मराठा आरक्षण / आरक्षण पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का फिलहाल इनकार, राज्य सरकार को जारी हुआ नोटिस



Supreme Court has refused to stay the Maratha quota order of Maharashtra Government.
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Supreme Court has refused to stay the Maratha quota order of Maharashtra Government.

  • एक एनजीओ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी
  • इस मामले में राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया गया है

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2019, 11:48 AM IST

दिल्ली/मुंबई. महाराष्ट्र में लागू मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार करते हुए याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इस मामले में राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया गया है। मामले में दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

 

याचिकाकर्ता की मांग

शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एक एनजीओ द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण को लेकर 50% की समयसीमा तय की थी। ऐसे में हाई कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ है।दरअसल, बाॅम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण पर मुहर लगा दी थी।

 

हाईकोर्ट ने आरक्षण की सीमा 12-13 प्रतिशत की है 

हाईकोर्ट ने सरकार के निर्णय पर मुहर लगाते हुए कहा था कि सरकार को एक अलग श्रेणी बनाकर सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े मराठों को इस प्रकार आरक्षण देने का अधिकार है, लेकिन न्यायमूर्ति द्वय रंजीत मोरे एवं भारती डांगरे की खंडपीठ ने सरकार द्वारा दी गई 16 फीसद की सीमा को कम करने का आदेश देते हुए इसे 12-13 फीसद पर लाने को कहा है।

 

राज्य सरकार ने दायर किया है कैविएट 

आपको बता दें कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी मराठा समुदाय को 12-13 फीसद आरक्षण देने की ही सिफारिश की थी। इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट अर्जी दायर की थी, जिसमें राज्य सरकार ने कहा था कि अगर हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कोई भी अपील आती है तो महाराष्ट्र सरकार का पक्ष सुने बिना शीर्ष अदालत कोई भी फैसला न लें।

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