मुंबई / स्लम से निकले सनी पवार को न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में मिला सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का पुरस्कार

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 01:15 PM IST



सनी पवार सनी पवार
ऑस्कर में रेड कारपेट पर वाक कर चुके हैं सनी पवार। ऑस्कर में रेड कारपेट पर वाक कर चुके हैं सनी पवार।
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सनी पवारसनी पवार
ऑस्कर में रेड कारपेट पर वाक कर चुके हैं सनी पवार।ऑस्कर में रेड कारपेट पर वाक कर चुके हैं सनी पवार।

  • सनी ने दो साल पहले आई 'लायन' फिल्म में 'सारू' की भूमिका निभाई थी
  • सनी कभी अपने दो भाई-बहनों और माता-पिता के साथ एक छोटे से कमरे में रहते थे

मुंबई. यहां कलीना क्षेत्र की की स्लम बस्ती कुंची कूर्वे से निकलने वाले 11 साल के सनी पवार को 19वें न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सनी पवार को फिल्म 'चिप्पा' के लिए यह पुरस्कार दिया गया। सन्नी ने 2003 में ऑस्ट्रेलियाई निर्देशक गार्थ डेविस के साथ ऑस्ट्रेलिया में काम किया। 'चिप्पा' सफीर रहमान द्वारा लिखित और निर्देशित एक फिल्म है।

 

माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय

सनी ने कहा,"पुरस्कार प्राप्त करने के बाद मैं खुश हूं। इसके लिए पूरा श्रेय अपने माता-पिता को देना चाहूंगा।" सनी ने इसके साथ ही, बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों में काम करने की इच्छा भी जताई है।

 

एक बच्चे के बड़े सपने देखने की कहानी है 'चिप्पा' 

फिल्म चिप्पा एक बच्चे की आकांक्षाओं के बारे में है जो सड़कों पर रहता है, और जीवन में बड़े सपने देखता है। फिल्म एक प्रेमपूर्ण कहानी है और हर जगह बढ़ते बच्चों की भावना और समयबद्ध कहानियों पर है।

 

छोटे से कमरे में रहते हैं सनी 

सनी ने 3 साल पहले आई 'लायन' फिल्म में 'सारू' की भूमिका निभाई थी। ये फिल्म बेस्ट फिल्म, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर और बेस्ट सर्पोटिंग एक्ट्रेज के लिए 6 ऑस्कर नॉमिनेशन जीत चुकी है। सनी कभी अपने दो भाई-बहनों और माता-पिता के साथ एक छोटे से कमरे में रहते थे। सनी गर्वमेंट एयर इंडिया मॉडर्न स्कूल में पढ़ाई करते हैं।


झुग्गी से ऑस्कर तक का सफर
सनी का सपना था कि वे टीवी पर नजर आए। अक्सर वे अपनी मां को यह कहा भी करते थे। लेकिन सनी की मां वासु यही कहती थीं कि ‘वह एक अलग दुनिया है और वहां पहुंच पाना बहुत मुश्किल। इसी बीच एक दिन सनी के स्कूल में ‘लॉयन’ की कास्टिंग टीम पहुंचीं। टीम ने ऑडिशन के बाद सनी को फाइनल कर दिया। 

 

सच्ची घटना पर आधारित है लॉयन की कहानी

फिल्म लॉयन की कहानी सच्ची घटना पर आधारित है। यह कहानी एक बच्चे के मध्यप्रदेश के खंडवा से आस्ट्रेलिया पहुंचने की घटना पर बेस्ड है। 1988 में बच्चा बड़े भाई के साथ जा रहा था, उसी दौरान वह गलती से कोलकाता पहुंच जाता है। यहां लावारिस हालत में उसे भटकते देख एनजीओ ने उसे चाइल्ड केयर में रखा। जहां से उसे ऑस्ट्रेलिया के दंपति ने गोद लिया। 

 

अंग्रेजी नहीं, मराठी और हिंदी भाषा बोलते हैं 
8 वर्षीय सनी को इंग्लिश बोलना नहीं आती। वे हिंदी और मराठी भाषा में बोलते हैं। हॉलीवुड फिल्म में काम करने के वक्त उसने इंग्लिश के लिए एक ट्रांसलेटर का सहयोग लिया था।

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