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4 भारतीय दिव्यांग तैराकों ने इंग्लिश चैनल पार कर रिकॉर्ड बनाया; यहां तक पहुंचने के लिए एफडी टूटी, उधार लिया

किसी को तानों का सामना करना पड़ा तो किसी ने झील में तैरकर अथाह समुद्र से टकराने का हौसला जुटाया।

Dainik Bhaskar

Jun 26, 2018, 06:00 AM IST
बाएं से राजस्थान के जगदीशचंद् बाएं से राजस्थान के जगदीशचंद्

- नियम के हिसाब से हर तैराक को एक घंटे तैरना था

- 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तापमान था इंग्लिश चैनल का

भोपाल/जयपुर/मुंबई. भारत के 4 युवक 36 किलोमीटर लंबा इंग्लिश चैनल पार करने वाले एशिया के पहले दिव्यांग तैराक बन गए हैं। इस रिले टीम ने यह दूरी 12 घंटे 26 मिनट में पूरी की। तैराकों ने इस मुकाम तक पहुंचने के अनुभव भास्कर के साथ साझा किए। किसी के सामने पैसों की दिक्कत आई तो उसने पिता की एफडी तुड़वाई, दोस्तों से उधार मांगा। किसी को तानों का सामना करना पड़ा तो किसी ने झील में तैरकर प्रैक्टिस की और इंग्लिश चैनल पार करने का हौसला जुटाया। इस टीम में मध्यप्रदेश के सत्येंद्र सिंह लोहिया, राजस्थान के जगदीशचंद्र तैली, महाराष्ट्र के चेतन राउत और बंगाल के रिमो शाह शामिल थे।

चेतन के पास लंदन जाने के पैसे भी नहीं थे: अमरावती के रहने वाले चेतन राउत (24) दाएं पैर से 50% तक दिव्यांग हैं। चेतन ने बताया, "पिता स्कूल में चपरासी थे। तैराकी के लिए उन्होंने मुझे पुणे भेजा। दो साल पहले हादसे में उनकी जान चली गई। इसके बाद इंग्लिश चैनल पार करने के लिए लंदन जाने तक के पैसे नहीं थे। पैसों की व्यवस्था करने के लिए मैंने पिता की एफडी तुड़वाई। दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लिया। टीम के बाकी साथियों ने भी क्राउड फंडिंग और दूसरे तरीकों से पैसे जुटाए। इसके बावजूद पैसे पूरे नहीं थे। टाटा ट्रस्ट ने इवेंट का 60 फीसदी खर्च उठाया। आज मुझे खुशी है कि मैंने पिता का सपना पूरा कर दिया।"

सत्येंद्र को बचपन से ही हर कोई ताना देता था: ग्वालियर के रहने वाले सत्येंद्र (31) ने कहा, "दिव्यांग होने की वजह से बचपन से ताने दिए जाते थे। लेकिन इसी से ताकत मिली। गांव की बैसली नदी में तैराकी शुरू की। अप्रैल 2017 में भोपाल में मध्यप्रदेश के खेल विभाग के अधिकारियों से मैंने इंग्लिश चैनल पार करने की इच्छा जाहिर की थी। अधिकारियों ने हंसी उड़ाते हुए भोपाल का बड़ा तालाब तैरकर पार करने का चैलेंज दिया था।" सत्येंद्र दोनों पैरों से 65% तक दिव्यांग हैं।

झील में तैरकर जगदीश ने सीखी तैराकी: जगदीशचंद्र तैली (34) ने बताया, ''मैंने स्विमिंग की शुरुआत राजसमंद झील से की थी। पिता किसान हैं। मुंबई में खर्च उठाने के लिए अलग-अलग जगह जाकर स्विमिंग भी सिखाई। इंग्लिश चैनल पार करते वक्त 60 फीसदी सफर आसानी से पार कर लिया था, लेकिन फिर समंदर में ऊंची लहरें उठने के कारण 1 घंटे का सफर तय करने में 3 घंटे लग गए। लहरों ने रास्ते से भटकाने की भी कोशिश की, लेकिन हम नहीं रुके। एक जगह जैली फिश ने काट भी लिया। इसके बावजूद टीम का हौसला नहीं टूटा।'' जगदीश बाएं पैर से 55% दिव्यांग हैं।

रिमो ने एक वक्त के खाने से भी गुजारा किया: पश्चिम बंगाल के हावड़ा के रहने वाले रिमो शाह (27) बाएं पैर से 55% दिव्यांग हैं। उन्होंने बताया, "यहां तक पहुंचने का सफर मेरे लिए चुनौतियों से भरा रहा। पिता का बिजनेस डूब गया और पैसे खत्म हो गए। एक वक्त ऐसा भी आया जब हमें दिन में एक बार का खाना नसीब होता था। लेकिन माता-पिता ने हिम्मत नहीं हारी और हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।"

तैराकों के लिए एवरेस्ट जैसा है इंग्लिश चैनल: रिमो ने बताया, "इंग्लिश चैनल को पार करना हर तैराक का सपना होता है। उनके लिए यह एवरेस्ट पर फतह से कम नहीं होता। 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तापमान में समुद्र की लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ना उसी तरह से होता है जैसे एक पर्वतारोही बर्फ के पहाड़ पर चढ़ता है। यह कामयाबी हमें युद्ध में विजय जैसा अहसास देती है।"

ऐसे पार किया इंग्लिश चैनल: इस रिले स्विमिंग में चारों तैराकों ने मिलकर कुल 36 किलोमीटर का सफर पूरा किया। नियम के हिसाब से हर तैराक को एक घंटे तैरना था और उसके बाद 3 अन्य तैराक अपनी पारी के हिसाब से एक-एक घंटे तैरकर आगे बढ़े। इस अभियान की शुरुआत राजस्थान के जगदीशचंद्र तैली ने की। उसके बाद दूसरा नंबर महाराष्ट्र के चेतन राउत, तीसरा नंबर बंगाल के रिमो शाह और मध्यप्रदेश के सत्येंद्र का था। इंग्लिश चैनल अटलांटिक महासागर का हिस्सा है जो दक्षिणी इंग्लैंड को उत्तरी फ्रांस से अलग करता है और उत्तरी सागर को अटलांटिक से जोड़ता है। इसकी लंबाई 560 किलोमीटर है, लेकिन तैरने के लिए इसकी मानक दूरी करीब 35 किलोमीटर है। लहरों के साथ तैराक को इससे ज्यादा भी तैरना पड़ सकता है।

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