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जेल से बाला साहब ने वाइफ को लिखी थी ये चिट्ठी, ऐसी थी पहली और अंतिम स्पीच

बाला साहब पत्नी मीनाताई ठाकरे को भी बहुत मानते थे। जेल में रहने के दौरान भी वे अक्सर उन्हें लेटर लिखा करते थे।

Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 10:42 AM IST
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मुंबई: आज शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे का जन्मदिन है। इस मौके पर हम आपको उनके पहले भाषण और आखिरी भाषण के बारे में बताने जा रहे हैं। बाला साहब पत्नी मीनाताई ठाकरे को भी बहुत मानते थे। जेल में रहने के दौरान भी वे अक्सर उन्हें लेटर लिखा करते थे। ऐसा था बाला साहब का पहला भाषण ...

चांदी के सिंहासन पर बैठने के शौकीन थे बाल ठाकरे, ऐसी थी पर्सनल लाइफ

- बाल ठाकरे ने 30 अक्‍टूबर, 1966 को अपना पहला भाषण दिया था। उन्‍होंने कहा था-"जो यहां नहीं आया उसे बदनसीब ही कहा जा सकता है।"
"मुझे लगता है कि, शिवाजी महाराज आज यहां होते तो उनका घोड़ा भी उत्साह से दौड़ता। शिवाजी महाराज के पुतले का अनावरण समारोह दशहरे के दिन होना तय था, लेकिन वह प्रलंबित हुआ।"
- "क्योंकि, महाराज ने सोचा होगा कि, यहां शिवाजी पार्क पर जाने में क्या हासिल है? जहां मेरा मराठी आदमी डरपोक, नामर्द हुआ है और वहां पार्क में भैय्ये लोग मूंगफली बेचते हुए घूम रहे है।"
- "बेचने वाले भी बाहर के और खाने वाले भी बाहर के। ऐसे में महाराज ने तय किया होगा कि, पहले शिवसेना का यह सम्मेलन देखता हूं, मराठी आदमी जिंदा है या नहीं वह भी देखता हूं और अगर वह जिंदा है तो फिर 13 के बजाय 6 तारीख को आता हूं!"

पहले भाषण में मराठी-गैर मराठी का मुद्दा उठाया था

- आगे ठाकरे ने कहा था, "जो हम पर आरोप लगाते हैं। उनसे मैं कहना चाहता हूं कि, अगर मराठी आदमी जातिवादी, प्रांतवादी, संकीर्ण प्रवृत्ति का होता तो सदोबा (स. का. पाटील) की यह मुंबई कॉस्मोपॉलिटन बनती ही नहीं।"
- "क्योंकि हमने विशिष्ट दृष्टिकोण से देखा तो सभी भारतीय हैं। वो मद्रास के मुख्यमंत्री कहते हैं कि, जिसे अच्छी तमिल आती है उसी को उस राज्य में नौकरी मिलेगी।"
- "हम भी अपने सत्ताधारियों से यही कहना चाहते हैं... जिसे अच्छी मराठी आती हो उसी को इस महाराष्ट्र में नौकरी मिलेगी, हाउसिंग सोसायटी में दुकान मिलेगी।"
- "हां, मैं प्रांतवादी हूं, जातिवादी हूं, संकीर्ण प्रवृत्ति का हूं। 'हिंदी' में जो आदेश मिलेंगे उन्हें कचरे के डिब्बे में फेंको ऐसा कहने वाले कामराज को महाराष्ट्र को राष्ट्रवाद सिखाने की जरूरत नहीं।"

यह था बाला साहब का अंतिम भाषण

- 24 अक्टूबर, 2012 को दशहरा रैली में रिकार्डेड संदेश के दौरान बाल ठाकरे आखिरी भाषण में बाला साहब ने कहा था कि, "मैं अब थक गया हूं। मेरा शरीर कमजोर हो गया है बिल्कुल टूट गया है।"
- "अब मैं आराम चाहता हूं.. जिस तरह आपने 46 वर्षों तक मेरी देखभाल की है। उसी तरह बेटे उद्धव ठाकरे और पोते आदित्य का भी ध्यान रखना।"

जेल से लिखी थी पत्नी को चिट्ठी

- बालासाहब ठाकरे ने पुणे की यरवडा जेल में बंद रहने के दौरान पत्नी मीनाताई को एक पत्र लिखा था।
- इस चिट्ठी में बाल ठाकरे ने लिखा था,"सौभाग्यवती मीना, जय महाराष्ट्र"
- आज ही श्री और लीला गडकरी का पत्र मिला। अशोक प्रधान का भी मिला। कई जगहों से पत्र आ रहे है।"
- "पढ़ते हुए आंखें भर आती है। शब्द धुंधले हो जाते है। कैसे पागल लोग हैं। जब तक इनका प्यार मेरे साथ है, तब तक मुझे किसी बात की परवाह नहीं। हार मुझे छू भी नही सकती।"
- "मुझे हफ्ते में सिर्फ दो पत्र लिखने की अनुमति होने के कारण सभी को संतुष्ट नहीं कर सकता, बुरा लगता है।"
- "चिरंजीव ङ्क्षबदा का अंधेरी से भेजा हुआ पत्र मिला। भाऊ मामा ने भी लिखा है। अशोक ने तुम्हारी हिम्मत के बारे में विस्तार से लिखा है। बुरा वक्त आता है, तो वह हिम्मत भी साथ ले आता है।"
- "यहां किसी प्रकार की तकलीफ नहीं। मैं जल रहा हूं सिर्फ अन्याय के विरुद्ध। उस से पूरा शरीर झुलस जाता है। शेर जब पिंजरे में बंद होता है, तब बंदर भी उसकी पुंछ खींचते है, यह ठीक वैसा ही चल रहा है।"
- "यहां सुबह शाम रेडियो सुनाते है। 'नेस कॉफी' का विज्ञापन सुनते ही डिंगा के बोल याद आते है। फस्या के क्या हाल चाल हैं? सभी को जय महाराष्ट्र कहना। मार्शल का ख्याल रखना।"

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