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शिक्षा के क्षेत्र में मुस्लिमों को 5% आरक्षण देने का कानून बनाने पर विचार कर रही है उद्धव सरकार: नवाब मलिक

8 महीने पहले
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  • अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने कहा- उद्धव सरकार प्राइवेट संस्थाओं में नौकरी के लिए कानून बनाने पर विचार कर रही है
  • ‘वे जल्द ही इस मामले में उचित निर्णय लेंगे, पिछली सरकार ने जानबूझ कर इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने का काम किया है’
  • भाजपा ने कहा- संविधान में धार्मिक आधार पर आरक्षण की इजाजत नहीं, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को पहले ही 10% आरक्षण

मुंबई. महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से पहले राज्य में मुस्लिमों को शिक्षा के क्षेत्र आरक्षण देने जा रही है। यह 5% हो सकता है। यह जानकारी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने शुक्रवार को विधानसभा में दी। दरअसल, मलिक राज्य में मुस्लिम आरक्षण की वर्तमान स्थिति पर पूछे सवाल का जवाब दे रहे थे।


उन्होंने कहा- निजी स्कूल-कॉलेजों में भी यह आरक्षण लागू करने के कानूनी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही उद्धव सरकार प्राइवेट संस्थाओं में नौकरी के लिए भी अध्यादेश लाकर कानून बनाने पर विचार कर रही है। वे जल्द ही इस मामले में उचित निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा- पिछली सरकार ने जानबूझ कर इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने का काम किया है।

हम हाईकोर्ट के आदेश को लागू करेंगे: मलिक
नवाब मलिक ने मुसलमानों को शिक्षण संस्थानों में कोटा देने को लेकर कहा, ''सरकारी शिक्षण संस्थानों में मुसलमानों को 5% आरक्षण देने के लिए उच्च न्यायालय ने अपना पक्ष रखा है। पिछली सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की थी, इसलिए हमने घोषणा की है कि हम जल्द से जल्द कानून के रूप में HC के आदेश को लागू करेंगे।''

कांग्रेस ने सरकार फैसले का स्वागत किया
कांग्रेस विधायक जिशान सिद्दीकी ने सरकार के इस फैसले को सही बताया है। उन्होंने कहा- इससे युवाओं के भीतर शिक्षा अच्छी मिल सकेगी। आगे रोजगार के अवसर भी सही तरीके से मिल सकेंगे। वहीं, बीजेपी के राम कदम ने कहा- धर्म के नाम पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। यह ऐलान सिर्फ महाविकास आघाड़ी का राजनीतिक स्टंट है।

धर्म के आधार पर संविधान में आरक्षण नहीं: फडणवीस
पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा-संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है। शिवसेना स्पष्ट करे कि क्या वह संविधान के खिलाफ जाकर इसे मंजूरी देगी। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा, मुस्लिमों को आरक्षण असांविधानिक है और इसका असर ओबीसी एवं मराठा आरक्षण पर होगा। शिवेसना को इस पर जवाब देना चाहिए। उसे बताना होगा कि शिवसेना ने सत्ता हासिल करने के लिए अपनी विचारधारा के साथ साथ और किस-किस चीज का समझौता किया है। 

धर्म के आधार पर आरक्षण की इजाजत नहीं: भाजपा
महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा- संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की इजाजत नहीं देता। प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10% आरक्षण का प्रावधान किया है। मुस्लिम और दूसरे वर्गों को इसके तहत आरक्षण दिया जा सकता है। उन्होंने इसको लेकर शिवसेना पर भी तंज कसते हुए कहा- हम शिवसेना से पूछना चाहते हैं कि सरकार बनाने के लिए उन्होंने किस आधार पर अपनी विचारधारा से समझौता किया।

शिवसेना की सफाई- यह सामूहिक फैसला
इस बीच, शिवसेना का रुख स्पष्ट करने के लिए मंत्री अनिल परब सामने आए। उन्होंने कहा- जो भी फैसला लिया गया है और मुस्लिम आरक्षण के संदर्भ में जो भी घोषणा की गई है, वह महाविकास अघाड़ी का फैसला है और उसमें शिवसेना साथ में है। 2018 में महाराष्ट्र विधानसभा में चर्चा के दौरान शिवसेना ने मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण दिए जाने की वकालत की थी। बता दें कि 2014 में मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण और मराठों को 16 फीसदी आरक्षण की घोषणा की थी। हालांकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए सिर्फ शिक्षा में मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण जारी रखा।

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