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भीमा कोरेगांव हिंसा: गुरूजी के समर्थन में मुंबई, पुणे में प्रदर्शन, सरकार ने दी है क्लीन चिट

सोमवार को दलित समुदाय के लोगों ने भिड़े गुरूजी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आजाद मैदान में यलगार मार्च किया था।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 28, 2018, 02:01 PM IST

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    प्रदर्शन की समाप्ति की घोषणा के बावजूद हजारों समर्थक अभी भी मुंबई के आजाद मैदान में जमा है।

    पुणे. भीमा कोरेगांव हिंसा मामले के प्रमुख आरोपी और शिव प्रतिष्ठान के संभाजी भिड़े गुरूजी के समर्थक में बुधवार सुबह से मुंबई और पुणे में जारी प्रदर्शन दोपहर को समाप्त हो गया। शिव प्रतिष्ठान के चीफ भारत माली ने विधानभवन में सीएम देवेंद्र फड़णवीस से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया है। पुलिस की अनुमति के बावजूद बुधवार सुबह से ही मुंबई के आजाद मैदान में हजारों समर्थक जमा थे। वहीं पुणे और सांगली की सड़कों पर गुरूजी के समर्थकों ने पैदल मार्च निकाला। बता दें कि सोमवार को दलित समुदाय के लोगों ने भिड़े गुरूजी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आजाद मैदान में यलगार मार्च किया था। यह प्रदर्शन उसी का जवाब माना जा रहा है।

    सरकार ने गुरूजी को दिया क्लीन चिट

    - इस प्रदर्शन से एक दिन पहले मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने विधानसभा में बताया कि हिंसा वाले दिन भिड़े या उनके समर्थक इलाके में नहीं थे।

    - सीएम ने सदन को बताया कि कि भिड़े हिंसा के वक्त किसी के साथ फोन पर नहीं जुड़े थे। उन्होंने बताया, "एक महिला ने दावा किया था कि संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे के भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़काते हुए उन्होंने देखा था। हालांकि, जांच में भिड़े के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं।' उन्होंने बताया कि बाद में महिला ने बयान दिया था कि उन्होंने भिड़े या एकबोटे को नहीं देखा था लेकिन लोगों को उनका नाम लेते सुना था।"
    - उन्होंने आगे बताया कि पिछले 6 महीने में भिड़े और उनके समर्थक उस इलाके में नहीं थे। उन्होंने बताया, 'उन्होंने वहां किसी से बात नहीं की थी। हालांकि, इस दिशा में जांच जारी है।' उन्होंने बताया कि पुलिस ने जनवरी को हुई हिंसा को रोकने की हर कोशिश की थी।


    मुंबई में रैली को नहीं मिली मंजूरी
    - मुंबई में संभाजी भिड़े के समर्थन में शिव प्रतिष्ठान की रैली को मुंबई पुलिस ने इजाजत नहीं दी थी। मुंबई पुलिस से बायखला से आजाद मैदान तक के लिए मार्च की अनुमति मांगी गई थी। पुलिस ने आजाद मैदान में जुटने की अनुमति ही दी थी।
    - पुलिस ने मैदान के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया है। फिलहाल भिड़े समर्थक शांतिपूर्ण ढंग से आजाद मैदान में बैठे हुए हैं।
    - पुणे में भी शनिवारवाड़ा से कलेक्टर ऑफिस तक मार्च निकालने के लिए शिव प्रतिष्ठान के लोगों ने पुलिस से अनुमति मांगी थी। लेकिन उन्हें भी मंजूरी नहीं मिली है।

    कौन हैं संभाजी भिडे गुरुजी

    - संभाजी भिडे गुरुजी, महाराष्ट्र के सांगली जिले से आते हैं। गुरूजी के नाम से मशहूर संभाजी पुणे यूनिवर्सिटी से एमएससी (एटॉमिक साइंस) में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। इसके अलावा वे मशहूर फर्ग्युसन कॉलेज में फिजिक्स के प्रोफेसर रह चुके हैं।
    - साइकिल पर चलने वाले भिडे गुरुजी की उम्र 85 के पार है इसके बावजूद वो आज भी तंदरूस्त हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वो पैरों में चप्पल तक नहीं पहनते हैं।
    - कहा जाता है कि गुरुजी ने आजतक जिस भी नेता का चुनाव में समर्थन किया उसकी जीत हुई है। हालांकि, गुरुजी कभी किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े।
    - सबसे बड़ी बात तो यह कि नेताओं के बीच दबदबा होने के बावजूद उनका ना तो खुद का घर है और ना ही किसी तरह की संपत्ति।

    पीएम मोदी भी मानते हैं इनका लोहा

    - दुबले-पतले शरीर वाले संभाजी भिडे गुरुजी देखने में एक आम इंसान जैसे लगते हैं, लेकिन इनके कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर महाराष्ट्र के सीएम तक इनकी बात सुनते हैं।
    - शिवाजी महाराज को अपना आदर्श मानने वाले गुरुजी को महाराष्ट्र में मराठा लोगों का जबरदस्त समर्थन है। लोकसभा चुनाव के दौरान जब मोदी सांगली आए थे तो सुरक्षा घेरा तोड़कर भिडे गुरुजी से मिले थे।
    - यही नहीं, रैली में मोदी ने तो यह तक कहा था कि, "मैं भिडे गुरुजी के बुलावे पर नहीं आया हूं। बल्कि उनका ऑर्डर मानकर सांगली आया हूं।"
    - शिव प्रतिष्ठान संस्था चलाने वाले भिडे गुरूजी का रुतबा मोदी तक ही सीमित नहीं है। एक बार तो महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने उनसे मिलने के लिए अपना प्लेन तक रुकवा दिया था।

    कैसे हुआ था दंगा ?

    -भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी 1818 में अंग्रेज और मराठों के बीच युद्ध हुआ था। अंग्रेजों की महार बटालियन के 500 सैनिकों ने मराठों के 28000 सैनिकों को धूल चटाई थी।

    -इस जंग की 200वीं बरसी पर 1 जनवरी 2018 को दलित समुदाय के लोग विजयस्तंभ को वंदन करने भीमा कोरेगांव पहुंचे थे।

    -इसी दौरान कुछ असमाजिक तत्वों ने गाड़ियों और दुकानों में तोड़फोड़ की। पथराव से गांव में रहने वाले एक युवक की मौत हुई थी।

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    पुणे में भी गुरूजी के समर्थन में मार्च निकाल जाना था लेकिन पुलिस ने इसकी मंजूरी नहीं दी।
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