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फिर गूंजी मराठा रिजर्वेशन की मांग का मुद्दा, 11 फरवरी से हो सकता है आंदोलन

राज्यभर में 58 जगहों पर निकाले गए मराठा समाज के मोर्चे ने देशभर में चर्चा बटोरी थी।

Danik Bhaskar | Dec 28, 2017, 07:19 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

मुंबई. मराठा संगठनों ने एक बार फिर राज्य सरकार को चेतावनी दी है। कहा है कि, यदि मराठा आरक्षण सहित अन्य मांगें पूरी नहीं की गईं तो 11 फरवरी के बाद फिर से आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए आगामी 11 फरवरी को जलगांव में बैठक बुलाई गई है। पनवेल, रायगढ़ व नवी मुंबई जिला समिती की ओर से आयोजित बैठक में तय हुआ है कि मराठा समाज की मांगों को लेकर राज्य सरकार क्या कदम उठा रही है, इसकी समीक्षा के बाद आंदोलन की रुपरेखा तय की जाएगी।

- मराठा क्रांति मोर्चा के राज्य समन्वयक संजीव भोर ने कहा- हम 19 फरवरी के बाद आंदोलन की समीक्षा कर आगे की रणनीति तैयार करेंगे।

- उन्होंने कहा कि बीते 9 अगस्त को मुंबई में निकाले गए मराठा मोर्चा के बाद सरकार ने जो वादे किए थे, वह पूरे नहीं हुए। इससे मराठा समाज में असंतोष है। अभी तक 75 फीसदी वादे पूरे नहीं हो सके हैं। भोर ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार शिवाजी जयंती (19 फरवरी) से पहले 11 फरवरी तक हमारी मांगे पूरी कर दे।

58 जगहों पर निकला था मोर्चा

- गौरतलब है कि राज्यभर में 58 जगहों पर निकाले गए मराठा समाज के मोर्चे ने देशभर में चर्चा बटोरी थी। कोपर्डी में मराठा समाज की नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म व हत्या के बाद मराठा समाज का गुस्सा फूटा था। हालांकि मराठा समाज द्वारा निकाले गए मोर्चों में भारी भीड़ जुटने के बावजूद कोई अनुशासनहीनता नहीं हुई।

- राज्य की पिछली आघाड़ी सरकार ने मराठा समाज को 16 फीसदी आरक्षण दिया था, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है।


सीएम ने दिया था आश्वासन

- इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रामगिरी में मोर्चे के प्रतिनिधियों से तकरीबन पौन घंटे चर्चा की थी। इस दौरान सीएम ने कहा था कि, प्रशासन और सरकार मिलकर मराठा आरक्षण मसले का हल निकाला जाएगा। इस मुद्दे पर कोपर्डी कांड की युवती के पिता ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था।

- इस दौरान पुणे के मराठा नेता आबा पाटील भी मौजूद थे। जिन्होंने बताया था कि मुख्यमंत्री ने हमारी मांगों को विस्तारपूर्वक एक-एक कर सुना। मराठा आरक्षण के मसले को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासनिक और राजनीतिक सदस्यों के साझा उपस्थिति में काम करने का आश्वासन दिया। साथ ही अन्य मांगों को भी मान्य कर जल्द उस दिशा में निर्णय लेने के बारे में कहा था।