Hindi News »Maharashtra »Nagpur» मोमबत्ती उद्योग के नाम पर व्यवसाय शुरू करने वाले प्रशिक बंसोड की ठगी की कहानी

एक और बंटी-बबली की करतूत उजागर, इंवेस्टर्स के लाखों रुपए लेकर दाेनों फरार

पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रशिक बंसोड ने अनिरुद्ध इंटर प्राइजेस के नाम पर मुख्यनायक नाम से कंपनी शुरू की। इसके सर्वेसर्वा प्रशिक और नेहा थे।

Bhaskar News | Last Modified - Jun 28, 2016, 08:41 AM IST

  • नागपुर.मोमबत्ती उद्योग के नाम पर व्यवसाय शुरू करने वाले प्रशिक बंसोड की ठगी की कहानी हैरान कर देने वाली है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रशिक बंसोड ने अनिरुद्ध इंटर प्राइजेस के नाम पर मुख्यनायक नाम से कंपनी शुरू की। इसके सर्वेसर्वा प्रशिक और नेहा थे। यह कंपनी सीताबर्डी में लैंड मार्क इमारत की पांचवीं मंजिल पर शुरू की गई। कंपनी में सबसे पहले मोमबत्ती का व्यवसाय शुरू किया।
    - दिसंबर 2015 से अप्रैल 2016 के दरमियान नागरिकों को कंपनी कच्चा माल देकर उनसे मोमबत्ती बनवाकर लेती थी।
    - कंपनी मोमबत्ती का कच्चा माल देते समय लालच दिया करती थी, मोमबत्ती बनने पर वह महंगे दाम पर खरीदेगी। प्रशिक के झांसे में कुछ लोग आ गए।
    - उन्होंने उसके साथ व्यवसाय शुरू कर दिया। उस समय प्रशिक बंसोड 400 से 500 किलो एक निवेशक को मोमबत्ती का कच्चा माल देता था।
    - शुरूआत में कंपनी का सदस्य बनाने के लिए 2 हजार रुपए लिया जाता था। मोमबत्ती बनाने का व्यवसाय शुरू करने वालों से 20 हजार रुपए लिया जाता था।
    - शुरूआत में निवेशकों का विश्वास हासिल करने के लिए प्रशिक ने निवेशकों से मोमबत्तियां जमकर खरीदी। इससे निवेशकों को लगने लगा कि मोमबत्ती के व्यवसाय में अच्छी कमाई है।
    - निवेशकों ने कंपनी में लाखों रुपए निवेश कर दिया। आरोपी प्रशिक ने शहर में 24 फ्रेंचाइजी शुरू किया। निवेशकों ने लाखों रुपए का चेक दिया।
    - इस तरह प्रशिक और नेहा करीब 23 लाख 72 हजार रुपए की चपत लगाकर फरार हो गए। कंपनी के बाकी कर्मचारियों का कुछ पता नहीं है। सभी के मोबाइल बंद हो गए हैं।
    - जब कुछ निवेशकों को यह लगा कि उनके साथ धोखाधड़ी हो गई, तब करीब 25 निवेशक सीताबर्डी थाने पहुंचे और लिखित शिकायत की। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
    कहता था कि पुणे में है कारखाना
    आरोपी प्रशिक बंसोड़ निवेशकों को यही बताता था कि पुणे में उसका कारखाना है। उसके झांसे मेंे आकर देवीदास भेंडे और उनकी पत्नी ने लैंडमार्क के पांचवीं मंजिल पर एसएएस बिजनेस सेंटर में प्रशिक की कंपनी में दिसंबर 2015 में गए।
    उस समय वहां पर एक महिला व दो पुरुष थे। उन्होंने मोमबत्ती के व्यवसाय के बारे में बताया। देवीदास भेंडे ने अपना परिचय दिया और उनका नाम पूछा। उन्होंने कहा कि वे कंपनी के मालिक हैं। उस समय उन तीनों ने बताया कि पुणे में औद्योगिक मोमबत्ती बनाने का कारखाना है।
    कंपनी से जुड़ने के लिए करार करना पड़ता है। इसके लिए 2000 रुपए का शुल्क लगेगा। आरोपियों ने भेंडे दंपति को फ्रेंचाइजी के लिए 20 हजार जमा करने की बात बताई। उन तीनाें ने भेंडे दंपति से कहा कि हम मोमबत्ती बनाने के लिए जो सामग्री देंगे, वह 230 रुपए प्रति किलो में देंगे।
    भेंडे दंपति ने प्रशिक की कंपनी के साथ करारनामा कर नोटरी किया। उसके बाद भेंडे दंपति ने मोमबत्ती बनाने का कार्य शुरू किया। आरोपियों ने मोमबत्ती बनाकर देने के बदले में 52 हजार रुपए देने को कहा। आरोपियों ने रकम नहीं दी। उन्हें 3 लाख 17 हजार रुपए की चपत लगा दी।
    जब भेंडे दंपति ने उन्हें फोन किया तो उन्होंने टालमटोल जबाब दिया। जब भेंडे दंपति कंपनी के कार्यालय में गए तब पता चला कि कंपनी को ताला लगा है।
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Web Title: मोमबत्ती उद्योग के नाम पर व्यवसाय शुरू करने वाले प्रशिक बंसोड की ठगी की कहानी
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