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पुणे कोरेगांव हिंसा: SC से याचिका खारिज होने के बाद मिलिंद एकबोट अरेस्ट

एकबोटे पर कोरेगांव हिंसा मामले में एट्रोसिटी एक्ट, जानलेवा हमला करने, दंगा भड़काने और धारा 144 उल्लंघन का मामला दर्ज है।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 14, 2018, 01:58 PM IST

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    मिलिंद को कोरेगांव हिंसा का मुख्य आरोपी बनाया गया है।

    पुणे/दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में भीमा-कोरेगांव हिंसा के आरोपी और हिंदू एकता अगाड़ी के अध्यक्ष मिलिंद एकबोटे की अग्रिम जमानत याचिका बुधवार को ठुकरा दी। जिसके बाद कुछ देर पहले एकबोट को पुणे ग्रामीण पुलिस टीम ने अरेस्ट कर लिया है। आज ही उन्हें पुणे की स्थानीय कोर्ट में पेश किया जाएगा। हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद एकबोटे ने सुप्रीमकोर्ट मे याचिका दाखिल की थी। एकबोटे पर कोरेगांव हिंसा मामले में एट्रोसिटी एक्ट, जानलेवा हमला करने, दंगा भड़काने और धारा 144 उल्लंघन करने का मामला दर्ज है। बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के पोते और भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने आरोप लगाया था कि 56 वर्षीय मिलिंद एकबोटे ने लोगों को हिंसा के लिए उकसाया था। मामला दर्ज होने के बाद से मिलिंद एकबोटे फरार चल रहे थे। हाईकोर्ट ने ठुकरा दी थी जमानत याचिका...

    - भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में केस दर्ज होने के बाद मिलिंद एकबोटे ने 22 जनवरी को पुणे के जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
    - इसके बाद उन्होंने मुंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद पुणे ग्रामीण पुलिस ने उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया था।
    - मिलिंद के घर और रिश्तेदारों के यहां पुलिस ने कई छापे डाले लेकिन एकबोटे का कोई सुराग हाथ नहीं लगा। जिसके बाद वे खुद कुछ दिन पहले पुलिस के सामने सरेंडर हुए थे।

    कभी बीजेपी पार्षद थे एकबोटे

    - पुणे में रहने वाले 56 वर्षीय मिलिंद एकबोटे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं।
    - मिलिंद एकबोटे साल 1997 से 2002 के बीच पुणे महापालिका में बीजेपी के पार्षद भी रहे हैं। इसके बाद बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे साल 2007 में निर्दलीय चुनाव लड़ें। हालांकि इस बार उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।
    - इसके बाद उन्होंने हिंदू एकता मंच की स्थापना की। वेलेंटाइन डे के विरोध को लेकर उनका संगठन कई बार सुर्खियों में आया।

    बीजेपी के खिलाफ लड़ा था चुनाव
    - 2014 में मिलिंद एकबोटे ने पुणे के शिवाजीनगर क्षेत्र से शिवसेना के टिकट पर एमएलए का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में बीजेपी के विजय काले ने उन्हें हराया।
    - बता दें कि मिलिंद एकबोटे की भाभी जोत्सना एकबोटे पिछले साल पुणे महापालिका के चुनाव में बीजेपी की टिकट पर पार्षद का चुनाव जीती हैं।
    - मिलिंद के भाई गजानन एकबोटे एक एजुकेशनल संस्था चलाते हैं।


    दर्ज हैं कई मामलें
    - पुणे से समस्त हिंदू आघाडी संगठन चलाने वाले मिलिंद एकबोटे को कट्टर हिंदुत्ववादी के तौर पर पहचाना जाता है। उनका संगठन गोमाता, खाशाबा जाधव प्रतिष्ठान और अन्य सामाजिक मुद्दों को लेकर काम करता रहा है।
    - मिलिंद एकबोटे के खिलाफ इससे पहले 12 मामले दर्ज हैं। इनमें दंगा भड़काना, दो समाजों के बीच द्वेष फैलाना, अतिक्रमण करना और अपराध कृत्य जैसे मामले शामिल हैं।

    कैसे हुई जातीय हिंसा
    - 1 जनवरी 2018 को पुणे के पास कोरेगांव-भीमा लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया और इसी कार्यक्रम के दौरान दो गुटों की हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई थी। इसके बाद जातीय हिंसा मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, अहमदनगर जैसे 18 शहरों तक फैल गई

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    मिलिंद एकबोटे को गिरफ्तार कर ले जाती पुणे पुलिस की टीम।
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    एकबोट को पुणे ग्रामीण पुलिस टीम ने उनके घर से अरेस्ट कर लिया है।
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    2014 में मिलिंद एकबोटे ने पुणे के शिवाजीनगर क्षेत्र से शिवसेना के टिकट पर एमएलए का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में बीजेपी के विजय काले ने उन्हें हराया।
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