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इस लेडी सांसद ने उठाई 42 किलो की तलवार, अचानक आग गई सुर्खियों में

सुप्रिया ने बुधवार को जेजुरी खंडोबा मंदिर में अपने हाथ से 42 किलो की भारी तलवार उठाई।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Feb 14, 2018, 04:49 PM IST

इस लेडी सांसद ने उठाई 42 किलो की तलवार, अचानक आग गई सुर्खियों में

पुणे.शहर से सटे बारामती की सांसद और एनसीपी चीफ शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले अचानक सुर्खियों में आ गई हैं। सुप्रिया ने बुधवार को जेजुरी खंडोबा मंदिर में अपने हाथ से 42 किलो की भारी तलवार उठाई। इंटरनेट पर इसे नारी शक्ति के रूप में प्रचारित करते हुए सुप्रिया की जमकर तारीफ हो रही है। सुप्रिया ने की गुप्त शिवलिंग की पूजा..

- शिवरात्री के दिन महाराष्ट्र के जेजुरी मंदिर में विशेष 'हल्दी उत्सव' का आयोजन किया गया था। इस उत्सव में हल्दी से रंग खेलने और अपने दांत से 42 किलो की तलवार उठाने की विशेष परंपरा है।
- इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पहली बार किसी महिला सांसद ने इसे अपने हाथ से उठाने का प्रयास किया।
- 42 किलोग्राम की इस तलवार को सुप्रिया सुले ने जैसे ही अपने हाथ से उठाया पूरा मंदिर परिसर तालियों से गूंज उठा।
- हल्दी से होली खेलने के बाद सुप्रिया सुले ने कुछ महिलाओं संग जेजुरी मंदिर में बने गुप्त शिवलिंग की पूजा भी की। हर साल शिवरात्रि पर इस गुप्त शिवलिंग की विशेष पूजा होती है।

डेढ़ लाख लोग हुए शामिल

- उत्सव के दौरान हल्दी से पूरा मंदिर सोने की तरह चमक उठा। जेजुरी का यह उत्सव पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

- विदेशों से लोग इस उत्सव में शामिल होने के लिए जेजुरी आते हैं। इस उत्सव को मनाने के लिए मंदिर परिसर में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग जमा हुए थे।

- सभी ने एक दूसरे पर हल्दी फेंक कर यह उत्सव मनाया। उत्सव से पहले खंडोबा भगवान की शोभायात्रा निकाली गई।

- खंडोबा को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। यह मंदिर एक छोटी सी पहाड़ी पर है। यहां पहुंचने के लिए भक्तों को करीब 200 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। चढ़ाई करते समय मंदिर के प्रांगण में स्थित दीपमाला का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है।

यहां पिता से मिलते थे शिवाजी महाराज

- जेजुरी ऐतिहासिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। शिवाजी महाराज अक्सर इसी मंदिर में अपने पिता शहाजी राजे भोसले से अकेले में मुलाकात करते थे।

- यहीं दोनों मिलकर मुगलों के विरुद्ध युद्ध की रणनीति तैयार करते थे। जेजुरी मध्यप्रदेश के होल्कर राजवंश के कुलदेवता माने जाते हैं।

- शिवाजी महाराज के सम्मान में आज भी उनकी 42 किलो की तलवार को दांत से उठाने की परंपरा यहां जारी है।

- हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र, मार्गशीर्ष, पौष और माघ मास में यहां विशेष यात्रा का आयोजन किया जाता है।

- इस यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए यहां आते हैं।


मुख्य द्वार पर पीतल का कछुआ

- मंदिर को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है। पहला भाग मंडप कहलाता है, जहां श्रद्धालु एकत्रित होकर पूजा करते हैं।

- दूसरा भाग गर्भगृह है जहां खंडोबा की प्रतिमा विद्यमान है। हेमड़ा पंथी शैली में बने इस मंदिर में 28 फीट आकार का पीतल से बना कछुआ भी है।

- इसे एक वाद्ययंत्र के रूप में भजन, कीर्तन और नृत्य के लिए उपयोग किया जाता था।

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