या कर देनी चाहिए?

 

सिंगल यूज प्लास्टिक बैन के औचित्य पर भी उठाए सवाल

इससे पहले शिवसेना के युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे ने कई ट्वीट कर पूछा कि एक तरफ तो केंद्र सरकार प्लास्टिक बैन कर रही है। दूसरी तरफ आरे में बड़ी संख्या में हरे पड़ों की कटाई की जा रही है।

 

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