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कभी रेलवे स्टेशन पर मांगती थी भीख, आज इनकी फैमिली में हैं 1000 बच्चे

70 साल की सिंधुताई के परिवार में 36 बहुएं, 272 दामाद और करीब हजार बच्चे हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 27, 2017, 04:23 PM IST

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    सिंधुताई द्वारा गोद लिए गए बच्चों का गुजारा लोगों से मिले दान पर होता है।

    पुणे। महाराष्ट्र की वरिष्ठ समाजसेवी सिंधुताई सपकाल को हाल ही में रुस में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए न्योता मिला था। सिंधुताई के भाषण से रुस के लोग भी काफी प्रभावित हुए। 70 साल की सिंधुताई के परिवार में 36 बहुएं, 272 दामाद और करीब हजार बच्चे हैं। ये वो लोग हैं, जो सिंधुताई को यहां-वहां भटकते मिले थे। कोई बच्चा भीख मांगते मिला, तो किसी को जन्म के बाद कोई मां-बाप छोड़कर चले गए थे। सिंधुताई के आश्रम में इन बच्चों को सहारा मिला। फिर सिंधुताई ने ही उनकी शादी भी की। कुछ एेसा रहा सिंधुताई का जीवन संघर्ष.....

    कभी भीख पर गुजारा किया

    -महाराष्ट्र के वर्धा जिले के एक सामान्य गोपालक परिवार में सिंधुताई सपकाल का जन्म 14 नवंबर, 1948 को हुआ था।
    - रुढिवादी परिवार होने के कारण सिंधुताई को चौथी क्लास में स्कूल छोड़ना पड़ा।
    - 9 साल की उम्र में सिंधुताई की शादी उनसे काफी बड़ी उम्र के व्यक्ति से कर दी गई।
    - ताई ने आगे पढ़ने की इच्छा जताई, तो ससुराल वालों ने इसका विरोध किया।
    - जब ताई ने अपनी इच्छाओं को मारना उचित नहीं समझा, तो गर्भवती होने के बावजूद पति ने पिटाई करके घर से निकाल दिया।
    -ताई ने कई महीने सड़कों पर जिंदगी गुजारी। फिर एक तबेले में बेटी को जन्म दिया।
    -ताई ने बच्ची के जन्म के तीन साल बाद तक ट्रेनों में भीख मांगकर गुजर-बसर की।

    एेसे मिली प्रेरणा...

    -एक दिन रेलवे स्टेशन पर माई को एक बच्चा पड़ा मिला। यहीं से उन्हें बेसहारा बच्चों की सहायता करने की प्रेरणा मिली।
    -इसके बाद शुरू हुआ एक अंतहीन सिलसिला, जो आज महाराष्ट्र की 6 बड़ी समाजसेवी संस्थाओं में तब्दील हो चुका है।
    - इन संस्थाओं में एक हजार से ज्यादा बेसहारा बच्चे एक परिवार की तरह रहते हैं।
    - सिंधुताई की संस्था में 'अनाथ' शब्द का इस्तेमाल वर्जित है। बच्चे उन्हें ताई (मां) कहकर बुलाते हैं।
    -इन आश्रमों में विधवा महिलाओं को भी आसरा मिलता है। वे खाना बनाने से लेकर बच्चों की देखरेख का काम करती हैं।

    सैकड़ों दामाद

    -इन आश्रमों में रहने वाले बच्चों के पालन-पोषण व शिक्षा-चिकित्सा का भार सिंधुताई के कंधों पर है।
    - रेलवे स्टेशन पर मिला पहला बच्चा आज उनका सबसे बड़ा बेटा है। वह उनके बाल निकेतन, महिला आश्रम, छात्रावास व वृद्धाश्रम का प्रबंधन देखता है।
    -सिंधुताई 272 बेटियों की धूमधाम से शादी कर चुकी हैं और उनके परिवार में 36 बहुएं भी आ चुकी हैं।

    700 से ज्यादा पुरस्कार मिले

    -राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय समेत करीब 700 अवॉर्ड पा चुकीं सिंधुताई आज भी अपने बच्चों को पालने के लिए किसी के आगे हाथ फैलाने से नहीं चूकतीं।
    - ताई कहती हैं कि मांगकर यदि इतने बच्चों का लालन-पालन हो सकता है, तो इसमें कोई हर्ज नहीं।
    - पिछले साल सिंधुताई को 'आइकोनिक मदर' का नेशनल अवार्ड तत्कालिक राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों मिला था।
    - ताई के जीवन पर 'मी वनवासी' बायोपिक मराठी में पब्लिश हुई है। वहीं 'मी सिंधुताई सपकाल' फिल्म भी बन चुकी है।

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    सिंधुताई की महाराष्ट्र में 4 संस्थाएं हैं।
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    सभी बच्चे सिंधुताई को माई (मां) कहते हैं।
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    ताई के जीवन पर 'मी सिंधुताई सपकाल' फिल्म भी बन चुकी है।
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    सिंधुताई के जीवन पर बनी फिल्म की डीवीडी अमिताभ के हाथों लांच हुई थी।
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    सिंधुताई को 700 से ज्यादा पुरस्कार मिले चुके हैं।
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    इनके आश्रम में हर उम्र के बच्चे हैं।
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    सिंधुताई आश्रम के बच्चों को कहानियां सुनाती हैँ।
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    सिंधुताई की संस्था में 'अनाथ' शब्द का इस्तेमाल वर्जित है।
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    सिंधुताई को कोई बच्चा भीख मांगते मिला, तो किसी को जन्म के बाद कोई मां-बाप छोड़कर चले गए थे।
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    इन आश्रमों में विधवा महिलाओं को भी आसरा मिलता है।
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    सिंधुताई 272 लड़कियों की शादी करवा चुकी हैं।
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Web Title: Fact About Social Worker Sindhutai Sapkal
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