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झुग्गियां दिखती गंदी हैं, पर वहां के लोग खुश रहते हैं, तीन हजार लोगों ने भर दिए उनके घरों में रंग

युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक झुग्गियों को रोशन करने के लिए ‘चल रंग दे’ से जुड़ रहे

Danik Bhaskar | Jun 11, 2018, 06:11 PM IST
Then and Now : 3000 हजार वालिटिंयर्स ने 4 झुग्गियों की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी। Then and Now : 3000 हजार वालिटिंयर्स ने 4 झुग्गियों की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी।

. अब तक 4 झुग्गियों के 12 हजार घरों को कैनवास में बदल चुकी है चल रंग दे...की टीम।

. हावर्ड से पढ़ाई करने वाले दैदीप्य रेड्डी चला रहे हैं यह संस्था।

मुंबई. मुंबई की झुग्गियों की बदसूरती खत्म करने और यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए ऑपरेशन ‘चल रंग दे’ चल रहा है। सैकड़ों युवा कूची और रंगों से झुग्गियों के घरों की तस्वीर बदल रहे हैं। यहां रह रहे बच्चों से लेकर बुजुर्गों को स्वच्छता के लिए जागरूक करते हैं। घर का कचरा झुग्गियों में लगे बीएमसी के डस्टबिन में ही डालने को कहते हैं। ये टीम अब तक 4 झुग्गियों के 12 हजार घरों को कैनवास में बदल चुकी है। बदसूरत दीवारों और छतों की जगह खूबसूरत म्यूरल पेंटिंग ने ले ली है। स्वेच्छा से आर्टिस्ट इस मुहिम से जुड़ रहे हैं। इस मुहिम को साल भर पहले देदीप्प रेड्‌डी ने ‘चल रंगे दे’ संस्था बनाकर शुरू किया था। दैदीप्य ने हॉर्वर्ड से पढ़ाई की है। अब डिजिटल मीडिया एजेंसी चला रही हैं।

इस बदलाव की कहानी को उन्हीं से ही जानते हैं...

- दैदीप्य रेड्‌डी ने कहा- हम चाहते हैं कि लोगों का स्लम को देखने का नजरिया बदले। जब आप स्लम कहते हैं तो जेहन में निगेटिविटी और गंदगी की तस्वीर बनती है। उसमें रहने वाले लोगों की भी ऐसी ही तस्वीर बनती है। लेकिन यह सही नहीं है। वास्तव में ये लोग गजब के हैं। वे खुश रहते हैं। हम चाहते हैं कि ‘चल रंग दे’ उनकी रियल्टी का आइना बने।

- पिछले साल पहाड़ी पर बसी असल्फा झुग्गी को इसी थीम पर रंगने का आइडिया आया और ‘चल रंग दे’ बन गया। सोशल मीडिया के जरिए करीब 750 वाॅलंटियर जुड़े। झुग्गी को बदलने में दिलचस्पी दिखाई। फंडिंग के लिए मुंबई मेट्रो समेत कई संगठन और लोग सामने आए। हम अपने आइडिया के साथ झुग्गी के लोगों से मिले।

- पहले तो वे उलझन में दिखे। फिर मान गए। टीम ने दीवारों और छतों पर म्यूरल पेंटिंग की। झुग्गी की छतें टीन की होती है। यह गर्मी में तपती है और बरसात में लीकेज से पानी टपकता है। इससे निजात दिलाने के लिए टीम छतों पर वाटरप्रूफिंग भी करती है। यह वाटरप्रूफिंग करीब 5 साल तक चलेगी।

- छतों पर पेंट से घर के अंदर का तापमान 3-5 डिग्री तक कम हो गया है। अब हमारी टीम ने खार की तीन झुग्गियों को बदलने का बीड़ा उठाया है। पिछले महीने इस मुहिम से करीब 3000 वॉलंटियर्स जुड़े हैं। इसमें बुजुर्ग भी हैं। ये समाज के लिए कुछ करने का माद्दा रखते हैं। लोग कूची और पेंट उठाते हैं।

- उन्हें महसूस होता है कि इससे वो दुनिया बदल सकते हैं। ये बदलाव दिखने भी लगा है। यहां के लोगों में भी और बाहर भी। पहले स्लम की बदसूरती की वजह से लोग देखना भी पसंद नहीं करते थे। अब लोग यहां की खूबसरती देखने आ रहे हैं।

- अब आप आसमान से मुंबई को देखेंगे तो आपको बिल्कुल नई मुंबई दिखेगी। अभी मानसून शुरू होने पर काम रोक दिया गया है और जैसे ही बारिश का सीजन खत्म होगा। टीम फिर अपने काम में जुट जाएगी। हम चाहते हैं देशभर में ‘चल रंग दे’ को पहुंचाएं।

12 हजार घरों में रंग भर दिए रंग। 12 हजार घरों में रंग भर दिए रंग।
पेंटिंग्स भी बनाई गई हैं। पेंटिंग्स भी बनाई गई हैं।
पेंटिंग्स भी बनाई गई हैं। पेंटिंग्स भी बनाई गई हैं।
इस मुहिम को साल भर पहले देदीप्प रेड्‌डी ने ‘चल रंगे दे’ संस्था बनाकर शुरू किया था। इस मुहिम को साल भर पहले देदीप्प रेड्‌डी ने ‘चल रंगे दे’ संस्था बनाकर शुरू किया था।
सोशल मीडिया के जरिए करीब 750 वाॅलंटियर जुड़े। सोशल मीडिया के जरिए करीब 750 वाॅलंटियर जुड़े।
फंडिंग के लिए मुंबई मेट्रो समेत कई संगठन और लोग सामने आए। फंडिंग के लिए मुंबई मेट्रो समेत कई संगठन और लोग सामने आए।

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