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इंजीनियरिंग के दो छात्रों ने शुरू की ये अनोखी कोशिश, आज 6 एयरलाइंस हैं पार्टनर

सैनिकों और उनके परिवार का सफर आसान करने की वरुण और रवि की कोशिश- 'उड़ चलो'

Dainik Bhaskar

Mar 12, 2018, 07:13 PM IST
'उड़ चलो' के सीईओ वरुण जैन (दाएं) और सीओओ रवि कुमार। 'उड़ चलो' के सीईओ वरुण जैन (दाएं) और सीओओ रवि कुमार।

पुणे. सोल्जर्स व उनकी फैमिली को कहीं आने-जाने में परेशानी न हो, इसलिए पुणे के वरुण जैन और रवि कुमार ने अनोखी कोशिश जारी रखी है। ये कोशिश है- 'उड़ चलो'। यह एक ऑर्गेनाइजेशन है, जिसे वरुण और रवि मिलकर चलाते हैं। ऑर्गेनाइजेशन आर्मी, नेवी, एयरफोर्स, अर्धसैनिक बलों, उनके आश्रितों और वीर नारी को हवाई सफर के लिए रियायती दर पर टिकट मुहैया कराने का काम करता है। साथ ही रिटायर हो चुके सर्विसमैन, उनके डिपेंडेंट और वीर नारी के री-इम्प्लायमेंट के लिए भी काम करता है। 6 साल पहले शुरू की 'उड़ चलो', अब रोजाना 2500 बुकिंग...

- वरुण जैन और रवि कुमार आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएट हैं। 2012 से दोनों ये प्रयास करते आ रहे हैं।
- उनका कहना है, 'प्लेन में भी ट्रेन जैसी दरों पर ही टिकट उपलब्ध होते हैं, लेकिन लोगों को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती।'
- 'उड़ चलो' के रवि (सीओओ) और वरुण (सीईओ) बताते हैं कि 'आर्म फोर्स बैकग्राउंड के लोगों को अब तक एलटीसी क्लेम के तहत थर्ड या सेकंड एसी की ट्रेन टिकट मिलती थी।'
- 'नए नियम के तहत अगर वे हवाई सफर करना चाहें, तो उन्हें कॉम्पेनसेशन मिल सकता है। वह भी थर्ड या सेकंड एसी की दर पर।'
- 'तो अब एयर ट्रैवेल का टिकट भी उनके लिए मुमकिन है। यही बात हम लोगों तक पहुंचाते हैं। हमारी रोज की बुकिंग करीब 2,500 है।'
- 'उड़ चलो' अब तक 70 से अधिक लोगों को नौकरी दिला चुका है।

6 एयरलाइंस हैं पार्टनर
- बता दें कि 'उड़ चलो' को कोई सब्सिडी नहीं मिलती है।
- जब रवि और वरुण ने सैन्य पृष्ठभूमि के लोगों को रियायती दर पर एयर टिकट देने की योजना शुरू की, तो इस बारे में कुछ एयरलाइंस से बात की।
- जब एयरलाइंस को पता चला कि ये दोनों सैनिकों के लिए काम कर रहे हैं, तो उनकी जो टिकट नहीं बिक पाती थी, वो कम दर पर वरुण और रवि को देनी शुरू कर दी।
- इन टिकटों को सैनिकों तक पहुंचाने से उड़ चलो की शुरुआत हुई। वरुण-रवि बताते हैं कि अब 6 एयरलाइंस हमारे पार्टनर हैं।

रिहैब सेंटर भी चलाता है 'उड़ चलो'
- एक कस्टमर केयर सेंटर पुणे के खिड़की स्थित पैराप्लेजिक रिहैबिलिटेशन सेंटर में स्थापित किया है।
- गर्दन के नीचे जो लोग पैरालाइज हो जाते हैं, उन्हें पैराप्लेजिक कहा जाता है।
- यहां भी 'उड़ चलो' ने ऐसे 7 पूर्व सैनिकों को नौकरी दी है।
- ये लोग दो शिफ्ट में कस्टमर केयर सेंटर में काम करते हैं।

'उड़ चलो' टीम 'उड़ चलो' टीम
'उड़ चलो' टीम 'उड़ चलो' टीम
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'उड़ चलो' के सीईओ वरुण जैन (दाएं) और सीओओ रवि कुमार।'उड़ चलो' के सीईओ वरुण जैन (दाएं) और सीओओ रवि कुमार।
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