Hindi News »Maharashtra »Nagpur» गोंड जनजाति की नई पीढ़ी अब खुलकर राम की जगह रावण का नाम लिख रही है

'राम’ की जगह इस जाति की नई पीढ़ी लिख रही ‘रावण’ का नाम, मानते हैं इष्ट देवता

रावण का मातृ पक्ष अनार्य था, इसलिए आदिवासी समुदाय उसे अपना देवता मानते हैं। इन क्षेत्रों में दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है।

Bhaskar News | Last Modified - Oct 11, 2016, 06:38 AM IST

  • नागपुर.सामान्यत: लोग अपने नाम के साथ राम का नाम जोड़ते हैं। मगर नागपुर, अमरावती, यवतमाल जैसे कुछ जिलों में गोंड जनजाति की नई पीढ़ी अब खुलकर राम की जगह रावण का नाम लिख रही है। दरअसल, रावण का मातृ पक्ष अनार्य था, इसलिए आदिवासी समुदाय उसे अपना देवता मानते हैं। इन क्षेत्रों में दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है, रैलियां निकाली जाती हैं।
    इस नई पीढ़ी इसी अस्था को ध्यान में रखकर अपने नाम के साथ रावण का नाम जोड़ने से परहेज नहीं करती। उनका मानना है कि हम जिसकी पूजा करते हैं, उसका नाम अपने नाम के साथ जोड़ने में हिचकिचाहट कैसी? इस परंपरा को निभाने वाले नागपुर जिले के ही आदिवासी बहुल तहसील रामटेक के सीतापुर गांव के एक युवक का नाम लंकेश उइके है।
    इसी तरह नागपुर जिले के ही जबलपुर मार्ग स्थित पालोरा गांव में रावण कुमरे नाम का एक व्यक्ति है। स्वयं गोंड समाज के विद्वान और पथप्रदर्शक मोतीराम कंगाली ने अपने नाम में बदलाव लाकर मोतीरावण कंगाली नाम कर लिया।

    इतिहास जानने के बाद लगा रहे रावण का नाम
    गोंड समुदाय के युवाओं ने अपने यहां रावण की पूजा होते देख, इसके इतिहास को समझा और जब उन्हें लगा कि अब बदलाव की भी जरूरत है। इसलिए उन्होंने अपने नाम के साथ रावण का नाम जोड़ना शुरू कर दिया, जबकि पुरानी पीढ़ी पूजा तो जरूर रावण की करती थी, मगर नाम में जोड़ने से बचते थे।
    यहां तक कि इस समुदाय में जिनके नाम के साथ पहले से राम लिखा था, उन्होंने भी अब बदलकर रावण कर लिया है। आदिवासी समाज में रावण पूजा के प्रति हीन भावना को कम करने और उनकी पूजा को व्यापक और सर्वमान्य रूप प्रदान करने के िलए अब बड़े स्तर पर गांवों में रैलियों का भी आयोजन कर रहे हैं।

    आैर अपना नाम श्रीरावण उइके कर लिया
    गोंडी समाज के पुजारी को ‘भुमका’ कहा जाता है। नागपुर निवासी भुमका श्रीराम उइके बताते हैं कि उनका नाम सर्टिफिकेट में भले ही श्रीराम हो लेकिन अब वे श्रीरावण के नाम का इस्तेमाल करते हैं। श्रीरावण ही कहलाना पसंद करते हैं। वे बताते हैं कि रावण ही नहीं अब आदिवासी समाज, विशेष तौर से गोंडी समाज में लंकेश नाम भी बड़े पैमाने पर रखे जा रहे हैं।
    कई तो सीधे अपने बच्चों के नाम रावण के नाम पर ही रख रहे हैं। गोंडी समाज में रावण को ‘पुनेम’ अर्थात सत्यमार्गी माना जाता है। यही वजह है कि रावण समुदाय विशेष के िलए प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रतीक है। गोंड समाज में आज भी दशहरा ही नहीं, बल्कि होली के दिन भी रावण के पुत्र ‘मेघनाद’ की पूजा की जाती है। मानसून लगने पर ‘मंदोदरी’ माता की पूजा होती है।

    निकलती है रैली
    नागपुर-जबलपुर मार्ग में मनसर से 18 किलोमीटर दूर है बोथरा - पालोरा नाम के दो गांव जहां बीते 20 वर्षों से रावण की रैली निकाली जा रही है। बोथरा और पालोरा गांव के बीच निकाली जाने वाली रैली का आयोजन गांव के ही रावण पूजा उत्सव समिति द्वारा की जाती है।
    समिति पदाधिकारी हरिदास उइके बताते हैं कि भगवान रावण के प्रति लोगों में जागृति लाने के लिए यह रैली निकाली जाती है। इसके माध्यम से झांकी, रावण की सेना रावण की प्रतिमा आदि दर्शाए जाते हैं।
    आदिवासियों में मातृपक्ष सर्वोपरि
    आदिवासियों में वंश परंपरा मातृसत्तात्मक होती है। रावण की माता कैकसी जिसे निकशा या केशनी के नाम से भी जाना जाता है, वह रावण के नाना सुमाली और मेरुमति की पुत्री थीं। यही वजह है कि मातृसत्तात्मक पद्धति होने से रावण को आदिवासी कुल का माना जाता है।

    रावण का सरनेम ‘मड़ावी’ था
    प्राध्यापक मधुकर उइके कहते हैं कि वाल्मीकि द्वारा लिखे गए रामायण में तकरीबन 1200 श्लोक थे। इसमें रावण को कभी नीचा कर के नहीं दिखाया गया, लेकिन वर्तमान के रामायण में कई अध्याय बाद में जोड़े गए। नए रामायण में 2400 श्लोकों का उल्लेख मिलता है। आदिवासी मान्यताओं के अनुसार रावण का सरनेम ‘मड़ावी’ था।
    उसकी पूजा को ‘रावनेर’ पूजा कहा जाता है। आदिवासी में केवल गोंड ही नहीं, बल्कि माड़िया गोंड, कोरकू गोंड आदि भी रावण की पूजा करते हैं। नागपुर के गोंडवाना विकास मंडल में भी रावण की इन दिनों भव्य पूजा दशहरे के दिन की जाती है।
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Nagpur News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: गोंड जनजाति की नई पीढ़ी अब खुलकर राम की जगह रावण का नाम लिख रही है
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Nagpur

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×