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इलसिए अपने घर से भागा था कसाब, ऐसे चोरियां करते हुए बन गया टेररिस्ट

26 नवंबर को मुंबई में हुए आतंकी हमले की 9वीं बरसी है।

Dainik Bhaskar

Nov 25, 2017, 01:54 PM IST
पाकिस्तान के फरीदकोट का रहने वाला था कसाब। पाकिस्तान के फरीदकोट का रहने वाला था कसाब।

मुंबई: 26 नवंबर को मुंबई में हुए आतंकी हमले की 9वीं बरसी है। इस मौके पर हम आपको एक मात्र जिंदा पकड़े गए आतंकी अजमल आमिर कसाब के बारे में बताने जा रहे हैं। पाकिस्तान के एक छोटे से गांव से आने वाले कसाब का पिता दहीबड़ा बेचता था। नए कपड़े न मिलने से नाराज होकर छोड़ा था घर...


- कसाब पाकिस्तान के पंजाब सूबे में ओकारा जिले के फरीदकोट गांव का रहने वाला था। दहीबड़ा बेच कर परिवार पालने वाले पिता से 2005 में झगड़ने के बाद कसाब ने गांव छोड़ दिया।
- उसने ईद पर नए कपड़े मांगे थे, लेकिन उसके पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह इसे नए कपड़े दिला पाते, लिहाजा उन्होंने मना कर दिया, जिससे कसाब नाराज हो गया और घर से चला गया।

पहले करता था छोटी-मोटी लूटपाट

- उसके बाद इसने अपने दोस्त मुजफ्फर लाल खान के साथ मिलकर छोटे मोटे अपराध करने शुरू किए और फिर लूटपाट तक पहुंच गया।
- 21 दिसंबर, 2007 को वह ईद के दिन रावलपिंडी में था और हथियार खरीदने की कोशिश कर रहा था, जहां उसकी मुलाकात लश्कर-ए-तैयबा की राजनीतिक शाखा जमात-उद-दावा के सदस्यों से हुई, जो पर्चे बांट रहे थे।
- कुछ देर की बातचीत के बाद उनमें लश्कर-ए-तैयबा के आधार शिविर मरकज तैयबा में प्रशिक्षण लेने के बारे में सहमति बनी। कसाब को जब पकड़ा गया तब उसने कार्गो पैंट, ढीला-ढाला नीला स्वेट शर्ट पहना था। उसकी पीठ पर बैग और हाथों में असॉल्ट राइफल थी।
- कसाब को जब पकड़ा गया तब वह 21 साल का था। वह टूटी-फूटी हिन्दी बोल पाता था, अंग्रेजी तो न के बराबर। कसाब को 80 अपराधों में दोषी पाया गया। इनमें भारत के खिलाफ जंग छेड़ने का आरोप भी शामिल था, जिसके लिए मौत की सजा का प्रावधान है।

POK में हुई थी कसाब की ट्रेनिंग
- कसाब उन 24 लोगों के ग्रुप का हिस्सा था, जिन्हें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के पर्वतीय इलाके में लड़ाका प्रशिक्षण दिया गया।
- इसी ग्रुप में से बाद में कसाब सहित उन 10 आतंकवादियों का चयन किया गया, जिन्होंने मुंबई को निशाना बनाया।
- पुलिस सूत्रों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी ने हमले में उसके शामिल होने पर उसके परिवार को डेढ़ लाख रुपये देने की पेशकश की थी।
- ओकारा के ग्रामीणों ने कैमरे के सामने दावा किया कि मुंबई पर हमले के छह महीने पहले तक कसाब उनके गांव में था।
- उन्होंने बताया था कि कसाब ने अपनी मां से कहा था कि वह जिहाद के लिए जा रहा है, इसलिए वह उसे आशीर्वाद दे। उन्होंने दावा किया कि कसाब ने उस दिन गांव के कुछ लड़कों के सामने अपनी पहलवानी के जौहर दिखाए थे।

गोली लगने के बाद भी तुकारामने कसाब को पकड़ा
- 2008 में मुंबई हमले के दौरान अजमल आमिर कसाब को असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर तुकाराम ने जिंदा पकड़ लिया था।
- कसाब ने अपने आपको छुड़ाने के लिए तुकाराम को गोली भी मार दी थी। खून से लथपथ तुकाराम ने कसाब को नहीं छोड़ा था।
- बाद में वे कसाब की मारी गई गोली से शहीद हो गए थे। जिस स्थान पर कसाब पकड़ा गया था वहां अब उनकी मूर्ति लगाई गई है।
- ओम्बले को मरणोपरांत अशोक चक्र से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने जब कसाब को पकड़ा था तब उनके पास केवल एक डंडा था।


आगे की स्लाइड्स में पढ़े, शहीद तुकाराम ने कैसे पकड़ा था आतंकी कसाब को...

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