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ये हैं पहली महिला बैरिस्टर, इन्होने दिलाया महिलाओं को वकालत का अधिकार

सोराबजी समाज सुधारक होने के साथ-साथ एक लेखिका भी थीं।

Dainik Bhaskar

Nov 15, 2017, 10:23 AM IST
कार्नेलिया सोराबजी की फाइल फो कार्नेलिया सोराबजी की फाइल फो
मुंबई. आज देश की पहली महिला बैरिस्टर कार्नेलिया सोराबजी का 151वां जन्मदिन है। कार्नेलिया सोराबजी का जन्म 15 नवम्बर 1866 को नासिक में हुआ था। सोराबजी समाज सुधारक होने के साथ-साथ एक लेखिका भी थीं। कार्नेलिया के लिए कहा जाता है कि इनकी वजह से देश में महिलाओं को वकालत का अधिकार मिला था। गूगल ने सम्मान में बनाया डूडल...
- गूगल ने कार्नेलिया सोराबजी के जन्मदिन पर एक खास डूडल बनाकर उनको समर्पित किया है। इस फोटो में कार्नेलिया की फोटो के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट की फोटो भी लगाईं गई है।
- कार्नेलिया सोराबजी का यह डूडल सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
- कार्नेलिया ऑक्सफोर्ड जाकर कानून की पढ़ाई करने वाली भी वह देश की प्रथम महिला थीं। ऑक्सफर्ड में पढ़ाई के लिए उन्हें स्कॉलरशिप नहीं मिली तो उन्होंने इसके खिलाफ भी लड़ाई लड़ी।
- मैडम सोराबजी लेखिका और समाज सुधारक भी थीं। उन्होंने कई किताबें लिखीं और महिलाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया।
महिलाओं को दिलाया वकालत का अधिकार
- कार्नेलिया का जन्म एक पारसी परिवार में हुआ था। 1892 में नागरिक कानून की पढ़ाई के लिए विदेश गयीं और 1894 में भारत लौटीं।
- उस समय समाज में महिलाएं मुखर नहीं थीं और न ही महिलाओं को वकालत का अधिकार था। अपनी प्रतिभा की बदौलत उन्होंने महिलाओं को कानूनी परामर्श देना आरंभ किया और महिलाओं के लिए वकालत का पेशा खोलने की मांग उठाई।
- साल 1907 के बाद कार्नेलिया को बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम की अदालतों में सहायक महिला वकील का पद दिया गया।
- एक लंबी जद्दोजहद के बाद 1924 में महिलाओं को वकालत से रोकने वाले कानून को शिथिल कर उनके लिए भी यह पेशा खोल दिया गया।
- 1929 में कार्नेलिया हाईकोर्ट की वरिष्ठ वकील के तौर पर सेवानिवृत्त हुईं पर उसके बाद महिलाओं में इतनी जागृति आ चुकी थी कि वे वकालत को एक पेशे के तौर पर अपनाकर अपनी आवाज मुखर करने लगी थीं।
आगे की स्लाइड्स में देखिए कार्नेलिया सोराबजी की कुछ और फोटोज...
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कार्नेलिया सोराबजी की फाइल फोकार्नेलिया सोराबजी की फाइल फो
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