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खुलेआम धमकियां देते थे बाल ठाकरे, 10 पॉइंट्स में जाने उनकी पूरी लाइफ

बाला साहब के देहांत के बाद उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए 21 तोपों की सलामी दी गई थी।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 17, 2017, 09:08 AM IST

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    दरबार में खुलेआम चेतावनी देते थे बाला साहब।

    मुंबई.आज शिवसेना संस्थापक बाला साहब यानी बाल ठाकरे की पुण्यतिथि है। शिवसेना प्रमुख बाला साहब एक अलग ही तरह की राजनीतिक लाइन को लेकर आगे बढ़े। उनका खुलेआम किसी को भी धमकी देने का अंदाज और उसके बाद उपजे हालात को देश के गौरव से जोड़ देने की बात हमेशा से चर्चा में रही हैं। बाला साहब हमेशा चांदी के सिंहासन पर बैठते थे और उनके कट्टर विरोधी भी समय-समय पर उनके दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते थे। बाला साहब के लिए कहा जाता है कि उनके शब्द ही कानून होते थे। उनके एक इशारे पर पूरी मुंबई थम जाती थी। 10 पॉइंट्स में जानिए उनकी पूरी लाइफ...


    1. कार्टूनिस्ट के तौर पर शुरू किया करियर
    - राजनीति में बेहद लोकप्रिय और दिग्गज माने जाने वाले इस नेता ने अपने कैरियर की शुरुआत एक कार्टूनिस्ट के तौर पर की थी। 'द फ्री प्रेस जर्नल' वह अखबार था जिसमें उन्होंने सबसे पहले काम किया।
    - हालांकि, 60 के दशक में उनके कार्टून 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' के संडे एडिशन में भी छपे। 1960 में उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी और अपना खुद का कार्टून वीकली 'मार्मिक' शुरू किया।

    2. पिता के नक्शे-कदम पर शुरू की राजनीति
    - बाल ठाकरे की राजनीतिक विचारधारा उनके पिता केशव सीताराम ठाकरे से काफी प्रभावित थी।
    - भाषा के आधार पर महाराष्ट्र को एक अलग राज्य बनाने वाले आन्दोलन 'संयुक्त महाराष्ट्र मूवमेंट' के अग्रणी नेता केशव सीताराम ठाकरे बेहद लोकप्रिय नेता थे।
    - उन्होंने महाराष्ट्र में गुजरातियों, मारवाड़ियों और उत्तर भारतीयों के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ जमकर आन्दोलन चलाया। 1966 में बाल ठाकरे ने 'शिवसेना' के नाम से राजनीतिक दल का गठन किया।
    - अपनी विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 1989 में 'सामना' नामक अखबार की शुरुआत की।

    3. सत्ता से बाहर रहकर चलाई सरकार
    - 1995 के चुनाव के बाद शिवसेना-भाजपा गठबंधन पहली बार सत्ता में आई। इस दौरान (1995-1999) बाला साहब ने सरकार में न रहते हुए भी उसके सभी फैसलों को प्रभावित किया। यही कारण था कि उन्हें रिमोट कंट्रोल तक का नाम दिया गया।
    - वे अक्सर खुद बड़ी जिम्मेदारी लेने की बजाय किंग मेकर बनना ज्यादा पसंद करते थे। कुछ के लिए महाराष्ट्र का यह शेर अपने आप में एक सांस्कृतिक आदर्श था।

    4. एक साल में मिले दो बड़े सदमें
    - 1996 में बाल ठाकरे को दो बड़े सदमों से गुजरना पड़ा। 20 अप्रैल 1996 को उनके पुत्र बिंदु माधव की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई जबकि, इसी साल सितम्बर में उनकी पत्नी मीना का हार्ट अटैक के बाद निधन हो गया।

    5. वोट डालने पर लगा प्रतिबंध
    - नफरत और डर की राजनीति करने के कारण चुनाव आयोग ने बाल ठाकरे के वोट डालने और चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
    - चुनाव आयोग ने 28 जुलाई 1999 को ठाकरे को 6 साल तक चुनावों से दूर रहने के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बाद ठाकरे 2005 में ही प्रतिबंध हटने के बाद वोट डाल सके।

    6. गैर-मराठियों के खिलाफ कई आंदोलन किए
    - बाल ठाकरे ने बाहर से आकर मुंबई बसने वाले लोगों पर कटाक्ष करते हुए महाराष्ट्र को सिर्फ मराठियों का कहकर संबोधित किया। खासतौर पर दक्षिण भारतीय लोगों के विरोध में उन्होंने कई भद्दे नारे भी दिए।

    7. अल्पसंख्यक विरोधी छवि बनाई
    - महाराष्ट्र को एक हिंदू राज्य बताते हुए और मुसलमानों के खिलाफ टिप्पणी करते हुए बाल ठाकरे ने मुंबई आने वाले मुसलमानों विशेषकर बांग्लादेश से आने वाले मुस्लिम शरणार्थियों को वहां से चले जाने को कहा। बाबरी मस्जिद विध्वंस आंदोलन में भी शामिल हुए थे शिवसैनिक।

    8. उत्तर भारतीयों पर भी साधा निशाना
    - शिवसेना का मुखपत्र माने जाने वाले 'सामना' समाचार पत्र में बिहार और उत्तर प्रदेश से मुंबई पलायन करने वाले लोगों को मराठियों के लिए खतरा बता, बाल ठाकरे ने महाराष्ट्र के लोगों को उनके साथ सहयोग ना करने की सलाह दी। साथ ही इन दो राज्यों से मुंबई बसने वाले नेताओं और अभिनेताओं की भी बाल ठाकरे द्वारा आलोचना की गई।

    9. राष्ट्रपति पर की थी अभद्र टिप्पणी
    - मोहम्मद अफजल की फांसी की सजा पर कोई फैसला ना सुनाने के लिए बाल ठाकरे ने तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे. अबुल कलाम पर भी अभद्र टिप्पणियां की थी।
    - वर्ष 2007 में एक समाचार पत्र को दिए अपने साक्षात्कार के दौरान हिटलर की प्रशंसा करने पर भी बाल ठाकरे को जनता की आलोचना का सामना करना पड़ा।

    10. वैलेंटाइन डे का विरोध किया
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    वैलेंटाइन डे को हिंदू धर्म और संस्कृति के लिए खतरा बता, दुकानों और होटलों में तोड़-फोड करने के अलावा प्रेमी युगलों पर हमला, उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने के लिए जनता में बाल ठाकरे के खिलाफ रोष उत्पन्न हो गया।

    आगे की स्लाइड्स में देखिए बाला साहब की लाइफ से जुड़ी कुछ और फोटोज ...

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    बाला साहब ने शिवसेना की स्थापना की थी।
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    लोग बाला साहब को 'हिंदू हृदय सम्राट' बुलाते थे।
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    बाला साहब के एक इशारे पर मुंबई थम जाती थी।
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    चांदी के सिंहासन पर बैठते थे बाल ठाकरे।
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    आम लोगों में बेहद पॉपुलर थे बाला साहब।
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    कहीं भी खड़े हो सभा शुरू कर देते थे बाला साहब।
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    मोदी भी बाला साहब की बात नहीं टालते थे।
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    एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित के साथ बाला साहब।
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    अमिताभ को बहुत मानते थे बाला साहब।
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