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शिवरात्रि पर शिर्डी में भक्तों का सैलाब, अब तक 2 लाख लोगों ने किये साईं बाबा के दर्शन

संस्थान के मुताबिक अब तक दो लाख से ज्यादा श्रध्दालु बाबा के दर्शन के लिए आ चुके हैं।

Danik Bhaskar | Feb 13, 2018, 02:12 PM IST
भारी भीड़ के चलते सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। भारी भीड़ के चलते सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

पुणे. आज शिवरात्रि है इस मौके पर भारी संख्या में श्रध्दालु शिर्डी के साईं बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे हैं। शिर्डी साईंबाबा सनातन ट्रस्ट के मुताबिक शिवरात्रि के मौके पर मंदिर में भारी भीड़ होने की उम्मीद है। यही कारण है कि मंदिर प्रबंधन ने मंदिर परिसर में अतरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं। संस्थान के मुताबिक अब तक दो लाख से ज्यादा श्रध्दालु बाबा के दर्शन के लिए आ चुके हैं। शाम तक इनकी संख्या डबल होने की उम्मीद है। बढ़ाई गई मंदिर की सिक्यूरिटी...

- शिवरात्रि पर साईं के दर्शन के लिए पहुंचे श्रध्दालुओं को शिर्डी और आसपास के इलाके में भारी भीड़ का सामना करना पड़ रहा है।
- सड़कों पर कई किलोमीटर का जाम लगा हुआ है। इलाके में सभी होटल और लाज लगभग फुल हो चुके हैं।
- स्थानीय पुलिस ने भी भीड़ को देखते हुए अतरिक्त पुलिसबल तैनात किया है।
- श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत न हो इसलिए मंदिर प्रशासन ने प्राइवेट सिक्यूरिटी का भी सहारा लिया है।


बाबा हिंदू थे या मुसलमान
- शिर्डी के सांई बाबा के भक्त दुनियाभर में फैले हैं। उनके फकीर स्वभाव और चमत्कारों की कई कथाएं है।
- बाबा के भक्त उनके चित्र और मूर्तियों को अपने घरों में अवश्य रखते हैं। साईं बाबा की ये फोटोज तकरीबन 100 साल पुरानी बताई जाती हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किसने इन फोटोज को खींचा है।

लोक कल्याण में समर्पित था जीवन
- साईं ने अपना पूरा जीवन जनसेवा में ही व्यतीत किया। वे हर पल दूसरों के दुख दर्द दूर करते रहे।
- बाबा के जन्म के संबंध में कोई सटीक उल्लेख नहीं मिलता है।
- साईं के सारे चमत्कारों का रहस्य उनके सिद्धांतों में मिलता है, उन्होंने कुछ ऐसे सूत्र दिए हैं जिन्हें जीवन में उतारकर सफल हुआ जा सकता है।
- खुद शक्ति सम्पन्न होते हुए भी उन्होंने कभी अपने लिए शक्ति का उपयोग नहीं किया।
- सभी साधनों को जुटाने की क्षमता होते हुए भी वे हमेशा सादा जीवन जीते रहे और यही शिक्षा उन्होंने संसार को भी दी।
- साईं बाबा शिर्डी में एक सामान्य इंसान की भांति रहते थे।

बाबा के फ्यूनरल के लिए हुई थी वोटिंग
- शिर्डी के साईं बाबा का निधन 15 अक्टूबर 1918 (दशहरा के दिन) हुआ था।
- साईं ने दुनिया छोड़ने का संकेत पहले ही दे दिया था, उनका कहना था कि दशहरा का दिन धरती से विदा होने का सबसे अच्छा दिन है।
- शिर्डी में बाबा के जीवन काल में मुसलमान उन्हें यवन फकीर मानते थे और हिंदू उनकी पूजा भगवान की तरह ही किया करते थे।
- बाबा के निधन के बाद उनकी फ्यूनरल किस तरह की जाए, इसको लेकर दोनों पक्षों में टेंशन था।
- सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में वोटिंग कराई गई थी। मतदान में बाबा का अंतिम संस्कार हिंदू रीति से किया जाए वाला पक्ष विजयी रहा था।
- इसके बाद दूसरा पक्ष बाबा का शव कब्रिस्तान में दफन करने के पक्ष में था।

निधन से पूर्व सुनाए गए थे धार्मिक ग्रंथ
- साईं बाबा को लोग अवतार मनाते थे। इसके बाद भी उन्होंने अपने निधन से पूर्व धार्मिक ग्रंथ सुनने की इच्छा व्यक्त की थी।
- उन्होंने शिर्डी के ही एक वझे नाम के व्यक्ति से राम विजय प्रकरण सुनाने को कहा था। वझे ने बाबा को एक सप्ताह तक यह पाठ सुनाया।
- इसके बाद बाबा ने उन्हें हर समय पाठ करने कहा। जब वह पाठ करते-करते थक गए तो बाबा ने उनको आराम करने की सलाह दी थी।

(स्रोत: साईं सच्चरित्र, अध्याय- 43-44)

अब तक 2 लाख लोगों ने किये दर्शन। अब तक 2 लाख लोगों ने किये दर्शन।