यवतमाल-वाशिम / 4 बार की सांसद भावना गवली पर भाजपा-सेना ने फिर जताया भरोसा, माणिकराव से है मुकाबला



साल 2014 की मोदी लहर में इस सीट पर फिर एक बार भावना ने अपना कब्जा जमाया था-फाइल साल 2014 की मोदी लहर में इस सीट पर फिर एक बार भावना ने अपना कब्जा जमाया था-फाइल
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साल 2014 की मोदी लहर में इस सीट पर फिर एक बार भावना ने अपना कब्जा जमाया था-फाइलसाल 2014 की मोदी लहर में इस सीट पर फिर एक बार भावना ने अपना कब्जा जमाया था-फाइल

  • यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट दो जिलों की 6 विधानसभा सीटों से मिलकर बनी है
  • महाराष्ट्र की यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट पर शिवसेना-भाजपा का मुकाबला कांग्रेस-एनसीपी के माणिकराव से है 

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 02:34 PM IST

यवतमाल-वाशिम. महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित यवतमाल जिला अमरावती मंडल के अंतर्गत आता है। ये महाराष्ट्र में कपास उत्पादन का बड़ा केंद्र है। आदिवासी बहुल इलाका है। इस संसदीय क्षेत्र में 6 विधानसभाएं हैं। परिसीमन के बाद यवतमाल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र तीन हिस्सों में बंट गया जिसमें एक हिस्सा वाशिम जिले से जुड़ा, दूसरा चंद्रपुर जिले से तो तीसरा मराठवाड़ा के हिंगोली जिले में शामिल हुआ। इसके बाद साल 2009 में यहां चुनाव हुए जिसमें शिवसेना की भावना गवली को विजय मिली और वो लगातार दो बार से इस सीट पर निर्वाचित हुई हैं।

 

साल 2014 का चुनावी गणित

यवतमाल-वाशिम सीट से मौजूदा सांसद शिवसेना की भावना गवली ने साल 2014 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के प्रत्याशी शिवाजी राव मोघे से 938,16 वोटों से हराकर अपने नाम की थी। गवली को 4,77,905 वोट मिले थे तो वहीं मोघे को 384,089 वोटों पर संतोष करना पड़ा था।

 

12 प्रतिशत बौद्ध मतदाता

यवतमाल जिले में 69 प्रतिशत लोग हिंदू धर्म में, 14 प्रतिशत इस्लाम धर्म में और 12 प्रतिशत लोग बौंद्ध धर्म में भरोसा करते हैं। यहां की कुल आबादी 23,95,147 है, जिसमें से 74 प्रतिशत लोग गांवों में और 25 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं। 

 

4 बार सांसद रह चुकी हैं भावना

भावना गवली विदर्भ की एकमात्र महिला सांसद हैं और लगातार 4 बार चुनाव जीत चुकी हैं। दो बार वाशिम लोस निर्वाचन क्षेत्र से तो 2 बार वाशिम-यवतमाल निर्वाचन क्षेत्र से। गवली ने परिसीमन के बाद वाशिम निर्वाचन क्षेत्र से यवतमाल जुड़ जाने के बावजूद वर्ष 2009, 2014 मेंं हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दमदार प्रत्याशियों को पराजित किया।

 

कांग्रेस का गढ़ रही है यवतमाल लोकसभा सीट 

यवतमाल सीट का इतिहास देखा जाए तो यह कभी कांग्रेस का गढ़ रही है। साल 1952 में यवतमाल सीट से पहले सांसद रहे सहदेव भारती। उनके बाद 1957 में डी.वाई.गोहोकार (कांग्रेस), 1962-1967 में देवराव पाटिल (कांग्रेस), 1971 में सदाशिव ठाकरे (कांग्रेस), 1977 में श्रीधरराव जावड़े चुनाव जीते। इसके बाद उत्तमदादा पाटिल (1980 से 1991) तक कांग्रेस की टिकट पर लगातार जीतकर लोकसभा पहुंचे।

 

ऐसे हुई भाजपा की एंट्री

यवतमाल पर सबसे पहले भाजपा की जीत राजाभाऊ ठाकरे ने दिलवाई। वो 1996 में चुनकर आए। लेकिन, अगले ही चुनाव में दोबारा 1998-1999 में उत्तमदादा पाटिल ने जीत दर्ज की। फिर 2004 में यहां हरिसिंह राठौड़ ने कांग्रेस को वापस जीत दिलाई।

 

वाशिम लोकसभा इतिहास

यहां 1977 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ। वसंतराव नाईक कांग्रेस की टिकट पर सांसद बने। उनके बाद 1980 और 1984 में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, 1989-1991 में कांग्रेस के देशमुख अनंत राव, 1996 में पुंडलिकर राव शिवसेना से, 1998 में कांग्रेस के सुधाकर राव नाईक, फिर 1999 और 2004 में शिवसेना की टिकट पर भावना गवली चुनाव जीती। 

 

6 विधानसभाओं से मिलकर बनी यह लोकसभा 

यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट दो जिलों की 6 विधानसभा सीटों से मिलकर बनी है। इनमें यवतमाल, वाशिम, कारंजा, रालेगांव, दिग्रस और पुसद शामिल है। इसमें 4 सीटों पर बीजेपी, जबकि दिग्रस में शिवसेना, पुसद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का कब्जा है।

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