Hindi News »Maharashtra »Pune »News» Cold Will Remain Till March

मार्च तक रहेगी ठंड, मई में बेमौसम बारिश के आसार

हर साल संक्रांति के बाद ठंड कम होने लगती है और तापमान में बढ़ोतरी होती है, लेकिन इस साल ऐसा होने की संभावना कम है।

अजय कुलकर्णी | Last Modified - Jan 14, 2018, 06:23 AM IST

मार्च तक रहेगी  ठंड, मई में बेमौसम बारिश के आसार

औरंगाबाद.इस साल देश में ठंड मार्च तक रहेगी। वैसे हर साल संक्रांति के बाद ठंड कम होने लगती है और तापमान में बढ़ोतरी होती है, लेकिन इस साल ऐसा होने की संभावना कम है। दरअसल अमेरिका के प्रतिष्ठित क्लायमेंट प्रिडिक्शन सेंटर की जनवरी की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से मार्च तक ला-नीना ज्यादा सक्रिय रहेगा। इससे प्रशांत महासागर का तापमान ठंडा रहेगा। इसका असर यह होगा कि पूरे विश्व में कड़ाके की ठंड रहेगी। इसका असर भारत पर भी पड़ेगा।


रिपोर्ट के अनुसार ला नीना के जून
तक सक्रिय रहने का अनुमान है। इसलिए इसका असर गर्मी के मौसम में भी दिखाई देगा। उस दौरान बेमौसम बरसात की संभावना बढ़ी हैं।

जनवरी से सितंबर तक ऐसा रह सकता है मौसम

जनवरी से मार्च : उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड, बर्फबारी, घना कोहरा।
मार्च से मई: समशीतोष्ण मौसम, बेमोसमी बारिश।
मई से जुलाई : दक्षिण, मध्य भारत में अच्छी बारिश।
जुलाई से सितंबर: देश में अच्छी बारिश।

सोर्स : जनवरी 2018 की रिपोर्ट- क्लायमेट प्रिडिक्शन सेंटर, इंटरनेशनल रिसर्च इन्स्टिट्यूट फॉर क्लायमेट एंड रिसर्च, कोलंबिया युनिवर्सिटी।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
- महाराष्ट्र के परभणी स्थित वसंतराव नाइक मराठवाड़ा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की संशोधन कमेटी के सदस्य और एग्राे मैट्रालाॅजिस्ट डॉ. रामचंद्र साबले के अनुसार- उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड की संभावना ज्यादा है।

- औरंगाबाद के एमजीएम स्पेस रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर श्रीनिवास औंधकर कहते हैं कि मार्च तक कड़ाके की ठंड और उत्तर व मध्य भारत में ज्यादा ठंड रहने से खेती, बिजनेस पर बड़ा असर पड़ेगा।

- घने कोहरे और धुंध के कारण रेल, हवाई जहाज रद्द होना और इनमें विलंब होने की घटनाएं बढ़ेंगी। उत्तर भारत में शीत लहर कायम रहने का अनुमान है।

- उत्तर भारत इस साल ठंड का मौसम ज्यादा दिन रहने के आसार हैं। महाराष्ट्र, गुजरात में अब तापमान में बढ़ोतर हो सकती है।

- एग्रीकल्चर एक्सपर्ट देवेंद्र शर्मा बताते हैं कि शीत लहर के कारण खेती को नुकसान होता है। अगर फरवरी में भी मनिमम टैम्परेचर कम रहेगा तो गेहूं की फसल में दाना भरने (ग्रेन फिलींग) की प्रक्रिया पर असर होगा। हालांकि सब्जी की फसल पर पानी देने से काम चल जाएगा, लेकिन ज्यादा ठंड पड़ी तो नुकसान हो सकता है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×