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आदर्श घोटाला : HC ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पर केस चलाने पर लगाई रोक

महाराष्ट्र के गवर्नर सी विद्यासागर राव ने आदर्श घोटाला मामले में चव्हाण पर मुकदमा चलाने के लिए सीबीआई को मंजूरी दे दी थी

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 22, 2017, 12:16 PM IST

मुंबई. आदर्श सोसाइटी घोटाले में महाराष्ट्र के पूर्व सीएम अशोक चव्हाण को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिल गई। हाईकोर्ट ने गवर्नर सी. विद्यासागर राव द्वारा सीबीआई को चव्हाण के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी पर रोक लगा दी है। यानी इस मामले में अब चव्हाण पर केस नहीं चलेगा। पिछले साल विद्यासागर राव ने आदर्श घोटाला मामले में सीबीआई को चव्हाण पर सीआरपीसी की धारा 197, आईपीसी की धारा 120-बी (षडयंत्र) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा चलाने के लिए अपनी मंजूरी दी थी। जब यह घोटाला सामने आया था, तब चव्हाण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे।

क्या है आदर्श सोसाइटी घोटाला

- महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के कोलाबा में आदर्श हाउसिंग सोसाइटी बनाई थी। यह 31 मंजिला बिल्डिंग युद्ध में शहीद सैनिकों की विधवाओं और डिफेंस मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए बनाई गई थी।
- सोसाइटी बनने के कुछ सालों बाद एक आरटीआई से यह खुलासा हुआ कि नियमों को दरकिनार कर सोसाइटी के फ्लैट ब्यूरोक्रेट्स, नेताओं और सेना के अफसरों को बेहद कम दामों में बेचे गए। घोटाले का पर्दाफाश 2010 में हुआ। इस मामले में तब के सीएम अशोक चव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा था।

- मामले की जांच के लिए 2011 में महाराष्ट्र सरकार ने दो मेंबर्स का ज्यूडिशियल कमीशन बनाया था। इसके चेयरमैन हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस जेए. पाटिल थे। 2 साल तक इस कमीशन ने 182 से ज्यादा गवाहों से पूछताछ की। अप्रैल 2013 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।


अब तक 8 गिरफ्तारियां

- घोटाले में सीबीआई ने कुल 8 गिरफ्तारियां की। इसमें दो रिटायर्ड मेजर जनरल टीके. ठाकुर और एआर. कुमार के अलावा रिटायर्ड ब्रिगेडियर एमएम. वांचू, पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग ऑफ महाराष्ट्र, प्रमोटर कन्हैयालाल गिडवानी-प्रदीप व्यास, शहर के तब के कलेक्टर और महाराष्ट्र सरकार के फाइनेंस सेक्रेटरी भी शामिल थे।


4 पूर्व मुख्यमंत्रियों पर आई थी आंच

- कमीशन ने रिपोर्ट में बताया कि कुल 25 फ्लैट गैरकानूनी तौर पर आवंटित किए गए। 22 फ्लैट गलत नाम से खरीदे गए।

- रिपोर्ट में महाराष्ट्र के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक चव्हाण, विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे और शिवाजीराव निलंगेकर पाटिल का नाम सामने आया था। इनके अलावा दो पूर्व शहरी विकास मंत्री राजेश टोपे, सुनील तटकरे और 12 ब्यूरोक्रेट्स के नाम भी इस रिपोर्ट में थे।

- जिन लोगों को फ्लैट अलॉट किए गए थे, उनमें विवादित आईएएस अफसर देवयानी खोब्रागड़े का भी नाम है।


बिल्डिंग गिराने के मिले थे आदेश

- 21 दिसंबर 2010 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोसाइटी को इंटरिम रिलीफ देने से इनकार कर दिया था। पर्यावरण नियमों को दरकिनार करने की वजह से केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इमारत को तीन महीने के अंदर गिराने की सिफारिश की थी।

चव्हाण ने क्या कहा था?

- बाॅम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रंजित मोरे और और साधना जाधव की बेंच ने चव्हाण के मामले में यह अहम फैसला दिया।
- चव्हाण ने राज्यपाल द्वारा सीबीआई को उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मंजूरी के खिलाफ हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की थी।
- चव्हाण ने अपनी दलील में कहा था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाना लोकतंत्र को ताक पर रखने जैसा है। उन्होंने हाईकोर्ट से कहा था कि पहले उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए गवर्नर ने सीबीआई को इजाजत नहीं दी थी। लेकिन राज्य में सरकार बदलने के बाद केस चलाने की मंजूरी दे दी गई।

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Web Title: aadrsh sosaaiti ghotaalaa : HC ne mhaaraastr ke purv CM chvhaan par kes chalane par rok lagayi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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