महाराष्ट्र / विपक्ष के हंगामे के साथ उद्धव सरकार का पहला बजट सत्र शुरू, पहली किश्त में 9 हजार किसानों के कर्ज होंगे माफ

विधानसभा भवन की सीढ़ियों पर हंगामा करते भाजपा विधायक। विधानसभा भवन की सीढ़ियों पर हंगामा करते भाजपा विधायक।
प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
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विधानसभा भवन की सीढ़ियों पर हंगामा करते भाजपा विधायक।विधानसभा भवन की सीढ़ियों पर हंगामा करते भाजपा विधायक।
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  • उद्धव सरकार की पारंपरिक चाय पार्टी का विपक्ष (भाजपा) ने बहिष्कार किया है
  • मुख्यमंत्री ने सरकार में शामिल तीनों दलों के बीच मतभेद की बात को खारिज किया

दैनिक भास्कर

Feb 24, 2020, 04:17 PM IST

मुंबई. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की नेतृत्व वाली सरकार का पहला बजट सत्र सोमवार को हंगामे के साथ शुरू हुआ। विपक्ष (भाजपा) के नेताओं ने महिला सुरक्षा, किसान कर्जमाफी और पिछली सरकार की ओर से लिए गए फैसलों को रद्द करने जैसे तमाम मुद्दों को लेकर विधानसभा के बाहर जमकर हंगामा किया। भाजपा विधायक हाथों में तख्तियां लेकर विधानसभा की सीढ़ियों पर बैठे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यह सत्र 20 मार्च तक जारी रहेगा। 

बजट सत्र से पहले रविवार को सरकार की ओर से आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी का विपक्ष (भाजपा) ने बहिष्कार किया है। सत्र के पहले दिन सरकार किसानों को कर्जमाफी का लाभ देना शुरू कर देगी।  बजट सत्र की पूर्व संध्या पर मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री उद्ध‌व ठाकरे ने यह ऐलान किया। राज्य कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक कर किसानों के कर्जमाफी की पहली लिस्ट जाहीर की।  पहली लिस्ट में 9 हजार किसानों का नाम। किसानों के इस लिस्ट में 10 हजारे रुपये से लेकर ढाई लाख तक की कर्ज की रकम को माफ किया गया है।  बजट सत्र में कुल 6 अध्यादेश और 13 विधेयक पेश किए जाने हैं। 

पहले चरण में हर जिले के 2 गांव को लाभ मिलेगा 
रविवार रात को सह्याद्री गेस्ट हाउस में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री उद्ध‌व ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा- ‘महात्मा ज्योतिराव फुले किसान कर्जमुक्ति योजना का प्रत्यक्ष लाभ 24 फरवरी से किसानों को मिलना शुरू हो जाएगा। पहले चरण में हर जिले से 2 गांवों यानी 68 गांवों के पात्र किसान लाभार्थियों की लिस्ट 24 फरवरी को जारी की जाएगी। इसके बाद 28 फरवरी से लिस्टें जारी की जाएंगी। अप्रैल के अंत तक सभी किसानों को कर्ज माफी का लाभ दे दिया जाएगा।’

विपक्ष ने चाय पार्टी का बहिष्कार किया तो सीएम बोले- स्थिर सरकार वह पचा नहीं पा रहे
भाजपा और उसके मित्र दलों ने बजट सत्र की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री की चाय पार्टी का बहिष्कार किया। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि चाय का निमंत्रण बेहतर संवाद के लिए है, लेकिन शिवसेना, कांग्रेस और राकांपा को पहले आपसी संवाद सुधारने की आवश्यकता है। इधर, मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा कि विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देना मैं यहां जरूरी नहीं समझता, क्योंकि सिर्फ आरोप लगाने से कोई भी अच्छा विपक्ष साबित नहीं होता। विपक्ष को अपनी भूमिका का सही तरह से निभाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष किया कि उनकी सरकार दिन गिनने वाली सरकार नहीं है, एक स्थिर सरकार है और यही बात विपक्ष को पच नहीं रही है।

सीएए और एनपीआर को लेकर महाविकास आघाडी में मतभेद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के सीएए और एनपीआर के समर्थन के बाद महाविकास आघाड़ी के घटक दलों के बीच मतभेद और मनमुटाव बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। अधिवेशन के दौरान महा विकास आघाड़ी के घटक दलों के बीच मतभेद को बढ़ाना भाजपा की रणनीति होगी। सत्ताधारी दल ने भाजपा को घेरने के लिए उसके कार्यकाल (मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यकाल) के दौरान की गई जांच रिपोर्ट का खुलासा अधिवेशन के दौरान करने की तैयारी में है। यह जांच रिपोर्ट भाजपा नेता एकनाथ खडसे, प्रकाश मेहता, पंकजा मुंडे व सुभाष देशमुख के खिलाफ की गई जांच से संबंधित होगी।

सरकार में कोई मतभेद नहीं: उद्धव ठाकरे
मुख्यमंत्री ने सरकार में शामिल तीनों घटकों में मतभेद की बात को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से एल्गार परिषद का मामला हमने केंद्र को नहीं दिया है। केंद्र ने हमसे छीन कर हमारी पुलिस पर अविश्वास दिखाया है। इस पर हमारी नाराजी अभी भी बरकरार है। सीएए और एनपीआर पर कांग्रेस से चर्चा करने के बाद ही सरकार ने अपनी भूमिका तय की है। जहां तक सवाल एनपीआर में पूछे जाने वाले प्रश्नों को है, इस बारे में तीनों पार्टियों की एक समिति बनाई जाएगी।

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